भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या के मामले में गुजरात देश भर में छठे स्थान पर रहा। इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड के ग्राहक लगभग दोगुने हैं।
ट्राई की ‘इंडियन टेलीकॉम सर्विसेज इयरली परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स 2025-26’ रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन का कुल आंकड़ा 6.21 करोड़ तक पहुंच गया है।
इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच एक बड़ा डिजिटल अंतर साफ दिखाई देता है। राज्य के शहरी इलाकों में जहां 4.08 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं, वहीं ग्रामीण गुजरात में यह संख्या महज 2.12 करोड़ ही है।
ब्रॉडबैंड नेटवर्क के मोर्चे पर अपनी छठी रैंकिंग बरकरार रखते हुए गुजरात ने बीते एक साल में 69 लाख नए सब्सक्रिप्शन जोड़े हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 5.52 करोड़ था।
राज्य ने इस दौरान 12.4 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, जो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और राजस्थान से काफी बेहतर है। हालांकि, यह वृद्धि दर उत्तर प्रदेश (यूपी), महाराष्ट्र और कर्नाटक की तुलना में थोड़ी धीमी रही है।
इंटरनेट का यह विस्तार शहरों और गांवों दोनों जगह देखने को मिला है, लेकिन इनके बीच की खाई अभी भी गहरी है। बीते एक साल के दौरान शहरी गुजरात ने करीब 46 लाख नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े, जो ग्रामीण इलाकों में जुड़े 23 लाख ग्राहकों की तुलना में सीधे तौर पर दोगुने हैं।
ये आंकड़े राज्य में ब्रॉडबैंड बाजार के तेजी से बढ़ने का संकेत तो देते हैं, लेकिन बड़े शहरों और कस्बों के बाहर इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने की असल चुनौती को भी उजागर करते हैं। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि सब्सक्रिप्शन की यह संख्या इस बात का सटीक पैमाना नहीं है कि असल में कितने अलग-अलग लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का मानना है कि गुजरात में सर्विस सेक्टर (सेवा क्षेत्र) का अपेक्षाकृत धीमा विस्तार ब्रॉडबैंड अपनाने की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा कनेक्टिविटी की लागत, नेटवर्क की गुणवत्ता और क्षेत्रीय मांग में अंतर भी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इंडस्ट्री के एक विशेषज्ञ ने बताया कि कुछ अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात में सर्विस सेक्टर उतनी तेजी से नहीं फैला है, जिसका सीधा असर ब्रॉडबैंड की मांग पर पड़ता है। किसी भी क्षेत्र में इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता वहां की मांग, लोगों की खर्च करने की क्षमता और नेटवर्क क्वालिटी पर निर्भर करती है।
शहरी केंद्रों में मजबूत मांग और बेहतर कनेक्टिविटी हो सकती है, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में यह जरूरतें बदल जाती हैं। हालांकि, राज्य में तेजी से हो रहा शहरीकरण और छोटे कस्बों का विस्तार अब इंटरनेट सेवाओं की मांग को एक नया आकार दे रहा है।
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