असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए एक करारी और शर्मनाक शिकस्त लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सत्तारूढ़ एनडीए ने 126 में से करीब 97 सीटों पर बढ़त और जीत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में शानदार वापसी की है।
इसके विपरीत, 10 साल बाद सत्ता में वापसी का ख्याली पुलाव पका रही कांग्रेस और उसका ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ मात्र 26 सीटों के आसपास सिमट कर रह गया है। यह स्पष्ट जनादेश दिखाता है कि असम की जनता ने कांग्रेस की दिशाहीन राजनीति को सिरे से नकार दिया है।
कांग्रेस की इस ऐतिहासिक दुर्गति का सबसे बड़ा प्रतीक खुद असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई की शर्मनाक हार है। जोरहाट विधानसभा सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त गोगोई को भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों के भारी अंतर से धूल चटा दी है।
एक प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के चेहरे का अपनी ही सीट पर इस तरह हार जाना कांग्रेस के दिवालिया हो चुके नेतृत्व और जमीनी स्तर पर पार्टी की खोखली पकड़ की पोल खोलता है।
चुनाव के आंकड़े कांग्रेस की इस दुर्दशा की साफ गवाही दे रहे हैं। एनडीए ने जहां लगभग 49.46 प्रतिशत का भारी-भरकम वोट शेयर हासिल किया है, वहीं कांग्रेस गठबंधन मात्र 31.53 प्रतिशत पर ही हांफता नजर आया।
कांग्रेस इस चुनाव में पूरी तरह से क्षेत्रीय विभाजन की राजनीति पर निर्भर थी, लेकिन भाजपा ने ऊपरी असम, उत्तरी असम, बराक घाटी और यहां तक कि निचले असम में भी क्लीन स्वीप करके कांग्रेस के सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। निचले असम जैसे क्षेत्रों में भी 44 में से 29 सीटों पर एनडीए का कब्जा कांग्रेस के रणनीतिकारों के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
राज्य भर में भाजपा और उसके सहयोगियों की जीत का सिलसिला पूरी तरह एकतरफा रहा है। नवगठित सिसिबरगांव सीट से भाजपा के जीवन गोगोई ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 40,000 से अधिक मतों से विशाल जीत दर्ज की।
धेमाजी से डॉ. रनोज पेगू ने 32,229 वोटों के अंतर से कांग्रेस के शैलेन सोनोवाल को करारी मात दी। इसके अलावा बीटीआर क्षेत्र में भी एनडीए की सहयोगी बीपीएफ ने मोजबाट जैसी सीटों पर अपना परचम लहराकर कांग्रेस के बचे-खुचे अस्तित्व को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है।
यह जनादेश स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सरमा की विकासोन्मुखी नीतियों पर जनता की पक्की मुहर है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार असम में नोटा (NOTA) का 1.29 प्रतिशत का आंकड़ा पार करना भी यह दर्शाता है कि कई मतदाताओं ने किसी को वोट न देना बेहतर समझा, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के घोषणापत्र पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया।
यह चुनाव कांग्रेस के लिए एक कड़ा सबक है कि सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने और हवाई गठबंधन बनाने से जनता का वोट नहीं मिलता। असम की जनता ने बता दिया है कि उनके राज्य में कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।
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