सीबीआई जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए विषय विशेषज्ञ ने न केवल 3 मई का प्रश्न पत्र तैयार करने में मदद की थी, बल्कि उसके कुछ हिस्सों का अनुवाद भी किया था। इसके कुछ दिनों बाद ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट को एक अहम जानकारी दी है। एजेंसी ने बताया कि भविष्य में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने और सुरक्षा से जुड़ी किसी भी चूक की आशंका को घटाने के लिए वह अनुवाद के कम से कम 85% काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का उपयोग करेगी।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में NTA के पुनर्गठन या बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इससे पहले दाखिल किए गए अपने हलफनामे में एजेंसी ने परीक्षा की सुरक्षा, प्रशासन और तकनीक में बड़े पैमाने पर बदलाव की रूपरेखा पेश की है। इसके साथ ही एजेंसी ने रद्द की गई NEET-UG 2026 परीक्षा के प्रबंधन का भी बचाव किया। NTA का कहना है कि परीक्षा के दौरान अब तक के सबसे कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। हालांकि, परीक्षा के आसपास कदाचार की शिकायतें मिलने के बाद इसे रद्द करने का कठिन फैसला लिया गया।
हलफनामे में बताए गए भविष्य के कदमों में AI से अनुवाद का प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच में यह खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार विशेषज्ञों में से एक, मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने प्रश्न सेट करने और पेपर का अनुवाद करने, दोनों में हिस्सा लिया था। पुणे के मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स की जीव विज्ञान विशेषज्ञ मंधारे ने बॉटनी और जूलॉजी दोनों खंडों के सवालों का अनुवाद किया था। इससे उन्हें पेपर के एक बड़े हिस्से तक पहुंच मिल गई थी।
इसके अलावा लातूर के दयानंद जूनियर कॉलेज के एक अन्य गिरफ्तार विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान लेक्चरर पी वी कुलकर्णी पर पेपर का मराठी में अनुवाद करने का आरोप है। जांचकर्ताओं का दावा है कि मंधारे ने सह-आरोपी मनीषा वाघमारे और कुलकर्णी के साथ मिलकर यह साजिश रची थी।
हलफनामे में इस बात का भी जिक्र है कि पेपर सेटर, मॉडरेटर, वेटर, अनुवादक और प्रूफ़रीडर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए रैंडमाइजेशन और रोटेशन नीति को और अधिक संस्थागत बनाया जा रहा है। अब NTA की उच्च-स्तरीय परीक्षाओं में शामिल होने वाले इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बैकग्राउंड की बहुत ही कड़ाई से जांच की जाएगी।
यह हलफनामा ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने एक अहम टिप्पणी की थी। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि यह बेहद दुखद है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक के मामलों से कोई सबक नहीं सीखा।
अपने बचाव में NTA ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति (HPSC) की देखरेख में लागू किए गए सुधारों का विस्तृत ब्योरा पेश किया। शिक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2024 में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा 101 सिफारिशें सौंपे जाने के बाद इस समिति का गठन किया था। एजेंसी के अनुसार, यह समिति अभी भी काम कर रही है और इन सिफारिशों को लागू करने की निरंतर निगरानी कर रही है।
NEET-UG 2026 से तीन सप्ताह पहले इस समिति ने तैयारियों की समीक्षा की थी और परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और बाद के उपायों का एक विस्तृत सेट सुझाया था। इन कड़े उपायों में बुनियादी ढांचे, निगरानी और रसद को कवर करने वाली व्यापक मॉक ड्रिल शामिल थी। इसके अलावा सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, कम से कम 90 दिनों तक फुटेज को सुरक्षित रखना और किसी भी जोखिम की पहचान करने के लिए उम्मीदवारों के डेटा का विश्लेषण करना भी शामिल था।
समिति ने रिकॉर्ड किए गए फुटेज के व्यापक विश्लेषण की भी सिफारिश की थी ताकि उन गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके जिन्हें रियल-टाइम में नहीं पकड़ा जा सका हो। हलफनामे के मुताबिक, 3 मई को भारत भर के 5,432 केंद्रों और विदेशों के 14 केंद्रों पर NEET-UG 2026 का आयोजन एक बेहद मजबूत सुरक्षा ढांचे के तहत किया गया था। इस दौरान आधार (Aadhaar) आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का इस्तेमाल किया गया जिसमें क्यूआर-कोड सत्यापन, लाइव तस्वीरें और फिंगरप्रिंट कैप्चर शामिल थे।
चेहरे या प्रमाणीकरण में किसी भी तरह के बेमेल होने पर NTA कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेजा जाता था। इसके अलावा 22,750 से अधिक हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टरों का उपयोग करके कई स्तरों पर सघन तलाशी अभियान भी चलाया गया था। इलेक्ट्रॉनिक नकल को रोकने के लिए सभी 5,432 परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाए गए थे। परीक्षा हॉल, एंट्री गेट, बायोमेट्रिक काउंटर और कंट्रोल रूम में लगभग 1.85 लाख सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए थे।
कदाचार का पता लगाने के लिए सर्विलांस फीड का विश्लेषण करने के वास्ते AI आधारित उपकरणों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही जिला-स्तरीय समन्वय समितियों और शिक्षा मंत्रालय में एक अंतर-विभागीय नियंत्रण कक्ष सहित पांच-स्तरीय ढांचे के माध्यम से पूरी निगरानी की गई। प्रश्न पत्रों की सुरक्षा को लेकर एजेंसी ने बताया कि इसके कई सेट तैयार किए गए थे। छपाई का काम कड़े प्रोटोकॉल और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में किया गया था और प्रिंटिंग सुविधाओं पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह से प्रतिबंध था।
पेपर तैयार करने वालों को बिना इंटरनेट या मोबाइल फोन के सुरक्षित कमरों में रखा गया था और उनके रफ काम को रोजाना नष्ट कर दिया जाता था। प्रश्न पत्र के ट्रंक को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और जिला पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच इंडिया पोस्ट द्वारा परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया था। सीसीटीवी की निगरानी में रखे गए इन ट्रंकों को परीक्षा शुरू होने से मात्र 45 मिनट पहले ही खोला गया।
इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद 7 मई की शाम को एजेंसी को कदाचार की सूचना मिली। अगले ही दिन स्वतंत्र सत्यापन के लिए इसे केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया। जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर परीक्षा रद्द कर दी गई और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। NTA ने अदालत को बताया कि 21 जून को होने वाली पुन: परीक्षा को बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण और अंतर-एजेंसी समन्वय के साथ और भी अधिक मजबूत एसओपी ढांचे के तहत आयोजित किया जाएगा। सुरक्षित रसद और परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए मुख्य सचिवों, डीजीपी और डाक विभाग के साथ व्यापक समन्वय किया गया है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि उसकी प्रमुख परीक्षाओं में से केवल NEET-UG 2026 ही पेन और पेपर (PPT) मोड में आयोजित की गई थी, जबकि अन्य सभी बड़ी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में होती हैं। विशेषज्ञ समिति ने विशेष रूप से NEET-UG को भी CBT मोड में बदलने की सिफारिश की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से अगले परीक्षा चक्र से इस बदलाव को लागू किया जाएगा जिसमें मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज टेस्टिंग भी शामिल होगी।
भविष्य की योजनाओं के तहत NTA प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में कम से कम 1,000 सुरक्षित परीक्षण केंद्र विकसित करने और क्लाउड-आधारित बुनियादी ढांचे, एआई-एमएल तथा ब्लॉकचेन को अपनाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा एजेंसी के पास उपलब्ध अतिरिक्त धन का उपयोग उन्नत साइबर सुरक्षा प्रणालियों, एआई-सक्षम सीसीटीवी निगरानी और मोबाइल जैमर के माध्यम से परीक्षा सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
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