अहमदाबाद में एक इन्वेस्टमेंट कंपनी द्वारा निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का झांसा देकर करीब 21.8 लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में एक रिटायर्ड बुजुर्ग ने कंपनी के डायरेक्टर्स और मैनेजरों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि कई वर्षों तक निवेश की रकम इकट्ठा करने के बाद कंपनी ने फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम का पैसा लौटाने से इनकार कर दिया।
इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर गुरुवार को अहमदाबाद के नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने ‘यूनिक मर्केंटाइल इंडिया लिमिटेड’ के डायरेक्टर्स और मैनेजरों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक रिटायर्ड व्यक्ति हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा अपनी निवेश योजनाओं की जानकारी दिए जाने के बाद, वह जुलाई 2015 में एक एजेंट के तौर पर इस कंपनी से जुड़े थे। कंपनी ने अपने एजेंटों को भारी कमीशन के साथ-साथ निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट, मंथली इनकम और रेकरिंग डिपॉजिट स्कीमों के जरिए शानदार रिटर्न का वादा किया था।
शिकायत में बताया गया है कि कंपनी के डायरेक्टर्स नियमित रूप से बैठकें करते थे। इन बैठकों में एजेंटों को अधिक से अधिक निवेशकों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था और इसके बदले उन्हें ऊंचे इंसेंटिव का भरोसा दिया जाता था।
साल 2018 से 2019 के बीच शिकायतकर्ता ने खुद भी कई मंथली इनकम स्कीम, डिबेंचर और कंपनी के अन्य वित्तीय उत्पादों में अपने पैसे लगाए। उनके भरोसे पर उनके कई रिश्तेदारों और ग्राहकों ने भी अलग-अलग अवधि वाले फिक्स्ड और रेकरिंग डिपॉजिट में भारी निवेश किया।
पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता और उनके द्वारा लाए गए निवेशकों ने कुल मिलाकर लगभग 16 लाख रुपये का निवेश किया था। मैच्योरिटी पूरा होने पर उन्हें 23.7 लाख रुपये का रिटर्न देने का वादा किया गया था। साल 2020 तक कंपनी ने ब्याज, कमीशन और कुछ हिस्सों का भुगतान सही समय पर किया, लेकिन उसके बाद अचानक सभी तरह के पेमेंट रोक दिए गए।
जब साल 2024 और 2025 में अलग-अलग स्कीमें मैच्योर हुईं, तो निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगने के लिए कंपनी से संपर्क किया। आरोप है कि हर बार मैनेजमेंट ने भुगतान में देरी के लिए अलग-अलग बहाने बनाए और लोगों को टालते रहे।
शुरुआत में कंपनी के अधिकारियों ने कोरोना महामारी का बहाना बनाया और लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द ही उनके सभी बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा। एफआईआर में कहा गया है कि बार-बार फॉलो-अप करने और दफ्तर के चक्कर लगाने के बावजूद किसी को पैसा नहीं लौटाया गया। हालत यह हो गई कि अंततः कंपनी ने अपना दफ्तर ही बंद कर दिया।
पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें किस्तों में केवल 1.9 लाख रुपये ही वापस मिले हैं। अब उनके और उनके द्वारा लाए गए अन्य निवेशकों के कुल 21.8 लाख रुपये कंपनी पर बकाया हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
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