केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम मित्रा’ (PM MITRA) योजना के तहत दो बड़े पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिल गई है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ और गुजरात के नवसारी (वांसी) में बनने वाले टेक्सटाइल पार्कों के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब जल्द ही इन प्रोजेक्ट्स के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इन दोनों ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्कों का विकास निजी डेवलपर्स द्वारा किया जाएगा। इसके लिए ‘डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (DBFOT) मॉडल को अपनाया गया है। इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य कपड़ा उद्योग के लिए एक विश्व स्तरीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है। इससे बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा।
अनुमान है कि इन दोनों पार्कों में टेक्सटाइल सेक्टर के जरिए कुल 20,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। प्रत्येक पार्क में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। रोजगार के मोर्चे पर भी यह एक बेहद शानदार कदम है। हर एक पार्क से करीब 1,00,000 प्रत्यक्ष और 2,00,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स के लिए रियायत अवधि (कंसेशन पीरियड) अधिकतम 50 साल तय की गई है।
लखनऊ में बनने वाला पीएम मित्रा पार्क 1,000 एकड़ में फैला होगा। इसका निर्माण केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त स्वामित्व वाले एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के जरिए किया जाएगा। इसमें राज्य की 51 प्रतिशत और केंद्र की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस प्रोजेक्ट के बुनियादी ढांचे, प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, सामान्य उपयोगिताओं और आवास जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,946.92 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आंका गया है।
वहीं दूसरी तरफ, गुजरात के नवसारी जिले के वांसी में 1,142 एकड़ जमीन पर दूसरा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जाएगा। यह भी केंद्र और राज्य सरकार के इसी तरह के संयुक्त उद्यम (JV) के माध्यम से बनेगा। इस विशाल प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 3,209 करोड़ रुपये है। इस फंड का इस्तेमाल सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, बिजली व्यवस्था, कमर्शियल सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स जैसी जरूरी चीजों के लिए किया जाएगा।
नीलामी के दस्तावेज जारी करने से पहले, पीपीपीएसी ने रियायत ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए थे। इनमें बोली लगाने वालों की योग्यता, मिड-टर्म परफॉरमेंस का आकलन, जमीन के मूल्य निर्धारण का तंत्र और समाप्ति भुगतान (टर्मिनेशन पेमेंट) के प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही यूजर चार्ज रेगुलेशन और सामान्य बुनियादी ढांचे के लिए तकनीकी विशिष्टताओं में भी बदलाव किए गए हैं।
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरी रियायत अवधि के दौरान प्रोजेक्ट का लगातार विकास होना चाहिए। डेवलपर्स को शुरुआत में ही जमीन भुनाकर मुनाफा कमाने से रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय भी तय किए गए हैं। प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने इन तमाम सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जिससे तकनीकी विशिष्टताओं और योग्यता मानदंडों में अधिक स्पष्टता सुनिश्चित की जा सके।
पीएम मित्रा योजना का लक्ष्य विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे, वर्कर हाउसिंग और स्किल डेवलपमेंट सेंटर के साथ एकीकृत कपड़ा पार्क विकसित करना है। यह पहली बार है जब पीएम मित्रा पार्कों को पीपीपी मॉडल के जरिए धरातल पर उतारा जा रहा है।
इसका मकसद भारत को वैश्विक स्तर पर कपड़ा और परिधान निर्माण का प्रमुख हब बनाना है। पूरी तरह से विकसित होने के बाद, प्रत्येक पार्क में छोटे और बड़े उद्यमों सहित लगभग 500 औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने की उम्मीद है।
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