उन्होंने भविष्य की तैयारी की थी, लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। 81 वर्षीय जया गज्जर ने विमान हादसे से ठीक एक दिन पहले ही अपनी वसीयत पर हस्ताक्षर किए थे। अपने तमाम अधूरे काम निपटाने के बाद उन्होंने अपने तीनों बच्चों से कहा था कि अब उन्हें बेहद शांति महसूस हो रही है। किसी को क्या पता था कि इसके अगले ही दिन वह उस दुर्भाग्यपूर्ण एआई फ्लाइट 171 (AI Flight 171) में सवार होने वाली थीं।
11 जून को जया एक नई संपत्ति के कागजी काम के सिलसिले में अपने वकील से मिली थीं। वहीं पर उन्होंने अपनी वसीयत बनाने की तीव्र इच्छा जाहिर की थी, ताकि उनकी संपत्ति को उनकी दो बेटियों और एक बेटे के बीच समान रूप से बांटा जा सके।
उनके बेटे तनय गज्जर भावुक होते हुए बताते हैं कि उस काम को पूरा करने के बाद उनकी मां ने कहा था कि अब उन्हें कोई चिंता नहीं है, यहां तक कि अब उन्हें कोविड (Covid) का भी कोई डर नहीं सताता।
तनय ने यह भी साझा किया कि उनकी मां ने परिवार को पहले ही हिदायत दे दी थी कि उनके निधन के बाद कोई भी बड़े या दिखावटी कर्मकांड न किए जाएं। इस अपूरणीय क्षति के सामने परिवार के लिए मुआवजे के कोई मायने नहीं हैं। अपनी मां को खोने के गम में डूबे तनय कहते हैं कि जब आप अपनी मां को खो देते हैं, तो पैसे की कोई अहमियत नहीं रह जाती। एक मां की कीमत को किसी भी मौद्रिक मूल्य में बिल्कुल नहीं आंका जा सकता है।
इसके साथ ही तनय ने एयर इंडिया की तकनीकी विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उसी दिन दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली उनके परिवार की एयर इंडिया की उड़ान को तकनीकी समस्याओं के कारण कई बार रद्द किया गया था, जिसके बाद उन्हें दूसरी सेवा में स्थानांतरित किया गया। उनका साफ तौर पर मानना है कि अगर उस दिन विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं होती, तो यह दर्दनाक हादसा कभी नहीं होता।
इस हृदयविदारक घटना के बाद अब गज्जर परिवार को अंतिम जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि इस रिपोर्ट से उन्हें उनके सभी सवालों के जवाब मिल सकेंगे और उनके मन को कुछ सांत्वना प्राप्त हो सकेगी।
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