अहमदाबाद के बोपल और घुमा इलाके के निवासियों को एक बार फिर से भारी नागरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) इस इलाके में 142.05 करोड़ रुपये का एक बड़ा स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद इलाके की गंभीर जलभराव की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करना है। लेकिन, इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए हाल ही में बनी नई और चमचमाती सड़कों को तोड़ा जाएगा। इससे शहरी नियोजन की खामियों और टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी को लेकर लोगों में भारी गुस्सा पैदा हो गया है।
दरअसल, इस साल मानसून की भारी बारिश ने साउथ बोपल और बसंत बहार सोसायटी जैसे कई रिहायशी इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया था। लोगों के घरों में पानी भर गया था, जिसने इलाके में ड्रेनेज सिस्टम के बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी थी।
बोपल और घुमा को साल 2021 में एएमसी (AMC) की सीमा में शामिल किया गया था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि नगर निगम को इस क्षेत्र का एक व्यापक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन पूरा करने में पूरे पांच साल का लंबा वक्त लग गया।
इस अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि यह इलाका निचले स्तर पर बसा हुआ है। इसके साथ ही यहां स्टॉर्म वाटर नेटवर्क की भारी कमी है, जो तेज बारिश के दौरान जलभराव का सबसे बड़ा और सीधा कारण बनता है।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एएमसी ने अब एक मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया है। इसके तहत नई स्टॉर्म वाटर लाइनें, कैचपिट और आउटफॉल बनाए जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट बोपल लेक, घुमा लेक और रतन लेक के आसपास 710.55 हेक्टेयर के कैचमेंट एरिया को कवर करेगा।
प्रशासन ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रोजेक्ट के पहले तीन चरणों के काम के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। इस ड्रेनेज सिस्टम को भविष्य की 3.5 लाख आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। वर्तमान में इस इलाके की कुल आबादी करीब 1.5 लाख है।
प्लान के मुताबिक, बारिश के अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए रतन लेक पर एक विशेष पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा। वहीं, लंबी अवधि के उपायों के तहत इस ड्रेनेज नेटवर्क को गोटा-गोधवी नहर और साबरमती नदी से जोड़ने का भी खाका तैयार किया गया है।
भविष्य में मिलने वाली इस राहत के वादों के बावजूद, प्रोजेक्ट की टाइमिंग सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है। नगर निगम की सीमा में शामिल होने के बाद नागरिक अधिकारियों ने बोपल और घुमा में नई सड़कों के निर्माण पर भारी-भरकम फंड खर्च किया था। अब नई ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने के लिए इन्हीं नई बनी सड़कों की खुदाई करनी पड़ेगी।
स्थानीय निवासियों को अब आने वाले महीनों में ट्रैफिक डायवर्जन, संकरी सड़कों और धूल-मिट्टी के प्रदूषण का भारी सामना करना पड़ेगा। तात्कालिक असुविधा के अलावा आलोचकों का साफ कहना है कि बिना किसी तालमेल के काम करने का मतलब है कि जनता का पैसा दो बार खर्च किया गया है। पहले उन पैसों से सड़क बनाई गई और अब उसे खोदकर दोबारा बनाने में फिर से जनता का ही पैसा लगेगा।
यह भी पढ़ें-
एक सवाल जिसने रोक दी थी सरकारी नौकरी! ‘अर्थशास्त्र’ पर गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
गुजरात: 45 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा 1981 की बस डकैती का वांटेड, यूपी से हुआ गिरफ्तार








