अहमदाबाद की काजल प्रजापति की कहानी जज्बे और हिम्मत की एक बहुत बड़ी मिसाल है। करीब 10 साल पहले हुए एक भयानक एसिड अटैक ने उनका चेहरा बिगाड़ दिया था और उनकी आंखों की रोशनी काफी हद तक छीन ली थी। लेकिन इस दिल दहला देने वाले हादसे के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी जिंदगी को दोबारा समेटते हुए उन्होंने सरकारी नौकरी पाने का जो लक्ष्य तय किया था, उसे अपने अदम्य साहस के दम पर आखिरकार हासिल कर लिया है।
मेहसाणा के रामोसाना गांव के एक ऑटो रिक्शा चालक की 28 वर्षीय बेटी काजल ने इस साल एक नहीं, बल्कि दो सरकारी भर्तियों की परीक्षाएं पास की हैं। सबसे पहले उन्होंने तलाटी-कम-मंत्री पद के लिए परीक्षा पास की और इसके ठीक दो महीने बाद उन्होंने डिप्टी मामलातदार की भर्ती परीक्षा में भी सफलता का परचम लहराया।
कठोर संघर्ष के बाद नई शुरुआत
काजल ने अपने करियर के लिए डिप्टी मामलातदार के पद को चुना है क्योंकि उनका मानना है कि यह अधिक प्रतिष्ठित है। इस पद पर उनका मासिक वेतन 49,600 रुपये होगा और आगामी 17 सितंबर को उनके दस्तावेजों का सत्यापन होना है। अपने इस नए सफर की शुरुआत को लेकर काजल बेहद उत्साहित हैं। वह कहती हैं कि यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत कुछ सहना पड़ा है, इसलिए यह नई शुरुआत उनके लिए बहुत मायने रखती है।
जब काजल महज 18 साल की थीं और बी.कॉम के प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रही थीं, तब उनके द्वारा एक शख्स का प्रस्ताव ठुकराए जाने पर उस व्यक्ति ने उन पर तेजाब फेंक दिया था। इस हमले में उनकी एक आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई, जबकि दूसरी आंख से भी उन्हें बेहद आंशिक रूप से ही दिखाई देता है।
इसके बाद उन्हें 20 से ज्यादा रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी करवानी पड़ीं। अस्पताल के उन दर्दनाक वर्षों में ही काजल ने यह तय कर लिया था कि उन्हें लोगों की सहानुभूति नहीं, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक मुकाम और आर्थिक स्वतंत्रता चाहिए।
सीमित संसाधनों के बीच पाई सफलता
शुरुआत में काजल पुलिस सब-इंस्पेक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन अपनी शारीरिक अक्षमता और आंखों की रोशनी को देखते हुए उन्होंने राजस्व विभाग की परीक्षाओं की ओर अपना रुख कर लिया। काजल के परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे महंगी कोचिंग या किसी प्राइवेट लाइब्रेरी का खर्च उठा सकें। इसलिए उन्होंने मेहसाणा की जिला पंचायत लाइब्रेरी में हर दिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करके अपनी तैयारी को मजबूत किया।
समाज के बीच जाने और लोगों के घूरने का सामना करने के लिए काजल ने खुद को मानसिक रूप से बेहद मजबूत कर लिया था। उन्होंने कभी भी अपना चेहरा दुपट्टे या मास्क के पीछे नहीं छिपाया क्योंकि उन्हें उस झिझक से बाहर आना था। वह अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहती थीं और जानती थीं कि छिपकर ऐसा करना मुमकिन नहीं है। अब 28 साल की उम्र में उन्होंने फैसला किया है कि वह आगे कोई और सर्जरी नहीं करवाएंगी और सिर्फ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने पर ध्यान देंगी।
मजबूत परिवार और दोस्तों का साथ
अपनी इस शानदार कामयाबी का श्रेय काजल अपने परिवार, दोस्तों और डॉक्टरों को देती हैं। वाहन फिटनेस सेंटर में काम करने वाले उनके बड़े भाई राहुल हमेशा से उनके सबसे बड़े समर्थक रहे हैं, जो हर जगह फक्र से कहते हैं कि उनकी बहन सबसे मजबूत है।
आंखों पर पट्टी बंधे होने के दौरान उनकी सहेली जया उन्हें पूरे गांव में घुमाती थीं और उन्हें दुनिया में अपनी जगह वापस पाने के लिए हमेशा प्रेरित करती थीं।
इसके अलावा, लाइब्रेरी में काजल से मिलने वाली उनकी दोस्त रिंकू पटेल ने भी उनका खूब साथ दिया। दोनों ने पिछले 5 सालों तक एक साथ पढ़ाई की है। काजल अब उम्मीद कर रही हैं कि रिंकू को भी पुलिस विभाग में उनकी मनचाही नौकरी मिल जाए।
अपनी सर्जरी के खर्च में भारी छूट देकर मदद करने वाले डॉक्टरों का भी काजल ने आभार जताया है। सभी के सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बलबूते काजल अब गर्व के साथ एक नई जिंदगी का आगाज करने जा रही हैं।
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