12 जून, 2025 को अहमदाबाद से गैटविक जा रहे एयर इंडिया के विमान (AI 171) के उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त होने से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के 15 परिवारों ने अपने प्रियजनों का निजी सामान वापस लेने से भारी मन से इनकार कर दिया है। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन परिवारों ने कपड़े, पासपोर्ट, वॉलेट और तस्वीरों जैसी यादों को दोबारा न कुरेदने का फैसला किया है।
इस भयानक दुर्घटना में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी, जबकि 39 वर्षीय विश्वास कुमार रमेश एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति थे। विमान के गिरने से जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों की भी जान चली गई। मृतकों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक शामिल थे।
सामान वापसी के लिए ‘फैमिली रिटर्न्स सेंटर’
हादसे के बाद पीड़ितों का सामान लौटाने के लिए एयर इंडिया ने अहमदाबाद में एक ‘फैमिली रिटर्न्स सेंटर’ (FRC) स्थापित किया था। एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार, इस केंद्र पर पूर्व अपॉइंटमेंट के जरिए पीड़ित परिवारों को पूरे सम्मान और गरिमा के साथ उनके अपनों की पहचान की गई 8,000 चीजें सौंपी गईं।
यह केंद्र फरवरी तक सक्रिय था। अधिकारियों ने बताया कि यहां परिवारों को एक विशेष पोर्टल देखने के लिए 45 दिन का समय दिया गया था। इस पोर्टल पर वे उन तस्वीरों पर क्लिक कर सकते थे जिन्हें वे पहचानते थे, फिर उन सामानों को ‘कार्ट’ में डालकर दावा करने के लिए एयरलाइन से संपर्क कर सकते थे।
घटनास्थल से कुल 22,000 निजी चीजें बरामद की गई थीं। इनमें से पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों सहित लगभग 8,000 चीजों की ही सीधे तौर पर पहचान हो सकी। बाकी बची 14,000 चीजें, जिनका सीधा संबंध किसी व्यक्ति से नहीं जुड़ पाया, उन्हें ‘अनएसोसिएटेड पर्सनल बिलॉन्गिंग्स’ पोर्टल पर डाल दिया गया।
यादों से जुड़ा दर्द और अधूरे दस्तावेज
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि 15 परिवारों ने सामान लेने से साफ मना कर दिया है। इसके अलावा 25 डिजिटल उपकरण भी मिले थे, जिनमें से 16 परिवारों को लौटा दिए गए हैं। बाकी उपकरणों के मामले में या तो दस्तावेज अधूरे हैं या परिवारों ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया है। इन उपकरणों में मुख्य रूप से फोन, लैपटॉप और टैबलेट शामिल हैं।
अपनों की आखिरी निशानियां न लेने वालों में 24 वर्षीय उभरते हुए क्रिकेटर दीर्थ पटेल का परिवार भी शामिल है। दीर्थ के भाई कृतिक का कहना है कि वे अपनी मां को फिर से उसी सदमे से नहीं गुजारना चाहते। इसी तरह, अहमदाबाद की उद्यमी तृप्ति सोनी, जिन्होंने हादसे में अपने भाई और दो भाभियों को खो दिया था, उन्होंने भी सामान वापस मिलने की इस प्रक्रिया को बेहद थका देने वाला और दर्दनाक बताया था।
इस हादसे में जान गंवाने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी शामिल थे, जो अपनी पत्नी के पास लंदन में बेटी के घर जा रहे थे। इनके अलावा पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद बच्चों के पास लौट रहा एक युवा पिता, ईद पर पिता को सरप्राइज देने आ रहा एक बेटा और अपनी शादी की सालगिरह मनाने भारत आया एक कनाडाई समलैंगिक जोड़ा भी इस अभागे विमान में सवार था।
रुला देने वाली निशानियां
एक एयरलाइन अधिकारी ने बताया कि जिन 187 मृतकों के सामान की पहचान उनके दस्तावेजों, लेबलिंग या मिलने की जगह से पुख्ता तौर पर हो गई थी, उनमें से भारत और यूके में 139 मृतकों का सामान लौटाया जा चुका है। जहां तक बिना पहचान वाले सामान का सवाल है, वह 77 मृतकों से जुड़ा था, जिनमें से 60 के परिवारों को भारत और ब्रिटेन में चीजें वापस कर दी गई हैं। यह पूरी प्रक्रिया परिवारों के दुख और निजता का सम्मान करते हुए व्यक्तिगत रूप से पूरी की गई।
पोर्टल पर मौजूद सामानों की सूची आंखें नम कर देने वाली है। इसमें एक बच्चे के लिए पेड़ों और ट्रकों के डिजाइन वाला सफेद स्वेटर, ‘डैड टू-बी’ (होने वाले पिता) लिखा एक नीला बैज और राखियों के कई गुच्छे शामिल थे। इनमें से एक राखी किसी बच्चे के लिए थी जिस पर सुपरमैन जैसा किरदार बना हुआ था।
इसके अलावा प्रार्थना की किताबें, मोतियों की मालाएं, चरखी के साथ पतंग का मांझा, खिलौने, रसोई का सामान, कपड़े, सर्जिकल कैंची, जली हुई घड़ियां, बालों की एक्सेसरीज और पासपोर्ट भी मिले। परिवारों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पीले या सफेद धातु के रूप में चिह्नित सोने और चांदी के कई गहने भी इस सूची में शामिल थे।
मुआवजा और सहायता
जमीन पर घायल हुए 19 लोगों को लेकर अधिकारी ने बताया कि 94 प्रतिशत घायलों को उनकी चोट की गंभीरता और आजीविका के नुकसान के आधार पर पूर्ण एकमुश्त मुआवजा या अंतरिम मुआवजा मिल चुका है। बाकी मामलों में या तो दस्तावेज अधूरे हैं या परिवारों में विवाद चल रहा है। कई लोगों ने हादसे के बाद हेल्प डेस्क से फॉर्म तो लिया था, लेकिन उसे जमा नहीं किया। अब एयर इंडिया ने अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है और परिवारों से संपर्क कर रही है।
एयर इंडिया की ओर से दिए गए मुआवजे के अलावा, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पीड़ितों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की थी। यह टाटा समूह की परोपकारी प्रतिबद्धताओं का हिस्सा था। इसके साथ ही प्रभावितों की मदद के लिए ‘AI 171 मेमोरियल और वेलफेयर ट्रस्ट’ भी स्थापित किया गया।
अधिकारी के अनुसार, अब तक 96 प्रतिशत पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है और टाटा की ओर से दी जाने वाली एक करोड़ की राशि 91 प्रतिशत परिवारों तक पहुंच चुकी है। बाकी बचे मामलों में कागजी कार्रवाई पूरी न होना या भुगतान लेने से इनकार करना मुख्य वजह है। दुख की इस घड़ी में संबल देने के लिए अब तक टाटा कंपनियों के सीईओ भारत और यूके में 165 प्रभावित परिवारों में से 152 से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं और समर्थन व्यक्त कर चुके हैं।
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