चिकित्सा जगत के भारी विरोध के बावजूद सोमवार को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने राज्य के दो और होम्योपैथ डॉक्टरों को अपना रजिस्ट्रेशन दे दिया है। चिकित्सा समुदाय लगातार इस फैसले का विरोध कर रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। इस नए रजिस्ट्रेशन के बाद अब ये होम्योपैथ डॉक्टर फार्माकोलॉजी में केवल एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर आधुनिक और जटिल एलोपैथिक दवाएं भी मरीजों को लिख सकेंगे।
यह कदम मानखुर्द की होम्योपैथ डॉ. नेहा पवार को दिए गए पहले रजिस्ट्रेशन के करीब तीन सप्ताह बाद उठाया गया है। जिन दो नए डॉक्टरों को यह अनुमति मिली है, उनमें पुणे की राजश्री मेमाने और बदलापुर के रमेश कांबले शामिल हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. कांबले ने बताया कि उन्होंने साल 2012 में अपनी बीएचएमएस (BHMS) की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद सुश्रुत अस्पताल में काम करने के दौरान ही उन्होंने एलोपैथिक दवाएं लिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने वर्ष 2023 में आधुनिक फार्माकोलॉजी (CCMP) में अपना एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया है।
जब उनसे एमबीबीएस (MBBS) के बजाय बीएचएमएस चुनने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था और परिवार में भी इतनी जागरूकता नहीं थी। इसलिए जो विकल्प सामने था, उन्होंने वही चुन लिया।
यह पूरा विवाद अगस्त की शुरुआत में जारी एक सरकारी प्रस्ताव के बाद से गहरा गया है। इस प्रस्ताव में MMC को होम्योपैथ डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। साथ ही, होम्योपैथ्स द्वारा की जाने वाली लापरवाही के मामलों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय करने हेतु एक समिति भी बनाई गई थी।
इस फैसले के तुरंत बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हड़ताल कर दी थी। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह हड़ताल वापस ले ली गई और अदालत अब इस बात की भी कानूनी समीक्षा कर रही है कि क्या डॉक्टरों को हड़ताल करने का अधिकार है या नहीं।
इस बीच, चिकित्सा समुदाय की चिंताओं को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 18 अगस्त को MMC को एक पत्र भेजकर होम्योपैथ के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी थी। लेकिन महज दो दिन बाद ही विभाग ने अपना फैसला पलट दिया। 20 अगस्त को यह रोक हटा ली गई और MMC को 28 जुलाई को हुई बैठक के मिनट्स के अनुसार काम करने के निर्देश जारी कर दिए गए।
इस सरकारी यू-टर्न पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव धीरज कुमार ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने बताया कि 18 अगस्त वाला पत्र उनकी मंजूरी के बिना जारी किया गया था क्योंकि वह बुखार के कारण छुट्टी पर थे। उन्होंने इसे एक प्रक्रियात्मक त्रुटि बताते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। उस कर्मचारी ने अपना स्पष्टीकरण भी दे दिया है और अब आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी प्रशासनिक विफलता और अफरातफरी पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। IMA के अध्यक्ष डॉ. संतोष कुलकर्णी ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि प्रशासन पूरी तरह से विफल रहा है। उन्होंने MMC को दिए गए भ्रमित करने वाले निर्देशों और न्यायिक आदेशों के अपमान का हवाला देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ और प्रमुख सचिव धीरज कुमार से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पदों से इस्तीफे की मांग की है।
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