क्या भारत का विदेशी नागरिक (ओसीआई) कार्डधारक देश में किसी राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बन सकता है? क्या पुलिस ऐसा करने पर उन्हें देश से बाहर निकालने (डिपोर्ट करने) की मांग कर सकती है? ये सवाल इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं।
दरअसल, बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस को एक पत्र लिखकर अभिनेता इमरान खान को हिरासत में लेने और डिपोर्ट करने की मांग की है। अभिनेता ने हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
सोमैया का आरोप है कि इमरान खान एक विदेशी नागरिक हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या प्रदर्शन में उनका शामिल होना ओसीआई नियमों और वीजा शर्तों का सीधा उल्लंघन नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कानून वास्तव में ओसीआई कार्डधारकों को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकता है। इसके साथ ही, यह भी समझना जरूरी है कि उनके खिलाफ किन आधारों पर कार्रवाई की जा सकती है।
क्या होता है ओसीआई कार्ड?
ओसीआई योजना की शुरुआत साल 2005 में की गई थी। यह उन भारतीय मूल के योग्य लोगों के लिए है जिनके पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है। इसके नाम में ‘नागरिक’ शब्द जरूर शामिल है, लेकिन यह कार्ड किसी को भारत की नागरिकता प्रदान नहीं करता है।
ओसीआई कार्डधारक मूल रूप से विदेशी नागरिक ही होते हैं, जिन्हें भारत में कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं। इनमें लागू नियमों के तहत आजीवन और मल्टीपल एंट्री वीजा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा, उन्हें शिक्षा, संपत्ति और कुछ खास पेशेवर गतिविधियों के संबंध में भी लाभ दिए जाते हैं।
इन तमाम सुविधाओं के बावजूद उनके कुछ राजनीतिक अधिकार सीमित होते हैं। वे भारतीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते हैं और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ सकते हैं। भारतीय नागरिकों के लिए आरक्षित अन्य राजनीतिक अधिकारों पर भी वे अपना कोई दावा नहीं कर सकते।
ओसीआई कार्डधारकों के अधिकार और उन पर लागू प्रतिबंध नागरिकता अधिनियम, 1955 द्वारा तय किए जाते हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी नियम और अधिसूचनाएं भी इन पर लागू होती हैं।
क्या ओसीआई कार्डधारक प्रदर्शनों में ले सकते हैं हिस्सा?
ओसीआई नियमों में कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं लिखा है कि किसी सार्वजनिक प्रदर्शन में भाग लेने के लिए हर कार्डधारक को पहले से विशेष अनुमति लेनी होगी। हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि उन्हें सभी तरह की राजनीतिक गतिविधियों की खुली छूट मिली हुई है।
नागरिकता अधिनियम की धारा 7B के तहत, ओसीआई कार्डधारकों को वे विशिष्ट अधिकार नहीं मिलते जो भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं। वोट देने और चुनाव लड़ने पर उनके लिए पाबंदी है। हालांकि, सिर्फ इन पाबंदियों से यह साबित नहीं होता कि किसी विरोध प्रदर्शन में महज शामिल होना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभा करने का अधिकार
जब बात अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आती है, तो संविधान का अनुच्छेद 19 महत्वपूर्ण हो जाता है। यह अनुच्छेद नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी और बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार देता है, जो उचित प्रतिबंधों के अधीन है।
यह समझना आवश्यक है कि ये संवैधानिक गारंटी विशेष रूप से केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही उपलब्ध हैं। एक ओसीआई कार्डधारक तकनीकी रूप से विदेशी नागरिक है। इसलिए, वह एक भारतीय नागरिक की तरह समान आधार पर इन अधिकारों का दावा नहीं कर सकता।
क्या ओसीआई कार्डधारक को हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया जा सकता है?
एक ओसीआई कार्डधारक हमेशा विदेशी नागरिक ही रहता है। इसी वजह से उस पर विदेशियों और इमिग्रेशन से जुड़े सभी भारतीय कानून सख्ती से लागू होते हैं।
नागरिकता अधिनियम की धारा 7D में कुछ विशिष्ट आधारों पर ओसीआई पंजीकरण रद्द करने का भी प्रावधान है। इस कानून में देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मामलों को भी आधार माना गया है।
हालांकि, पुलिस में की गई कोई शिकायत या वीजा उल्लंघन का कोई आरोप अपने आप में यह साबित नहीं करता है कि कोई अपराध हुआ है। केवल आरोप के आधार पर किसी को डिपोर्ट करना या उसे अपराधी मान लेना कानूनी तौर पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-
धारावी के सुनहरे भविष्य का शंखनाद: माटुंगा में भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ पुनर्वास प्रोजेक्ट
अहमदाबाद में 50% एमबीबीएस छात्र गंभीर ‘सोशल फोबिया’ की चपेट में..









