बीते कुछ समय में गुजरात, पंजाब के वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों के लिए एक सुरक्षित पनाहगार के रूप में उभर कर सामने आया है। चाहे मामला साल 2022 में हुए मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का हो या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैड संधू के मर्डर का, इन सभी हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों के तार गुजरात से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
गुजरात पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक करते हैं कि राज्य में पंजाब के अपराधियों की घुसपैठ बढ़ी है। आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अब तक राज्य भर से 11 अलग-अलग पंजाब से जुड़े मामलों में 25 वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये वो अपराधी हैं जिन पर हत्या, राजनीतिक हत्याओं, हथियारों और ग्रेनेड की सप्लाई के साथ-साथ पंजाब में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई से पता चला है कि इन अपराधियों ने सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि राज्य के कोने-कोने में अपनी छिपने की जगहें बना रखी थीं। कच्छ, भरूच, नडियाद, मेहसाणा, हालोल, जामनगर, अहमदाबाद, डीसा, पालनपुर और वापी जैसे छोटे-बड़े तमाम इलाकों में ये संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस की रडार से बचने के लिए ये खूंखार अपराधी अपनी पहचान छिपाकर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर, हेल्पर या फैक्ट्री वर्कर के रूप में काम कर रहे थे। कुछ ने अपने गृह राज्य के संपर्कों का इस्तेमाल कर स्थानीय लोगों के यहां शरण ली हुई थी।
इसी कड़ी में 8 सितंबर को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। पुलिस ने परमिंदर प्रसाद उर्फ परमिंदर काका को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर मैड संधू हत्याकांड का एक शूटर है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैड संधू की अक्टूबर 2026 में अमृतसर में हत्या कर दी गई थी। पुलिस की मुस्तैदी से इस हत्याकांड से जुड़े तीन संदिग्धों को आखिरकार गुजरात से ही ट्रेस किया गया है।
राज्य में अपराधियों के इस तरह आसानी से छिपने को लेकर गुजरात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अहम कारण बताए हैं। उनका कहना है कि राज्य का विशाल औद्योगिक ढांचा, बेहतरीन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, बंदरगाह और हाईवे के किनारे बसी बस्तियां इन अपराधियों को गायब होने के लिए संरचनात्मक रूप से एक मुफीद जगह मुहैया कराती हैं। अपराध को अंजाम देने के बाद ये लोग काम की तलाश के बहाने यहां आते हैं और औद्योगिक इलाकों में आसानी से घुल-मिल जाते हैं।
वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कई अपराधी अपने पैतृक स्थानों के संपर्कों के जरिए भी यहां पनाह हासिल कर लेते हैं। फिलहाल इस बात की गहन जांच की जा रही है कि क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने भी इन्हें छिपने में मदद की है। अगर ऐसा कोई भी गठजोड़ सामने आता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की यह सफलता पंजाब पुलिस और गुजरात की जांच एजेंसियों के बीच सटीक खुफिया जानकारी साझा करने और कई स्थानों पर एक साथ की गई कार्रवाई का परिणाम है। इन गिरफ्तारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि अपराधी अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छोटे औद्योगिक कस्बों और मजदूर बस्तियों को अपना नया और सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।
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