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भारत के अनाथालय से शुरू हुई कहानी: 40 साल बाद DNA टेस्ट ने खोला राज, बचपन की सहेलियां निकलीं सगी बहनें

| Updated: August 14, 2026 13:47

भारत के अनाथालय से बिछड़ीं और नीदरलैंड में पली-बढ़ीं दो बचपन की सहेलियां 40 साल बाद मिलीं। एक चौंकाने वाले DNA टेस्ट ने साबित किया कि वे दोनों सगी बहनें हैं।

मीना और मीनल को बचपन में भारत के अनाथालयों में छोड़ दिया गया था। इसके बाद दोनों नीदरलैंड में अलग-अलग दत्तक परिवारों के साथ पली-बढ़ीं। उनके घर एक-दूसरे से बस कुछ ही दूरी पर थे। अब करीब 40 साल बाद एक डीएनए टेस्ट ने ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसने दोनों की जिंदगी बदल दी है। ये दोनों बचपन की सहेलियां असल में सगी बहनें हैं।

बड़े होने के दौरान दोनों में से किसी को भी यह नहीं पता था कि उनकी कोई बहन भी है। फिर साल 1996 में किशोरावस्था के दौरान एक ऐसा संयोग बना जिसने उन्हें पहली बार करीब ला दिया। उस वक्त वे एक-दूसरे से सिर्फ 130 किलोमीटर दूर रहती थीं। दत्तक बच्चों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में दोनों की मुलाकात हुई और पहली ही नजर में उन्हें एक-दूसरे से एक अजीब सा और बेहद गहरा जुड़ाव महसूस हुआ।

उस वक्त उनके दोस्त भी दोनों की शक्लें और आदतें मिलने पर हैरान थे। दोनों लड़कियों ने एक-दूसरे को अपने पते दिए और बातचीत शुरू की। अपनी चिट्ठियों में वे मजाक-मजाक में एक-दूसरे को ‘बहन’ भी कहती थीं। हालांकि, वक्त के साथ दोनों अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गईं और 15 साल तक उनका एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं रहा।

तीन बच्चों की मां 43 वर्षीय मीना गेल्टिंक अपनी इस अपार खुशी को शब्दों में बयां करते हुए भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि सालों तक उन्होंने अपने दिल में एक सूनापन महसूस किया था। यह अहसास बिल्कुल वैसा है जैसे किसी पहेली का खोया हुआ आखिरी और सबसे अहम हिस्सा अचानक मिल गया हो।

मंगलवार को नीदरलैंड में हुए इस बेहद भावुक पुनर्मिलन के दौरान मीना ने अपनी बहन से कहा कि जब वह उसे देखती हैं, तो उन्हें घर जैसा अपनापन महसूस होता है। बीते अप्रैल में माई-हेरिटेज डीएनए टेस्ट के जरिए उनके रिश्ते का खुलासा हुआ था, जिसमें दोनों का डीएनए 100% मैच हुआ। यह एक बेहद दुर्लभ घटना थी। इस सच्चाई के सामने आने के बाद से दोनों बहनें अब हर दिन घंटों एक-दूसरे से बात करती हैं और मैसेज भेजती हैं।

वहीं, 44 वर्षीय मीनल टिजसेन बताती हैं कि उनके पास अपने जन्म देने वाले रिश्तेदारों का कोई रिकॉर्ड या जानकारी नहीं थी। अपने डच माता-पिता और भाई-बहनों के साथ पलते-बढ़ते हुए उन्हें बहुत प्यार मिला, लेकिन इसके बावजूद उनके भीतर एक गहरा अकेलापन हमेशा बना रहता था।

यह सच जानने के बाद जब वे पहली बार मिलीं, तो उस पल में आंसू, एक-दूसरे को गले लगाना और ढेर सारी खुशी शामिल थी। इन भावुक पलों के बाद दोनों ने साथ में अपनी पहली यादगार सेल्फी भी ली।

मीनल, जो अब अपने पार्टनर और दो बेटों के साथ फ्रांस में रहती हैं, उस पल को याद करती हैं। वह अप्रैल के महीने में अपने घर बैठी थीं, तभी फोन पर डीएनए रिपोर्ट आने का नोटिफिकेशन आया। रिपोर्ट में लिखा था ‘मीना: बहन’। यह देखकर उन्हें अपनी ही आंखों पर यकीन नहीं हुआ।

मीनल कहती हैं कि वे बहनें होने से पहले बहुत अच्छी दोस्त थीं। वे असल में शुरुआत से ही बहनें थीं, लेकिन इस बात से पूरी तरह अनजान थीं। शुरुआत में मीनल को यह अहसास भी नहीं हुआ कि यह वही लड़की है जिससे वह करीब 30 साल पहले मिली थीं।

जब उन्होंने सोशल मीडिया पर मीना को खोजा और उसकी पुरानी तस्वीरें देखीं, तब जाकर उन्हें पूरी सच्चाई का अहसास हुआ। अब दोनों बहनों का मानना है कि यह कोई सपना नहीं, बल्कि एक बेहद खूबसूरत हकीकत है।

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