राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही सामग्री को ‘नैतिक पतन’ का कारण बताए जाने के लगभग दो साल बाद, संघ ने एक बड़ा कदम उठाया है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रहे ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ को रोकने के लिए संघ ने एक अनौपचारिक समूह का गठन किया है, जो इस समस्या से निपटने के लिए अपने ठोस सुझाव देगा।
सूत्रों के अनुसार, इस विशेष पैनल में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई पूर्व कुलपतियों और प्रचारकों को शामिल किया गया है। यह समिति ओटीटी कंटेंट पर लगाम कसने के लिए जरूरी और प्रभावी उपायों पर गहराई से विचार कर रही है।
कुछ महीने पहले गठित किए गए इस समूह की पहली बैठक पिछले महीने ही आयोजित की गई है। इस अनौपचारिक समिति द्वारा तैयार किया गया प्रस्ताव केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार के अन्य संबंधित विभागों को सौंपा जाएगा, ताकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से निकल रही इस ‘गंदगी’ से सख्ती से निपटा जा सके।
संघ के एक सूत्र ने बताया कि परिवारों और विशेषकर युवा पीढ़ी को प्रभावित करने वाले इस सांस्कृतिक प्रदूषण को रोकने के लिए देश में सेंसर बोर्ड जैसी किसी संस्था की सख्त जरूरत है। हालांकि, इस समूह को अपना काम पूरा करने के लिए कोई तय समय सीमा नहीं दी गई है। अंतिम प्रस्ताव तैयार करने से पहले कानून के जानकारों और विशेषज्ञों से भी व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2024 को नागपुर में अपने वार्षिक विजयादशमी भाषण के दौरान मोहन भागवत ने ओटीटी कंटेंट पर तीखा प्रहार किया था। उन्होंने कहा था कि इन प्लेटफॉर्म्स पर इतना घिनौना कंटेंट दिखाया जाता है कि उस पर चर्चा करना भी शालीनता के खिलाफ है। उन्होंने समाज में आ रही विकृति के लिए इसे जिम्मेदार ठहराते हुए कानून के जरिए इसे नियंत्रित करने की वकालत की थी।
इस पैनल के गठन का निर्णय ‘कुटुंब प्रबोधन’ से मिले जमीनी फीडबैक के आधार पर लिया गया है। यह संघ की एक अहम गतिविधि है जो पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने और पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करने का काम करती है। संघ के पदाधिकारी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नैतिक भ्रष्टाचार का एक मुख्य स्रोत मानते हैं।
वर्तमान में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों को सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के तहत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) द्वारा प्रमाणित किया जाता है। लेकिन ओटीटी कंटेंट के लिए ऐसा कोई समर्पित नियामक निकाय मौजूद नहीं है। यह सामग्री मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 और संबंधित आईटी तथा आपराधिक कानूनों द्वारा ही शासित होती है। कई हलकों से अक्सर इस नियामक ढांचे की कमियों को दूर करने की मांग उठती रही है।
अश्लील सामग्री और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सरकार भी लगातार अपना सख्त रुख अपना रही है। इसी साल 22 जुलाई को सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि सरकार ने पिछले दो वर्षों में भारत में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया है। यह बड़ी कार्रवाई आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 और महिलाओं का अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के उल्लंघन के आरोप में की गई थी।
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