पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों ने राज्य में एक बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत दिए हैं। 293 सीटों पर हो रही मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) काफी पीछे छूट गई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 198 सीटों (8 जीत, 190 बढ़त) के साथ सत्ता पर काबिज होने की तैयारी कर रही है, वहीं टीएमसी केवल 89 सीटों (1 जीत, 88 बढ़त) पर सिमटती नजर आ रही है।
भाजपा की प्रचंड जीत के मुख्य कारण
भाजपा की इस शानदार सफलता का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों और आरक्षित सीटों पर उनका जबरदस्त प्रदर्शन है। पार्टी ने अपने वोट शेयर में लगभग 6.86 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज करते हुए 44.83% मत प्राप्त किए हैं। दक्षिण-पश्चिम के कृषि बेल्ट (बर्धमान, मिदनापुर, बीरभूम) में भाजपा ने टीएमसी का सूपड़ा साफ करते हुए 93 सीटों पर बढ़त बना ली है।
इसके अलावा, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और मतुआ तथा राजवंशी समुदायों तक पार्टी की पहुंच के कारण 84 में से 65 एससी/एसटी आरक्षित सीटों पर भाजपा ने निर्णायक बढ़त हासिल की है। हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और ग्रेटर कोलकाता जैसे शहरी क्षेत्रों में भी सेंधमारी ने इस जीत की मजबूत नींव रखी है।
टीएमसी के पतन की इनसाइड स्टोरी
दूसरी ओर, ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे कई बड़े चुनावी समीकरणों का टूटना है। टीएमसी का वोट शेयर 6.15% गिरकर 41.87% पर आ गया है। 166 मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी के वोट बैंक में इस बार भारी बिखराव देखने को मिला है, जिसका सीधा फायदा आईएसएफ (ISF) के नेतृत्व वाले लेफ्ट गठबंधन और कुछ हद तक कांग्रेस को हुआ।
दक्षिण-पश्चिम बंगाल और आरक्षित सीटों पर टीएमसी का पूरी तरह से पतन हो गया है। हालांकि अत्यधिक शहरी इलाकों में टीएमसी ने अपना वोट शेयर काफी हद तक बचाया है, लेकिन यह केवल कुछ ही सीटों पर बड़े अंतर की जीत तक सीमित रह गया। इस कारण उनकी सीटें कम हो गईं और वे बहुमत के आंकड़े से कोसों दूर चले गए।
बंगाल में कांग्रेस का पूर्ण पतन और दिशाहीनता
इस पूरे चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थिति सबसे अधिक दयनीय और शर्मनाक रही है। कांग्रेस एक बार फिर बंगाल की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करने में पूरी तरह विफल रही है। केवल 3.16% वोट शेयर के साथ पार्टी शून्य (0) सीटों पर सिमट गई है।
यह कांग्रेस के जमीनी जुड़ाव की कमी, दिशाहीन नेतृत्व और बंगाल के मतदाताओं की नब्ज पहचानने में उनकी पूर्ण अक्षमता को दर्शाता है। एक समय राज्य की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही कांग्रेस अब महज़ एक मूक दर्शक बनकर रह गई है। जनता ने उनके नेतृत्व को पूरी तरह से नकार दिया है, जिससे राज्य में उनका अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है।
हाई-प्रोफाइल सीटों का हाल और आगे क्या
वीआईपी मुकाबलों की बात करें तो भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर जारी है। हालांकि ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन वोटों का अंतर तेजी से कम हुआ, जिसके कारण उन्हें स्वयं मतगणना केंद्र का रुख करना पड़ा।
इस बीच, भाजपा ने जमुड़िया, दार्जिलिंग, मेदिनीपुर और कलिम्पोंग जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर ली है। अपनी संभावित हार को देखते हुए टीएमसी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग पर धीमी गिनती और ईवीएम (EVM) हैकिंग के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके विपरीत, पूरे राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं का जश्न शुरू हो चुका है, जो बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है।
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