आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों की गवाह रहीं सोनिया गांधी का मानना है कि उनका जीवन कोई बहुत असाधारण कहानी नहीं है। द गार्जियन के अनुसार, एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने सत्ता में अपने सफर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन और भविष्य की उम्मीद जगाने वाले युवा प्रदर्शनों पर खुलकर बात की।
उत्तरी इटली के एक छोटे से शहर में मजदूर वर्ग के परिवार में जन्मीं सोनिया आज 79 वर्ष की आयु में भारतीय राजनीति के केंद्र में हैं। उन्होंने अनगिनत व्यक्तिगत घटनाएं झेली हैं। 1984 में जब उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दिल्ली स्थित आवास पर हत्या हुई, तो सोनिया ने ही उनके खून से सने शरीर को संभाला था। इसके बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर वह देश की प्रथम महिला बनीं।
राजीव की हत्या के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक अनिच्छा को दरकिनार कर टूटती हुई कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली। साल 2004 में कांग्रेस को जीत दिलाने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद ठुकरा दिया था। 2017 में जब उन्होंने पद छोड़ा, तब उनके बेटे राहुल गांधी को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया।
द गार्जियन के अनुसार, सोनिया का भारतीय राजनीति से परिचय 1960 के दशक में कैंब्रिज से शुरू हुआ। उस समय 18 वर्षीय सोनिया एक लैंग्वेज स्कूल में पढ़ रही थीं और एक ग्रीक रेस्तरां में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। वह पहली नजर का प्यार था।
राजीव के बारे में वह कहती हैं कि वह बेहद आकर्षक, देखभाल करने वाले और प्रेम करने वाले इंसान थे। उस वक्त उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि राजीव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते और 1966 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं इंदिरा गांधी के बेटे हैं।
सोनिया गांधी पिछले 36 वर्षों से दिल्ली के एक बड़े सफेद बंगले में रह रही हैं, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की याद दिलाता है। इसी घर में 1991 में उन्हें खबर मिली थी कि श्रीलंकाई तमिल अलगाववादी आतंकवादियों ने उनके पति की हत्या कर दी है।
समय के साथ यह घर कांग्रेस की गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया। उनकी स्टडी में नेहरू, राजीव, इंदिरा और महात्मा गांधी की तस्वीरें सजी हैं। एक दशक बाद दिए गए इस इंटरव्यू के दौरान वह नर्वस नजर आईं। उन्होंने अपना आगामी संस्मरण ‘बिलोंगिंग’ और कुछ निजी बातें साझा करने के लिए ही इस मुलाकात के लिए हामी भरी थी। नैतिक समर्थन के लिए उनकी बेटी प्रियंका गांधी भी उनके साथ मौजूद थीं।
सोनिया गांधी मौजूदा सरकार की कड़ी आलोचक हैं। उनका आरोप है कि नरेंद्र मोदी एक सत्तावादी ताकत हैं जो हमारे देश के मूल स्वरूप को बदलने पर तुले हुए हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने व्यवस्थित रूप से लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर दिया है।
मोदी के 12 वर्षों के शासन में लागू किए गए हिंदू राष्ट्रवादी दृष्टिकोण ने अल्पसंख्यकों, विशेषकर 20 करोड़ मुसलमानों के उत्पीड़न को जन्म दिया है। सोनिया का कहना है कि अब संसद में विपक्ष को बहस करने की अनुमति नहीं दी जाती है, जो कि पहले के समय से बिल्कुल अलग है।
द गार्जियन के अनुसार, मोदी सरकार का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ बनाना है। इसी वजह से सोनिया और उनके बच्चों पर लगातार तीखे निजी हमले होते रहे हैं। बातचीत के दौरान ही राहुल गांधी का फोन आया और पता चला कि एक जज ने उन्हें 2018 के मानहानि मामले में बरी कर दिया है।
सरकार की आलोचना पर भाजपा की यह सख्ती इस कदर है कि सोनिया के आगामी संस्मरण को पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशित करने से अंतिम समय में रोक दिया। हालांकि प्रकाशक ने इस दावे का खंडन किया है। हाल ही में उनके 26 वर्षीय पोते को भी दिल्ली में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली अपनी तस्वीरों की प्रदर्शनी हटाने के लिए मजबूर किया गया था।
एक महिला नेता के तौर पर भारत के पितृसत्तात्मक समाज की चुनौतियों को सोनिया ने बहुत करीब से देखा है। जब वह 1968 में भारत आईं, तो वह अपनी सास के साथ एक साधारण बंगले में रहने लगीं।
बाहरी दुनिया के लिए इंदिरा गांधी एक ‘लौह महिला’ थीं, लेकिन घर में वह एक आम मां की तरह ही थीं। सोनिया बताती हैं कि इंदिरा पर काम का बहुत भारी दबाव रहता था। किताब में एक घटना का जिक्र है जहां एक पारिवारिक रात्रिभोज के दौरान इंदिरा ने गुस्से में अपनी थाली टेबल के पार फेंक दी थी।
1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने का सबसे विवादास्पद फैसला किया। द गार्जियन के अनुसार, इस फैसले पर गांधी परिवार बंटा हुआ था। राजीव गांधी इसके सख्त खिलाफ थे और अगले चुनाव का इंतजार करना चाहते थे, जबकि उनके उग्र स्वभाव वाले भाई संजय गांधी ने इसे लागू करने का दबाव डाला।
आज सोनिया इसे एक बड़ी गलती मानती हैं। इसके कुछ वर्षों बाद 1984 में पंजाब में स्वर्ण मंदिर में सैन्य अभियान के बाद, 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की उनके ही सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सोनिया ने खून से लथपथ अपनी सास को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी।
इस त्रासदी के बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद संभालना पड़ा और उनके कार्यकाल की शुरुआत में ही भयंकर सिख विरोधी दंगे भड़क उठे। उस दौर में गांधी परिवार खौफ के साए में जीने लगा था। सोनिया हमेशा डरती थीं कि अगला नंबर उनके पति का होगा। 1991 में उनकी यह आशंका सच साबित हुई जब एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की जान ले ली।
प्रियंका गांधी ने बताया कि उस दुखद घटना के बाद उनकी मां पूरे दिन अंधेरे में बैठकर मोजार्ट का ‘रिक्विम’ सुनती रहती थीं। खुफिया एजेंसियों को तमिल टाइगर्स के हमले की भनक थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने राजीव की उच्च स्तरीय सुरक्षा हटा ली थी।
इसके ठीक बाद देश में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। सोनिया उस दृश्य को टीवी पर देखकर रो पड़ी थीं। वह मानती हैं कि कांग्रेस की कुछ लापरवाहियों ने भी भाजपा की कट्टरपंथी राजनीति को उभरने का मौका दिया। साल 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने उसी स्थान पर एक भव्य हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया।
राजनीति के प्रति गहरी अरुचि के बावजूद, 1998 में कांग्रेस को बचाने के लिए सोनिया पार्टी अध्यक्ष बनीं। आज वह सक्रिय राजनीति के रोजमर्रा के कामों से थोड़ी दूर हैं। अब वह अपना समय इतिहास की किताबें पढ़ने, कला प्रदर्शनियों में जाने और अपने दो जैक रसेल कुत्तों, नूरी और लापो (प्रियंका के पास भी कभी सात गोल्डन रिट्रीवर कुत्ते थे) के साथ बिताना पसंद करती हैं।
पिछले एक दशक में गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस का ग्राफ तेजी से गिरा है। 2014 तक सत्ता में रही उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। सोनिया के पद छोड़ने के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार तीन आम चुनावों में मोदी से हार का सामना करना पड़ा है। परिवारवाद के आरोपों के बीच पार्टी लगातार संघर्ष कर रही है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सोनिया को युवा पीढ़ी से काफी उम्मीदें हैं।
हाल ही में सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे ‘कॉकरोच’ नाम के जेन ज़ी (Gen Z) युवाओं के विरोध प्रदर्शनों ने उन्हें नई आशा दी है। राहुल और प्रियंका की भी सड़कों पर उतरकर पुलिस से भिड़ने की तस्वीरें हाल ही में वायरल हुई हैं, जो यह साबित करती हैं कि गांधी परिवार का राजनीतिक सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें-
नेशनल चैंपियनशिप से पहले दृष्टिबाधित चेस चैंपियन के घर चोरी, दांव पर लगा गोल्ड मेडल का सपना











