टेक दिग्गज एप्पल ने हाल ही में अपने कुछ हार्डवेयर उत्पादों जैसे मैकबुक, आईपैड और एक्सेसरीज की कीमतों में बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल शुरुआत हो सकता है और आने वाले महीनों में आईफोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। मेमोरी चिप्स की लागत में बेतहाशा वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के कारण कंपनी पर कीमतों को संशोधित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
फिलहाल एप्पल ने आईफोन की कीमतों में कोई छेड़छाड़ नहीं की है, लेकिन उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं बनी रहेगी। कंपनी संभवतः अपने सितंबर के लॉन्च इवेंट तक किसी बड़े बदलाव से बचना चाहेगी, लेकिन उसके बाद आने वाले नए आईफोन लाइनअप, विशेषकर प्रो मॉडल, वैश्विक स्तर पर महंगे हो सकते हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना तय है।
आईडीसी इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंद्र सिंह का कहना है कि एप्पल उन गिनी-चुनी कंपनियों में से एक थी जिसने अब तक कीमतों को स्थिर रखा था, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला के मामले में उनकी स्थिति अन्य निर्माताओं के मुकाबले मजबूत थी।
हालांकि, अब मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत उपकरणों के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती बन गई है और साल की शुरुआत से ही सप्लाई संबंधी दिक्कतें और अधिक गंभीर हो गई हैं।
एप्पल ने पिछले कई महीनों तक अपनी बेहतर परिचालन दक्षता और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मजबूत संबंधों के कारण घटक लागत के दबाव को खुद सोख लिया था, लेकिन अब यह लचीलापन खत्म होता दिख रहा है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक बताते हैं कि एप्पल ने लंबे समय तक अपनी कीमतों को नियंत्रण में रखा था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने समझाया कि जो मेमोरी घटक पहले 30 से 40 डॉलर में मिल जाता था, उसकी कीमत अब 100 डॉलर के पार चली गई है, जिसे अंततः ग्राहकों पर डालना ही होगा।
आईडीसी इंडिया की सीनियर रिसर्च मैनेजर उपासना जोशी के अनुसार, आने वाली आईफोन प्रो सीरीज की वैश्विक कीमतों में 50 से 200 डॉलर तक का इजाफा देखा जा सकता है। भारत जैसे बाजारों के लिए, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव इस कीमत को और अधिक प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि एप्पल ने अब तक आईफोन के दाम बचाकर रखे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि घटकों की लगातार बढ़ती लागत के चलते कंपनी के लिए लंबे समय तक इन कीमतों को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा।
एप्पल का यह निर्णय स्मार्टफोन बाजार के अन्य खिलाड़ियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। एंड्रॉइड निर्माता पहले से ही पिछले साल के अंत से कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं, और विश्लेषकों का मानना है कि एप्पल के इस रुख से उन्हें भी दाम और बढ़ाने का मौका मिल जाएगा। तरुण पाठक का अनुमान है कि त्योहारी सीजन से पहले कुछ निर्माता अपनी विभिन्न श्रेणियों में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं।
इस बदलाव का सीधा असर इस साल होने वाली त्योहारी सेल पर भी दिखेगा। हालांकि प्रोमोशनल ऑफर्स जारी रह सकते हैं, लेकिन प्रभावी बिक्री मूल्य पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा होंगे। उपासना जोशी सलाह देती हैं कि जो ग्राहक नया डिवाइस खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि भविष्य में इनके और महंगे होने की ही संभावना है।
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