केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा 12वीं कक्षा के लिए पहली बार इस्तेमाल किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम पर देशव्यापी विवाद छिड़ गया है। खास बात यह है कि इस विवाद की अगुवाई किसी राजनीतिक दल या सड़क पर हो रहे प्रदर्शनों ने नहीं, बल्कि इंटरनेट पर मौजूद तीन किशोरों ने की है।
इनमें से एक छात्र को किसी और की उत्तर पुस्तिका थमा दी गई थी। दूसरे 17 वर्षीय छात्र ने ओएसएम के टेंडर की बारीकियों को उजागर किया। वहीं, तीसरे 19 वर्षीय युवक ने सीधे तौर पर वेब पोर्टल में सेंधमारी का दावा कर दिया।
इन तीनों युवाओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स तथा इंस्टाग्राम पर मौजूद इन जैसे कई अन्य छात्रों ने सीबीएसई को तकनीकी मोर्चों पर अपनी गलतियां स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया है। हालांकि, बोर्ड ने अपने सिस्टम का बचाव करते हुए भ्रष्टाचार के सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। ओएसएम प्लेटफॉर्म का संचालन करने वाली हैदराबाद स्थित कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से पूरी तरह इनकार किया है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि ये छात्र ‘जेन-जेड’ से ताल्लुक रखते हैं। यह वही नई पीढ़ी है जो भारतीय उपमहाद्वीप में बड़े राजनीतिक बदलावों के केंद्र में है।
रविवार को विवाद में आए नए मोड़
रविवार 31 मई को इस विवाद में कई नए घटनाक्रम देखने को मिले। राहुल गांधी ने उस छात्र वेदांत श्रीवास्तव से मुलाकात की जिसे गलत उत्तर पुस्तिका मिली थी। दोनों ने बातचीत के दौरान बताया कि कैसे उन्हें ‘राष्ट्रविरोधी’, ‘डीप स्टेट एजेंट’ और पाकिस्तानी जैसे ताने सुनने पड़े। उन्होंने ‘सोरोस एजेंट’ कहे जाने पर भी तंज कसा। दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोग अक्सर हंगरी-अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस पर वामपंथी एजेंडे को फंड करने का आरोप लगाते हैं।
इससे पहले राहुल गांधी ने 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत का एक ब्लॉग भी साझा किया था। इस ब्लॉग में सीबीएसई पर ओएसएम टेंडर प्रक्रिया में अपनी ही चयन प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया था। गांधी ने लिखा कि सार्थक का काम यह साबित करता है कि भारत की नई पीढ़ी बेहद प्रतिभाशाली और निडर है और वे जल्द ही पूरा सच सामने लाएंगे।
इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद तीसरे किशोर 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी हैं। निसर्ग ने दावा किया था कि ओएसएम वेब पोर्टल में सेंध लगाई जा सकती है। इसके बाद सीबीएसई ने सीधे तौर पर निसर्ग का नाम लिए बिना एक्स पर एक पोस्ट में खामियों की बात मान ली। बोर्ड ने कहा कि खोजी गई खामियों को दूर कर लिया गया है और अन्य संभावित कमजोरियों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कमियां उजागर करने वाले एथिकल हैकर्स का आभार भी जताया।
इसके बाद निसर्ग ने यो यो हनी सिंह के एक गाने की क्लिप शेयर करते हुए कहा कि सीबीएसई ने अपनी गलती मान ली है। दोबारा पोर्टल हैक करने के सवाल पर निसर्ग ने एक मीडिया संस्थान को बताया कि उनका काम अब पूरा हो चुका है।
विवाद की असल जड़
इस साल 12वीं कक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पेश किए गए ओएसएम सिस्टम ने पुरानी व्यवस्था की जगह ली है। इसमें उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों का स्क्रीन पर मूल्यांकन किया जाता है। सीबीएसई का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और अंकों को जोड़ने में होने वाली गलतियां कम होती हैं।
मई के मध्य में नतीजे आने के बाद 12वीं का पास प्रतिशत सात साल के निचले स्तर पर आ गया। पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों ने स्कैनिंग के धुंधले होने, पन्ने गायब होने और बिना जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं जैसी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।
सीबीएसई ने एक बयान जारी कर ओएसएम को निष्पक्ष और पारदर्शी बताया है। बोर्ड के अपने आंकड़ों के अनुसार जांची गई कुल 98.6 लाख उत्तर पुस्तिकाओं में से 68,018 को खराब इमेज क्वालिटी के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा। इसके अलावा 13,583 कॉपियों को स्कैनिंग विफल होने के बाद मैन्युअल रूप से जांचा गया।
गलत कॉपी मिलने का मामला
इस पूरे विवाद का पहला बड़ा चेहरा दिल्ली के रहने वाले वेदांत श्रीवास्तव बने। भौतिकी में उम्मीद से काफी कम अंक मिलने पर उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। उन्हें जो कॉपी मिली उसकी हैंडराइटिंग वेदांत की लिखावट से बिल्कुल अलग थी।
23 मई को एक्स पर उनका पोस्ट वायरल हो गया और इसे 25 लाख से ज्यादा बार देखा गया। यह स्क्रीनशॉट इंस्टाग्राम पर भी तेजी से फैला। सीबीएसई ने तुरंत संज्ञान लेते हुए सही उत्तर पुस्तिका उनके ईमेल पर भेजी और रिजल्ट अपडेट करने का आश्वासन दिया। इस समाधान से पहले वेदांत को भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। एक राष्ट्रीय टीवी एंकर ने उन्हें पाकिस्तानी तक कह दिया, हालांकि बाद में एंकर ने माफी मांग ली।
टेंडर दस्तावेजों की पड़ताल
झारखंड के रांची के रहने वाले 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत भी अपने नतीजों से असंतुष्ट थे। एक ब्लॉग चलाने वाले इस ऑनलाइन जासूस ने सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर सीबीएसई के टेंडर दस्तावेजों की बारीकी से तुलना की। ‘हाउ सीबीएसई रीरोट रूल्स टू फेवर कोएम्प्ट एडुटेक’ नामक अपने ब्लॉग में उन्होंने आरोप लगाया कि विजेता कंपनी को योग्य बनाने के लिए तीन टेंडर राउंड में तकनीकी मानकों को कम किया गया।
सार्थक ने पुराने और नए दस्तावेजों के बीच कम से कम 15 विसंगतियां गिनाईं। उनके अनुसार सबसे अहम बदलाव ‘पहले ब्लैकलिस्ट की गई’ कंपनियों को रोकने वाली शर्त को ‘वर्तमान में ब्लैकलिस्ट की गई’ में बदलना था। उनका तर्क है कि इस बदलाव ने कोएम्प्ट एडुटेक को योग्य बना दिया, क्योंकि कथित तौर पर एक समय तेलंगाना के कुछ विश्वविद्यालयों ने इसे ब्लैकलिस्ट किया था।
सीबीएसई और कंपनी ने नियमों से छेड़छाड़ के दावों को सिरे से खारिज किया है। बोर्ड के अधिकारियों ने साफ किया कि उन्होंने खरीद प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गुणवत्ता और लागत के आधार पर सबसे कम बोली लगाने वाले को ठेका दिया था। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सीबीआई जांच की मांग की है।
पोर्टल हैकिंग का दावा
एक शौकिया साइबर सुरक्षा शोधकर्ता और इसी साल 12वीं पास करने वाले निसर्ग अधिकारी ने पोर्टल के फ्रंटएंड कोड में एक मास्टर पासवर्ड खोज निकाला। इससे ओटीपी स्टेप को छोड़कर सीधे ओएसएम पेपर-चेकिंग डैशबोर्ड खोला जा सकता था। उन्होंने बताया कि वह आसानी से छात्रों के अंकों में बदलाव कर सकते थे। उन्होंने फरवरी में ही सरकार को इन खामियों के प्रति आगाह किया था।
26 मई को सीबीएसई ने पहले इस दावे को खारिज किया और कहा कि वह केवल एक टेस्टिंग साइट थी। हालांकि पांच दिन बाद जब वेदांत और सार्थक के दावों ने तूल पकड़ा, तो बोर्ड ने सुरक्षा खामियों की बात स्वीकार कर ली। सरकार और आईआईटी की एक साइबर सुरक्षा टीम को सिस्टम सुरक्षित करने के लिए तैनात किया गया है।
कंपनी का बचाव और आगे की राह
कोएम्प्ट एडुटेक के सीईओ वीएसएन राजू ने पूरे सिस्टम के दोषपूर्ण होने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने वेदांत के मामले को तकनीक नहीं बल्कि स्कैनिंग की गलती करार दिया। राजू ने टेंडर की शर्तों में बदलाव से भी इनकार करते हुए स्कैनर्स के रेजोल्यूशन को बिल्कुल सटीक बताया। तेलंगाना मामले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतों ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी थी और कंपनी का नाम बदलना कोई रहस्य नहीं था।
यह पूरा विवाद सरकारी परीक्षा तंत्र के लिए एक बेहद मुश्किल समय में सामने आया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक विवाद में घिरे हुए हैं। 30 मई को सीयूईटी प्रवेश परीक्षा में भी देरी देखने को मिली। नीट मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।
सीबीएसई ने साफ किया है कि अभी तक कोएम्प्ट को कोई भुगतान नहीं किया गया है। बोर्ड का पुनर्मूल्यांकन और पोस्ट-रिजल्ट एक्टिविटीज पोर्टल जो 29 मई को खुलना था, उसे अब 1 जून 2026 से चालू कर दिया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन के उच्चतम मानकों और पारदर्शी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
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