आजकल साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए रोज नए तरीके अपना रहे हैं। अहमदाबाद के जुहापुरा इलाके से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की रहने वाली 29 वर्षीय एक गृहिणी ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लालच में आकर साइबर अपराधियों का शिकार हो गई। ठगों ने शुरुआत में कुछ छोटे भुगतान करके महिला का भरोसा जीता और फिर ज्यादा कमीशन का झांसा देकर उससे करीब 11 लाख रुपये ऐंठ लिए।
शहर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, इस पूरी घटना की शुरुआत 5 मार्च को हुई। पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर घर बैठे काम करने के अवसर का विज्ञापन देने वाली एक स्टोरी देखी थी। उस लिंक पर क्लिक करते ही वह एक व्हाट्सएप अकाउंट पर पहुंच गई, जिसका नाम “Michellegrewe” था। वहां उसे बताया गया कि शॉपिंग वेबसाइट्स पर उत्पादों को लाइक करके और उसका स्क्रीनशॉट भेजने के आसान काम से वह अच्छी खासी कमाई कर सकती है।
पुलिस के अनुसार, शुरुआत में महिला को एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े बेहद आसान काम दिए गए। इसके बाद उसे एक वेबसाइट पर रजिस्टर करने के लिए कहा गया, जहां उसने अपना मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी जैसी निजी डिटेल्स साझा कर दीं। रजिस्ट्रेशन की इस प्रक्रिया के तहत, एक क्यूआर कोड के माध्यम से वेरिफिकेशन फीस के रूप में 200 रुपये का भुगतान करने को कहा गया।
शिकायत में बताया गया है कि जालसाजों ने महिला का विश्वास जीतने के लिए शुरू में उसके द्वारा जमा की गई रकम से ज्यादा पैसे लौटाए। जब उसने 200 रुपये दिए, तो बदले में 300 रुपये मिले। इसी तरह 500 रुपये जमा करने पर 600 रुपये का भुगतान किया गया। बाद में किए गए डिपॉजिट पर भी उसे काफी अच्छा रिटर्न दिया गया, जिससे उसे लगने लगा कि यह कोई असली और मुनाफे वाला काम है।
इसके बाद महिला की बात एक अन्य व्हाट्सएप यूजर से कराई गई, जिसे “ट्यूटर” बताया गया। फिर उसे “VIP TASK 4K WITH 30% COMMISSION” नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि उस ग्रुप में कई सदस्य अपनी कमाई और टास्क के बारे में चर्चा करते नजर आते थे, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि दूसरे लोग भी इस योजना से भारी मुनाफा कमा रहे हैं। जांचकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद आरोपियों ने महिला से ज्यादा कमीशन का लालच देकर बड़ी रकम निवेश करने को कहा। कई दिनों तक अलग-अलग बैंक खातों में उससे पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
जब महिला ने अपने पैसे वापस मांगे, तो ठगों ने एक नई कहानी गढ़ दी। आरोपियों ने दावा किया कि उसके व्यवहार के कारण प्लेटफॉर्म पर उसका “क्रेडिट स्कोर” गिर गया है। उन्होंने शर्त रखी कि पैसे निकालने से पहले उसे अपना क्रेडिट स्कोर सुधारने के लिए और भी रकम जमा करनी होगी।
इस तरह 5 मार्च से लेकर 16 मार्च के बीच, पीड़िता ने कुल 10.7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन उसे कोई भुगतान नहीं मिला। ठगी का अहसास होने पर उसने अपने पिता और भाई को पूरी बात बताई।
उन्होंने तुरंत समझ लिया कि यह साइबर धोखाधड़ी का मामला है। इसके बाद भाई ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर संपर्क किया और फिर परिवार ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज कर लिया है और इस्तेमाल किए गए बैंक खातों व व्हाट्सएप नंबरों की जांच कर रही है।
यह भी पढ़ें-








