अमेरिका और भारत के बीच लगभग 12,070 किलोमीटर की दूरी है और दोनों देशों की कोई साझा सीमा भी नहीं है। इसके बावजूद, बेहतर भविष्य और आर्थिक सुरक्षा की तलाश में भारतीय नागरिक लगातार अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, खतरनाक रास्तों से घुसपैठ करने वाले 21 देशों की सूची में भारत का नाम अब भी शीर्ष तीन में बरकरार है।
यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (USCBP) द्वारा जारी ताजा डेटा बताता है कि वित्तीय वर्ष 2026 (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) के दौरान अमेरिकी सीमा पर कुल 30,528 भारतीयों को पकड़ा गया है। यह संख्या अमेरिका के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले मेक्सिको और कनाडा को छोड़कर बाकी सभी देशों से अधिक है।
बॉर्डर एनकाउंटर (सीमा पर पकड़े जाने) के मामलों में 1,23,039 घुसपैठियों के साथ मेक्सिको पहले स्थान पर है। इसके बाद 37,700 मामलों के साथ कनाडा दूसरे और 30,528 मामलों के साथ भारत तीसरे स्थान पर मौजूद है। दिलचस्प बात यह है कि इस सूची में भारत ने 29,818 एनकाउंटर वाले चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।
अन्य देशों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वाटेमाला के 18,319, फिलीपींस के 17,985 और होंडुरास के 13,005 नागरिकों को अमेरिकी सीमा पर रोका गया। इसी तरह ब्राजील के 6,285, रूस के 5,327 और वेनेजुएला के 4,945 लोगों की पहचान हुई। अन्य सभी देशों के कुल 63,678 लोग सीमा पर पकड़े गए हैं।
बीते तीन वर्षों से भारत लगातार शीर्ष तीन देशों में बना हुआ है, हालांकि अवैध रूप से सीमा पार करने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 90,415 था, जो 2025 में घटकर 34,146 रह गया। अब वित्तीय वर्ष 2026 में यह संख्या 30,528 पर आ गई है, जो 2024 की तुलना में लगभग 66 प्रतिशत की भारी कमी को दर्शाता है।
दुनिया भर से अमेरिका में होने वाली कुल घुसपैठ में भी बड़ी कमी देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2026 में दुनिया भर से कुल 3,82,490 बॉर्डर एनकाउंटर दर्ज किए गए। यह वित्तीय वर्ष 2025 में दर्ज 6,91,906 मामलों के मुकाबले लगभग 45% कम है। इससे पहले के वर्षों में यह स्थिति और भी चिंताजनक थी, जब वित्तीय वर्ष 2024 में 29 लाख और वित्तीय वर्ष 2023 में 32 लाख लोग अमेरिकी सीमा पर पकड़े गए थे।
इस गिरावट का सीधा संबंध अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों से है। ट्रंप ने 5-6 नवंबर 2024 को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी और 20 जनवरी 2025 को सत्ता में अपनी आधिकारिक वापसी की। उनके नए प्रशासन का मुख्य फोकस अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर कड़ी कार्रवाई करना रहा है।
आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) की सख्त कार्रवाई के बावजूद, गुजरात, पंजाब और आंध्र प्रदेश के लोग ‘डंकी रूट’ के नाम से मशहूर खतरनाक रास्तों का विकल्प चुन रहे हैं। अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सिर्फ उत्तर और मध्य गुजरात के लोग मेक्सिको और कनाडाई सीमाओं से अमेरिका में छुपकर घुसने के लिए 80 लाख रुपये से लेकर 1.25 करोड़ रुपये तक की भारी रकम चुका रहे हैं।
यह यात्रा न केवल महंगी है बल्कि जानलेवा भी साबित हो रही है। साल 2022 से 2025 के बीच केवल गुजरात के ही कम से कम 11 लोगों ने इस अवैध मार्ग से अमेरिका पहुंचने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी है। इसके अलावा इसी दौरान 11 अन्य लोग या तो गंभीर रूप से घायल हुए हैं या फिर हमेशा के लिए लापता हो गए हैं।
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