देश की सर्वोच्च अदालत में न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी आज सुबह केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
यह नियुक्तियां सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए एक अध्यादेश के ठीक बाद हुई हैं, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया गया था। इन पांच नए चेहरों के शामिल होने के साथ ही देश की शीर्ष अदालत में अब जजों के कुल 37 पद पूरी तरह से भर गए हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश पिछले हफ्ते देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा की गई थी।
नवनियुक्त जजों में सबसे पहला नाम जस्टिस शील नागू का है, जो वर्तमान में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे। मध्य प्रदेश को अपना मूल उच्च न्यायालय मानने वाले जस्टिस नागू का जन्म 1 जनवरी 1965 को हुआ था।
अक्टूबर 1987 में एक वकील के रूप में शुरुआत करने वाले जस्टिस नागू को मई 2011 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और मई 2013 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह जुलाई 2024 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे। वह जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े ‘कैश-एट-रेसिडेंस’ विवाद की जांच करने वाली आंतरिक समिति के सदस्य भी रहे हैं और वह 31 दिसंबर 2029 को सेवानिवृत्त होंगे।
इस सूची में दूसरा बड़ा नाम जस्टिस श्री चंद्रशेखर का है, जो बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल रहे थे। रांची में 25 मई 1965 को जन्मे जस्टिस चंद्रशेखर का मूल उच्च न्यायालय झारखंड है। दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1993 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण कराया था। जनवरी 2013 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया था।
इसके बाद वह राजस्थान हाई कोर्ट होते हुए सितंबर 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उनके आने से सुप्रीम कोर्ट में झारखंड का प्रतिनिधित्व बहाल हुआ है, जहां वर्तमान में कोई जज नहीं था। वह सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और मालेगांव विस्फोट जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई कर चुके हैं और 24 मई 2030 को सेवानिवृत्त होंगे।
जस्टिस संजीव सचदेवा भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। दिल्ली को अपना मूल उच्च न्यायालय मानने वाले जस्टिस सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट में एडवर्ट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में योग्यता प्राप्त की और 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किए गए।
अप्रैल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बनने के बाद, साल 2024 में उनका तबादला मध्य प्रदेश हुआ और जुलाई 2025 में उन्होंने वहां के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह दो दशकों से अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील भी रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल लगभग साढ़े तीन साल का होगा।
चौथे न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अरुण पल्ली को पदोन्नत किया गया है, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। पंजाब और हरियाणा को अपना मूल उच्च न्यायालय मानने वाले जस्टिस पल्ली का जन्म 18 सितंबर 1964 को पटियाला में हुआ था।
उन्होंने साल 1988 में पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली और लंबे समय तक वकालत की। साल 2004 से 2007 के बीच वह पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे और दिसंबर 2013 में न्यायाधीश बने।
अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था। उन्होंने हरियाणा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी कई मध्यस्थता पहलों का नेतृत्व किया है। शीर्ष अदालत में उनका कार्यकाल तीन वर्ष से कुछ अधिक समय का होगा।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ऐतिहासिक नाम वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का है। वह देश के इतिहास में साल 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद बार (वकील संघ) से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली दूसरी महिला बन गई हैं। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना के साथ वह सुप्रीम कोर्ट की केवल दो मौजूदा महिला जजों में से एक होंगी। 27 जून 1966 को कोयंबटूर में जन्मीं मोहना ने साल 1996 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में काम शुरू किया और 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला।
दिलचस्प बात यह है कि वी. मोहना मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की सहपाठी रही हैं और उन्होंने पूर्व अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल के कार्यालय में भी काम किया है। उन्होंने सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकारों और कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध जैसे कई बेहद संवेदनशील और बड़े मामलों में अदालत के सामने पैरवी की है।
उनकी नियुक्ति से वह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला जज बन गई हैं। बार से सीधे पदोन्नत होने के कारण उनका कार्यकाल तुलनात्मक रूप से लंबा होगा और वह जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी।
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