comScore राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के आदेश को चुनौती देने से किया इनकार, निवेशकों में हैरानी - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के आदेश को चुनौती देने से किया इनकार, निवेशकों में हैरानी

| Updated: June 11, 2026 12:36

15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले में राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के नए फोरेंसिक ऑडिट को दी मंजूरी, अपना बचाव न करने के फैसले ने निवेशकों को चौंकाया।

बेंगलुरु स्थित प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) ने कहा है कि वह बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा दिए गए नए फोरेंसिक ऑडिट के आदेश में पूरा सहयोग करेगी। कंपनी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि वे सेबी के अंतरिम आदेश को चुनौती देने की कोई योजना नहीं बना रहे हैं। हालांकि, कंपनी ने जांच के दौरान असहयोग के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है जो सेबी द्वारा लगाए गए थे।

दरअसल, एक निवेशक की शिकायत के बाद सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अपने राजस्व को 15.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का गंभीर आरोप लगाया है। इससे पहले सेबी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि राजेश एक्सपोर्ट्स जांच में बाजार नियामक के साथ सहयोग नहीं कर रही है।

यहां तक कि कंपनी पर फोरेंसिक ऑडिटर्स को अपने एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम, जर्नल डंप और बहीखातों तक पहुंच न देने का भी आरोप लगा था।

अब राजेश एक्सपोर्ट्स के मालिक राजेश मेहता ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनका कहना है कि वे सेबी के आदेश को चुनौती नहीं देंगे और बाजार नियामक द्वारा आदेशित नए फोरेंसिक ऑडिट में पूरी तरह से सहयोग करेंगे।

मीडिया से बातचीत में राजेश मेहता ने कहा कि वह इस बात से कभी सहमत नहीं होंगे कि उन्होंने संबंधित दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनसे जो भी मांगा गया, वह सब जमा किया गया है। मेहता के अनुसार, हो सकता है कि सेबी को कुछ न मिला हो या कंपनी से कुछ छूट गया हो, लेकिन अब हर चीज का मिलान कर लिया जाएगा।

आपको बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े सोना निर्यातक के रूप में पहचाने जाने वाले राजेश मेहता और उनके भाई प्रशांत मिलकर इस कंपनी को चलाते हैं। वे मूल रूप से गुजरात के मोरबी से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनका परिवार अब कर्नाटक में बस गया है। राजेश मेहता का जन्म भी कर्नाटक में ही हुआ था।

दूसरी तरफ, राजेश एक्सपोर्ट्स के इस फैसले ने कई निवेशकों को हैरान कर दिया है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ निवेशकों ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए सवाल उठाया कि कंपनी अपना बचाव क्यों नहीं करना चाहती और सेबी को गलत क्यों नहीं साबित कर रही है। उनका तर्क है कि अगर सेबी पहले गलत था, तो वह अब भी गलत ही होगा।

पिछले सप्ताह जारी अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। बाजार नियामक का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने पांच साल की अवधि में अपने समेकित राजस्व (Consolidated Revenue) को लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये अधिक दिखाया है।

सेबी के अनुसार, इस भारी-भरकम राजस्व का एक बड़ा हिस्सा आरईएल की विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित दुनिया की सबसे बड़ी कीमती धातु रिफाइनरियों में से एक ‘वालकैम्बी एसए’ (Valcambi SA) के खाते में दिखाया गया था।

सेबी ने इस दौरान एक बड़ी विसंगति को भी उजागर किया। जहां एक ओर आरईएल के समेकित खातों में इन विदेशी संस्थाओं से भारी राजस्व दिखाया गया था, वहीं वालकैम्बी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन वित्तीय विवरणों में दर्ज राजस्व मूल कंपनी द्वारा बताए गए आंकड़ों का एक छोटा सा हिस्सा मात्र था।

नियामक ने पाया कि आरईएल द्वारा रिपोर्ट किया गया लगभग पूरा राजस्व उसकी विदेशी सहायक कंपनियों से आता हुआ प्रतीत होता है। फिर भी, इन संस्थाओं के विस्तृत वित्तीय विवरण निवेशकों, विश्लेषकों या अन्य हितधारकों के लिए स्वतंत्र जांच हेतु सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थे।

सेबी का मानना है कि यह स्थिति पारदर्शिता और प्रकटीकरण मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नियामक ने चिंता व्यक्त की है कि निवेशकों के सामने कंपनी के वास्तविक वित्तीय स्वास्थ्य और संचालन के पैमाने की एक विकृत तस्वीर पेश की गई होगी।

अपने अंतरिम निष्कर्षों में सेबी ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह आरईएल की वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से पेश करने का मामला लगता है, क्योंकि रिपोर्ट किए गए राजस्व का मिलान उसकी प्रमुख विदेशी सहायक कंपनी के ऑडिट किए गए रिकॉर्ड से नहीं हो सका।

ये आरोप कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय रिपोर्टिंग मानदंडों के मूल ढांचे पर सीधा प्रहार करते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि यह कथित हेराफेरी कई वित्तीय वर्षों में फैली है और इसमें खरबों रुपये शामिल हैं। सेबी के इन निष्कर्षों ने जटिल बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट संरचनाओं की निगरानी में ऑडिटिंग, नियामक निरीक्षण और प्रकटीकरण प्रथाओं की प्रभावशीलता पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और यह अंतरिम आदेश अंतिम निष्कर्ष न होकर केवल सेबी के प्रारंभिक निष्कर्षों का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले तीन दशकों से मीडिया से दूर रहने वाले राजेश मेहता ने नियामक द्वारा बताई गई इन कमियों का कारण कंपनी के विशाल डेटा को बताया है। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास लगभग 400 जीबी का डेटा मेंटेन रहता है, जिसका अर्थ यह है कि कुछ दस्तावेजों को ढूंढना मुश्किल हो सकता है, लेकिन उन्हें जानबूझकर छिपाया नहीं गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि आरईएल ने अंतरिम आदेश के तहत मांगे गए दस्तावेज देना शुरू कर दिया है और अगले पांच से छह दिनों में इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने आरईएल को जांच प्राधिकरण के साथ सहयोग करने, 30 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने, और अपने वित्तीय विवरणों, संबंधित-पक्ष लेनदेन और अन्य फाइलिंग में सही और निष्पक्ष खुलासे करने का निर्देश दिया था।

जब मेहता से पूछा गया कि क्या कंपनी सेबी के निर्देशों को कानूनी रूप से चुनौती देने की योजना बना रही है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा करने का कोई कारण ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सेबी के पास किसी भी संख्या में वर्षों तक दस्तावेज मांगने का पूरा अधिकार है। इस आदेश में कोई जुर्माना, कोई दंड या कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, तो फिर वे इसे चुनौती क्यों दें।

उन्होंने यह भी बताया कि आदेश में लगा व्यापार प्रतिबंध किसी व्यक्ति विशेष पर लागू होता है, न कि कंपनी पर। कंपनी को कोई भी काम करने से नहीं रोका गया है।

राजेश मेहता ने स्पष्ट किया कि पिछले ढाई वर्षों में सेबी द्वारा मांगे गए कई हजार स्पष्टीकरणों में से केवल नौ ऐसे हैं जो नियामक की संतुष्टि के अनुसार अनसुलझे हैं। राजस्व को बढ़ाकर दिखाने का सवाल उन्हीं नौ सवालों में से एक है। उन्होंने कहा कि बाकी आठ सवाल बेहद मामूली हैं और यह नौवां सवाल भी बिल्कुल सामान्य ही है। सेबी को कुछ चीजें संदिग्ध लगी हैं और उसे और दस्तावेजों की जरूरत है।

अंत में राजेश मेहता ने भरोसा जताते हुए कहा कि जब अंतिम आदेश जारी होगा, तो निष्कर्ष कंपनी के पक्ष में ही होगा। यह पूछे जाने पर कि क्या जुर्माना लगाने वाले सेबी के अंतिम आदेश को चुनौती दी जाएगी, मेहता ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रदान करने के बाद अंतिम आदेश में कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन अगर कोई अतार्किक अंतिम आदेश पारित किया जाता है, तो वे निश्चित रूप से उसे कानूनी चुनौती देंगे।

यह भी पढ़ें-

पीएम की ‘सादगी’ की अपील के बीच लंदन उड़े 150 जज और वकील! बैडमिंटन टूर्नामेंट पर छिड़ा भारी विवाद

एयर इंडिया 171 क्रैश: एक साल बाद भी दर्द से जूझ रहा एकमात्र जीवित बचा शख्स, कहा- ‘मेरा एक हिस्सा उस दिन मर गया

Your email address will not be published. Required fields are marked *