अगर आप भी ट्रेन में सफर के दौरान बिना ईयरफोन के तेज आवाज में गाने सुनते हैं या सोशल मीडिया रील्स देखते हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। भारतीय रेलवे ने ट्रेन और रेलवे परिसर में मोबाइल के स्पीकर पर ऑडियो, वीडियो या फिल्में चलाने वाले यात्रियों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। इस नई एडवाइजरी में साफ तौर पर कहा गया है कि सहयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी को ईयरफोन का इस्तेमाल करना चाहिए और फोन पर धीमी आवाज में बात करनी चाहिए।
इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए दक्षिण रेलवे ने अपने सभी मंडलों को स्टेशनों पर नोटिस लगाने और लगातार घोषणाएं करने के निर्देश दिए हैं। सफर के दौरान टिकट चेकिंग स्टाफ (टीटीई) को भी उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई करने का अधिकार दे दिया गया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, नियमों को तोड़ने वाले यात्री पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है और उन्हें ट्रेन से उतारा भी जा सकता है। अगर कोई यात्री बार-बार यह गलती दोहराता है और दूसरों के लिए परेशानी का सबब बनता है, तो उस पर 5,000 रुपये तक का भारी जुर्माना या छह महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
रेलवे की इस चेतावनी में खासतौर पर यह बताया गया है कि बंद जगहों, जैसे कि एसी कोच में तेज आवाज में फोन पर लंबी बात करना, शोर मचाने वाली रिंगटोन रखना या बिना हेडफोन के वीडियो देखना दूसरों के लिए भारी असुविधा का कारण बनता है। असल में रेलवे बोर्ड ने साल 2012 में भी इस तरह की आदतों पर रोक लगाने के लिए सभी जोनों को निर्देश दिए थे, लेकिन तब इसका कोई खास असर नहीं दिखा था। अब इस साल जन विश्वास अधिनियम में हुए बदलावों के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर से कड़ा रुख अपनाया जा रहा है।
आम यात्रियों ने रेलवे की इस सख्त कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन उनका यह भी मानना है कि ये नियम तभी कारगर होंगे जब इन्हें लगातार और सख्ती से लागू किया जाएगा। नियमित तौर पर सफर करने वाले यात्रियों की अक्सर यह शिकायत रहती है कि कुछ लोग स्पीकर मोड पर फिल्में, टीवी सीरियल और रील्स देखते हैं, जिससे पूरा कोच परेशान होता है। कई बार यात्री अपने बच्चों को भी बिना हेडफोन के ही कार्टून देखने दे देते हैं, जिससे शोर और ज्यादा बढ़ जाता है।
इस समस्या को लेकर यात्री पी राम कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एसी कोच का माहौल आमतौर पर बेहद शांत होता है, इसलिए वहां फोन की तेज आवाज और बातचीत सबसे ज्यादा परेशान करती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खासकर देर रात जब यह शोर शुरू होता है, तो हर बार किसी से शिकायत करना यात्रियों के लिए काफी मुश्किल काम होता है।
एक अन्य यात्री श्रीजा हरि, जो अक्सर कोझिकोड और तिरुवनंतपुरम के बीच सफर करती हैं, ने भी ऐसी ही एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस के एक ही कोच में उन्होंने तीन अलग-अलग यात्रियों को स्पीकर मोड पर फोन इस्तेमाल करते देखा था। इस परेशानी के बाद उन्हें मजबूरन ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) से इसकी शिकायत दर्ज करानी पड़ी थी।
रेलवे अधिकारियों ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे सफर के दौरान कर्मचारियों का सहयोग करें और सार्वजनिक शिष्टाचार का पालन करें। अगर किसी यात्री को इस तरह के शोरगुल का लगातार सामना करना पड़ता है, तो वह तुरंत रेलवे स्टाफ को सूचित कर सकता है या ‘रेलमदद’ (RailMadad) ऐप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
अधिकारियों की सलाह है कि सभी के आरामदायक सफर को सुनिश्चित करने के लिए लोग हमेशा ईयरफोन का उपयोग करें और फोन कॉल को छोटी अवधि व धीमी आवाज तक ही सीमित रखें।
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