जीएसटी से बचने के लिए आधार का दुरुपयोग करती हैं फर्जी कंपनियां

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जीएसटी से बचने के लिए आधार का दुरुपयोग करती हैं फर्जी कंपनियां

| Updated: February 16, 2023 15:07

गुजरात आयकर विभाग के अधिकारियों ने सरकारी सहायता के झूठे आश्वासन पर अनपढ़ और जरूरतमंदों को फंसाने वाले गिरोह का पता लगाया है। इसका खुलासा अभी होना बाकी है। इस धंधे में एक बार फॉर्म भरे जाने और विवरण प्राप्त करने के बाद आधार कार्ड नंबर का उपयोग फर्जी कंपनियों के लिए किया जाता है। ताकि जीएसटी का रजिस्ट्रेशन हासिल कर टैक्स बचाने के लिए इसके जरिये फर्जी बिलिंग की साजिश हो सके।

फर्जी बिलिंग को रोकने के अभियान के तहत आयकर अधिकारियों ने 7 फरवरी को स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर सूरत, भावनगर, अहमदाबाद, आणंद और राजकोट में जांच की। 112 कैंपस की जांच के बाद, SGST के अधिकारियों ने सूरत में 75 संदिग्ध फर्में पाईं। इनमें से 61 कंपनियों ने 83.73 करोड़ रुपये के झूठे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करते हुए 2,768.31 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जमा किए थे। इन फर्मों के पैन कार्ड के आधार पर नो योर कस्टमर (केवाईसी) डिटेल्स से कुछ मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी बरामद हुए थे। ये विवरण 136 फर्मों में सामान्य पाए गए, जिनमें से 104 गुजरात में रजिस्टर्ड थीं। फर्जी फर्मों की जांच चल रही है।

सूरत में स्पॉट वेरिफिकेशन के दौरान एंड्रॉइड एप्लिकेशन का उपयोग करके आधार और पैन जैसे डुप्लीकेट दस्तावेज बनाने में शामिल एक व्यक्ति का मोबाइल फोन नंबर मिला। उसे फेसबुक मार्केटप्लेस पर शिव लोन सर्विसेज नाम से फर्जी आईडी बनाकर कर्ज के बहाने लोगों का डेटा हासिल करने के लिए पकड़ा गया था।

सूरत की कुछ फर्मों में आधार के अनुसार पता भावनगर, पलिताना, अमरेली, अहमदाबाद और आणंद में दिखाया गया था। जांच करने पर अधिकारियों ने पाया कि पलिताना में लोग अपने नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन और पैन कार्ड से पूरी तरह अनजान थे। कई मामलों में आधार कार्ड में फोन नंबर में बदलाव किया गया। कई लोगों ने कहा कि आधार केंद्रों पर लोगों ने उन्हें सरकारी सहायता दिलाने का झांसा देकर उनके अंगूठे के निशान ले लिए थे।

संशोधित फोन नंबरों से 470 जीएसटी पंजीकरणों के सत्यापन से अधिकारियों को पूरे भारत में 2,700 जीएसटी नंबरों का पता चला। कई के फर्जी होने की संभावना है। इस संबंध में भावनगर में एफआईआर  दर्ज कराई गई थी।

अहमदाबाद में 24 फर्मों के वेरिफिकेशन में 13 फर्जी बिलिंग में शामिल थीं। एसजीएसटी विभाग ने पाया कि 1,350 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की वजह से 53 करोड़ रुपये का आईटीसी गलत तरीके से दूसरों को दिया गया।

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