अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देख रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों के बीच इन दिनों EB-5 इमीग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम (निवेश आधारित ग्रीन कार्ड) को लेकर दिलचस्पी काफी बढ़ गई है। अधिकांश भारतीय निवेशक इसके लिए ‘रीजनल सेंटर्स’ का रुख कर रहे हैं, जो बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में निवेशकों के फंड को इकट्ठा करते हैं।
इस बढ़ती होड़ के पीछे सिर्फ अमेरिका में पक्के होने की चाह ही नहीं है, बल्कि सितंबर 2026 में खत्म हो रही ‘ग्रैंडफादरिंग’ (सुरक्षात्मक) प्रावधान की समयसीमा भी एक बड़ी वजह है।
इसी बीच, अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत उच्च-रोजगार वाले क्षेत्रों (गैर-TEA) में न्यूनतम निवेश राशि को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 1.05 मिलियन डॉलर से 1.4 मिलियन डॉलर करने की योजना है। हालांकि, इस फैसले का असर केवल उन नए आवेदकों पर पड़ेगा जिन्होंने अभी तक अपनी EB-5 प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
EB-5 वीजा के नियमों के मुताबिक, प्रत्येक निवेशक को अमेरिकी कार्यबल के लिए कम से कम 10 फुल-टाइम नौकरियां पैदा करना अनिवार्य होता है। नए प्रस्ताव में राहत की बात यह है कि लक्षित रोजगार क्षेत्रों (TEA), जिनमें ग्रामीण और उच्च बेरोजगारी वाले इलाके शामिल हैं, और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए न्यूनतम निवेश राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह राशि पहले की तरह 800,000 डॉलर ही बनी रहेगी। चूंकि अधिकांश भारतीय निवेशक TEA रीजनल सेंटर प्रोजेक्ट्स में ही निवेश करते हैं, इसलिए वे इस बढ़े हुए वित्तीय बोझ से बच जाएंगे।
वैश्विक इमीग्रेशन लॉ फर्म ‘फ्रेगोमेन’ (Fragomen) के सीनियर काउंसल मिच वेक्सलर ने इस संबंध में बताया कि अधिकांश संभावित निवेशकों के लिए निवेश की सीमा 800,000 डॉलर ही रहेगी। यह नया प्रस्ताव मुख्य रूप से नियामक निगरानी को मजबूत करने और कार्यक्रम के संचालन में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से लाया गया है।
हालांकि ईबी-5 रीजनल सेंटर प्रोग्राम को 30 सितंबर 2027 तक के लिए अधिकृत किया गया है, लेकिन इसके बाद की स्थिति अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के फैसले पर निर्भर करेगी। इमीग्रेशन वकीलों का कहना है कि साल 2022 के ‘ईबी-5 रिफॉर्म एंड इंटीग्रिटी एक्ट’ (RIA) के तहत, जो निवेशक 30 सितंबर 2026 या उससे पहले अपनी याचिका दायर कर देंगे, उन्हें ग्रैंडफादरिंग क्लॉज का संरक्षण मिलेगा।
इसका मतलब है कि भविष्य में अगर यह प्रोग्राम बंद भी होता है, तो भी उनका निवेश-आधारित ग्रीन कार्ड का रास्ता सुरक्षित रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए नियम से बहुत कम निवेशक प्रभावित होंगे, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग 30 सितंबर 2026 की समयसीमा समाप्त होने से पहले ही अपने आवेदन दाखिल करने की जल्दी में हैं।
प्रस्तावित नियम मुख्य रूप से उन प्रावधानों को कानूनी रूप देते हैं जिन्हें कांग्रेस ने पहले ही आरआईए (RIA) के माध्यम से लागू किया था। इसके अलावा, इसमें रीजनल सेंटर्स की ऑडिट शक्तियों को बढ़ाने, अनुपालन नियमों को सख्त करने, आवेदकों और सेंटर के कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक्स अनिवार्य करने तथा निवेशकों को आकर्षित करने वाले प्रमोटरों की निगरानी कड़े करने जैसे कदम शामिल हैं।
फिलहाल इस प्रस्ताव को 60 दिनों के लिए सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए खुला रखा गया है, जिसके बाद डीएचएस (DHS) सभी सुझावों की समीक्षा करके अंतिम नियम जारी करेगा।
प्रस्तावित वित्तीय बदलावों की सटीक तुलना को समझने के लिए फ़ाइल image_d04581.png के विवरण को नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| निवेश श्रेणी (Investment Category) | वर्तमान राशि (Current Amount) | प्रस्तावित राशि (Proposed Amount) |
|---|---|---|
| उच्च-रोजगार (गैर-TEA) परियोजनाएं | $1.05 मिलियन | $1.4 मिलियन |
| लक्षित रोजगार क्षेत्र (TEA) परियोजनाएं (ग्रामीण या उच्च-बेरोजगारी क्षेत्र) | $800,000 | कोई बदलाव नहीं |
| बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाएं | $800,000 | कोई बदलाव नहीं |
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