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मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अहमदाबाद में प्रदर्शन: सौ से अधिक कार्यकर्ता हिरासत में, इंस्टाग्राम अकाउंट्स सस्पेंड

| Updated: October 15, 2026 18:06

अहमदाबाद प्रदर्शन: एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर हुए युवा, सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक होने पर गरमाई राजनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अहमदाबाद में हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती देखने को मिली। इस प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं और युवाओं को हिरासत में लिया गया, जबकि सोशल मीडिया अकाउंट्स को सस्पेंड करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों और युवाओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई है।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने यह भी दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं और एक 87 साल के बुजुर्ग को भी हिरासत में लिया गया। बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने याद करते हुए बताया कि उन्हें 1975 के आपातकाल के दौरान भी जेल भेजा गया था और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए वे एक बार फिर जेल जाने को पूरी तरह तैयार हैं।

प्रदर्शन से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों और समूहों के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को अचानक सस्पेंड किया जाना विवाद का एक बड़ा केंद्र बन गया। इन प्रभावित लोगों में सीजेपी गुजरात के संयोजक जय ठाकर, कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता सुबोध कुमुद, स्टूडेंट एंड यूथ कलेक्टिव अहमदाबाद यानी SYCA और कार्यकर्ता ध्रुव देसाई शामिल हैं।

कांग्रेस नेता सुबोध कुमुद ने बताया कि जब अहमदाबाद में प्रदर्शन चल रहा था, उसी दौरान उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय के लिए अकाउंट को बहाल जरूर किया गया था, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के उसे दोबारा निलंबित कर दिया गया।

यह विरोध प्रदर्शन तय कार्यक्रम के मुताबिक एलिसब्रिज इलाके में एमजे लाइब्रेरी के पास शाम करीब 6:30 बजे शुरू होना था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण वे निर्धारित स्थल तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद प्रतिभागियों ने पाल्डी और आंबावाड़ी से परिमल गार्डन की ओर मार्च निकालते हुए जमकर नारेबाजी की।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो सौ से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था, जिसमें दो जोन के अलावा क्राइम ब्रांच, एसओजी और ईओडब्ल्यू की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं। इस भारी सुरक्षा बंदोबस्त में एक संयुक्त पुलिस आयुक्त यानी जेसीपी, चार डीसीपी और कई एसीपी तथा पीआई स्तर के अधिकारी भी शामिल थे।

जोन सात के डीसीपी शिवम वर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यह व्यवस्था किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने और जनता को असुविधा से बचाने के लिए की गई थी। एक अनुमान के मुताबिक, लगभग सौ से दो सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया जिन्हें पुलिस बसों और वैन के जरिए वासन, वेजलपुर और सरखेज पुलिस स्टेशनों ले जाया गया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 13 करोड़ और अकेले गुजरात में 68 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और आवश्यक सुरक्षा उपायों का भारी अभाव देखा गया है।

स्टूडेंट एंड कलेक्टिव अहमदाबाद के प्रदर्शनकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि छात्र, युवा और जागरूक नागरिक पूरी तरह से अलोकतांत्रिक एसआईआर तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तौर-तरीकों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए अहमदाबाद में एकजुट हुए थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, चुनाव आयोग के विकेंद्रीकरण और व्यापक चुनावी सुधारों की मांग दोहराई है।

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