गुजरात के जूनागढ़ में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को मिलने वाली पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में एक बेहद संगठित और बड़े घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने एक शिक्षण संस्थान के निदेशक और उसके कई साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की है।
इस पूरी कार्रवाई को परोल फर्लो स्क्वॉड के एस. ए. सोलंकी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अंजाम दिया गया। जूनागढ़ सिटी बी डिवीजन पुलिस ने दर्शन मेसवानिया नामक मुख्य आरोपी और उसके अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी ‘गुजरात एजुकेशन’ के नाम से एक प्राइवेट कोचिंग संस्थान का संचालन करते थे।
जालसाजों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, विश्वासघात और जालसाजी से जुड़ी सख्त धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। जांचकर्ताओं ने बताया कि इस गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से एससी और एसटी वर्ग के मासूम छात्र होते थे, जिन्हें मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW), बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) और फैशन डिजाइनिंग जैसे कोर्सेज में बाहरी दाखिला दिलाने का सुनहरा सपना दिखाया जाता था।
छात्रों को शत-प्रतिशत सरकारी स्कॉलरशिप दिलाने, कॉलेज में उपस्थिति से पूरी तरह छूट देने और परीक्षा में आसानी से पास कराने की गारंटी दी जाती थी। इस मीठे जाल में फंसाने के बाद, संस्थान के संचालक छात्रों के तमाम जरूरी कागजात जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, पहचान पत्र और तस्वीरें अपने पास गिरवी की तरह रख लेते थे।
घोटाले की जड़ें और भी गहरी थीं। जिन छात्रों के पास पहले से बैंक खाते मौजूद थे, उन्हें पेमेंट बैंकों में नए खाते खोलने के लिए मजबूर किया जाता था। खाता खोलने की इस पूरी प्रक्रिया में छात्रों के बायोमेट्रिक डेटा, निजी दस्तावेजों और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) का जमकर दुरुपयोग किया गया।
खाते चालू होते ही संस्थान का निदेशक और उसके साथी बैंक से मिली पासबुक, एटीएम कार्ड और बैंक किट छात्रों को देने के बजाय खुद ही डकार जाते थे। इतना ही नहीं, नया मोबाइल सिम कार्ड खरीदकर उसे इन बैंक खातों से लिंक कर दिया जाता था, ताकि लेन-देन से जुड़ा हर ओटीपी और अलर्ट सीधे ठगों के मोबाइल पर पहुंचे।
इस पूरी साजिश के बाद ऑनलाइन स्कॉलरशिप के आवेदन किए जाते थे। जैसे ही राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली स्कॉलरशिप की रकम इन नए खातों में ट्रांसफर होती, असली लाभार्थियों को बिना भनक लगे ही एटीएम के जरिए सारे पैसे निकाल लिए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन छात्रों के नाम पर भी स्कॉलरशिप हासिल की, जिन्होंने न तो कभी क्लास अटेंड की थी और न ही कभी कोई परीक्षा दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के प्रशासनिक परिसर में अचानक छापेमारी की गई। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 149 बैंक किट, 110 सिम कार्ड, नौ मोबाइल फोन और छात्रों के भारी मात्रा में प्रमाण पत्र जब्त किए हैं।
जब्त किए गए स्मार्टफोन्स की जब डिजिटल फोरेंसिक जांच की गई, तो उसमें कई संदिग्ध और फर्जी मार्कशीट भी बरामद हुईं। इन अहम दस्तावेजों को अब सत्यापन और असली-नकली की पहचान के लिए संबंधित शिक्षा बोर्डों को भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में 40 बैंक खातों को खंगाला गया है। इनमें से 21 छात्रों के खातों में सरकारी स्कॉलरशिप के रूप में कुल 24.44 लाख रुपये आए थे, जिसमें से 11 लाख रुपये अवैध रूप से एटीएम के जरिये निकाले जा चुके हैं।
फिलहाल पुलिस को पक्की आशंका है कि जैसे-जैसे अन्य लाभार्थियों के खातों की गहराई से फोरेंसिक जांच की जाएगी, धोखाधड़ी की यह कुल रकम आने वाले दिनों में और भी ज्यादा बढ़ सकती है।
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