अहमदाबाद के नरोड़ा इलाके में रहने वाले एक 35 वर्षीय कारोबारी साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। जालसाजों ने खुद को एक्सिस सिक्योरिटीज का प्रतिनिधि बताकर शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच दिया और उनसे 50 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली। निवेश की गई रकम और ट्रेडिंग ऐप पर दिख रहा मुनाफा जब वापस नहीं मिला, तो पीड़ित ने शनिवार को साइबर क्राइम पुलिस से गुहार लगाई।
पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, कठवाड़ा में एलिवेटर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी चलाने वाले इस कारोबारी ने जनवरी महीने में इंस्टाग्राम पर एक रील देखी थी। इस वीडियो में एक्सिस सिक्योरिटीज के नाम का इस्तेमाल किया गया था। वीडियो के लिंक पर क्लिक करते ही उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जहां अन्य सदस्य शेयर बाजार और आईपीओ निवेश से होने वाले भारी मुनाफे की झूठी कहानियां और स्क्रीनशॉट साझा कर रहे थे।
कुछ ही समय बाद, व्हाट्सएप पर ‘नीलम धवन’ नाम की एक महिला ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया। उसने खुद को एक्सिस सिक्योरिटीज की अधिकारी बताया और कारोबारी को एक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए निर्देशित किया। इस फर्जी वेबसाइट पर एक्सिस बैंक का लोगो और ब्रांडिंग मौजूद थी, जिससे पीड़ित को पूरा यकीन हो गया कि यह एक असली निवेश प्लेटफॉर्म है।
कारोबारी ने शुरुआत में इस प्लेटफॉर्म के कस्टमर सपोर्ट द्वारा दिए गए एक बैंक खाते में 5 लाख रुपये जमा किए। उनका विश्वास जीतने के लिए जालसाजों ने उन्हें तुरंत 1,000 रुपये निकालने की अनुमति भी दे दी। इस मामूली निकासी से कारोबारी का भरोसा काफी बढ़ गया और उन्होंने अधिक मुनाफे की उम्मीद में बड़ी रकम निवेश करने का मन बना लिया।
पीड़ित ने 30 जनवरी से 9 अप्रैल के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 50 लाख रुपये कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस दौरान फर्जी ट्रेडिंग ऐप उनके निवेश पर लगातार तेजी से मुनाफा दिखाता रहा। एक समय ऐसा आया जब उस ऐप पर उनके पोर्टफोलियो की कुल कीमत 1.6 करोड़ रुपये प्रदर्शित होने लगी।
जब कारोबारी ने यह रकम निकालने की कोशिश की, तो ऐप पर उनकी रिक्वेस्ट पेंडिंग दिखा दी गई। जालसाजों ने उनसे कहा कि पैसे निकालने के लिए उन्हें पहले 10 प्रतिशत ‘सब्सक्रिप्शन कमीशन’ और उसके बाद 6 प्रतिशत ‘सब्सक्रिप्शन टैक्स’ देना होगा। इन मांगों को असली मानकर कारोबारी ने क्रमशः 12.2 लाख रुपये और 7.2 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया। इस दौरान ठगों ने उन्हें भरोसे में रखने के लिए एक्सिस बैंक के लोगो वाले फर्जी सर्टिफिकेट भी जारी किए।
इतने पैसे चुकाने के बावजूद उन्हें उनकी रकम वापस नहीं मिली। जब ठगों ने निकासी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर 5 लाख रुपये और मांगे, तब जाकर कारोबारी को अपने साथ हुए इस बड़े धोखे का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 15 अप्रैल को नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क किया। अब इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आधिकारिक एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
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