गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर साल 2021 में पकड़ी गई 2,988 किलो हेरोइन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े मामले की कड़ियां जोड़ते हुए बुधवार को जांच एजेंसी ने दिल्ली के कारोबारी हरप्रीत सिंह तलवार और उसके सहयोगियों से जुड़े पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई यह कार्रवाई देश के सबसे बड़े ड्रग तस्करी मामलों में से एक की जांच का हिस्सा है। इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य नशे के अवैध व्यापार से कमाई गई उस काली कमाई का पता लगाना है, जिसे लेकर अधिकारियों को शक है कि उसे राजधानी दिल्ली के कई नामी नाइटक्लब और अन्य व्यवसायों में निवेश किया गया है।
जांच एजेंसी की इस रेड में हरप्रीत सिंह तलवार के अलावा शम्सुद्दीन नाम के एक अन्य व्यक्ति और उनके करीबियों के परिसरों को खंगाला गया है। कबीर तलवार के नाम से मशहूर हरप्रीत सिंह को इससे पहले अगस्त 2022 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था, हालांकि हाल ही में उसे अदालत से जमानत मिल गई थी।
इस कारोबारी का जांच एजेंसियों की राडार पर आने का पुराना इतिहास रहा है। इससे पहले मार्च 2021 में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने भी उसे मुंबई से गिरफ्तार किया था। उस दौरान उस पर दुबई से आए आयातित माल में छिपाकर लाई गई 4.75 करोड़ रुपये मूल्य की 21.6 लाख ‘गुडांग गरम’ सिगरेट की तस्करी करने का गंभीर आरोप लगा था।
दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले तलवार ने अपने करियर की शुरुआत आयात-निर्यात के व्यापार से की थी। समय के साथ उसने खुद को एक बेहद हाई-प्रोफाइल बिजनेसमैन के तौर पर स्थापित कर लिया, जो अपनी आलीशान जीवनशैली और महंगी लग्जरी कारों के कलेक्शन के लिए जाना जाता है।
ED की यह ताजा मनी लॉन्ड्रिंग जांच सितंबर 2021 में DRI द्वारा मुंद्रा पोर्ट पर की गई उस ऐतिहासिक जब्ती से जुड़ी है, जहां 2,988.21 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई थी। ईरान के रास्ते अफगानिस्तान से आयातित ‘सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क स्टोन’ (टैल्क पाउडर के पत्थर) की खेप के बीच इस भारी मात्रा में ड्रग्स को बड़ी चालाकी से छिपाया गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत 21,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।
बाद में इस मामले की जांच अपने हाथों में लेने वाली NIA ने इसे नार्को-टेररिज्म (मादक पदार्थ आतंकवाद) का केस दर्ज किया था। एजेंसी का स्पष्ट आरोप है कि तस्करी का यह पूरा ऑपरेशन एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें अफगानी, ईरानी और पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। इतना ही नहीं, ड्रग सिंडिकेट के तार पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से भी जुड़े पाए गए थे।
इसी साल की शुरुआत में NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मुंद्रा हेरोइन की खेप से मिलने वाले पैसे को वापस भेजने वालों तक पहुंचाया गया था। इस धन का इस्तेमाल सीधे तौर पर लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया गया। साजिशकर्ताओं ने वैध आयात-निर्यात के रास्तों का दुरुपयोग करते हुए भारत में इस नशे की खेप को दाखिल करवाया था।
अपनी जांच में NIA ने यह भी खुलासा किया था कि तलवार और अन्य आरोपी शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए हेरोइन आयात करने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का अहम हिस्सा थे। इन कंपनियों की मदद से ड्रग्स को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
जांच एजेंसी की चार्जशीट में कई अफगान नागरिकों, भारतीय कारोबारियों और विदेशों में बैठे साजिशकर्ताओं के नाम शामिल हैं। इसमें यह दावा भी किया गया है कि मुंद्रा पोर्ट पर सितंबर 2021 में खेप पकड़े जाने से पहले भी साजिशकर्ताओं द्वारा भारत में इसी तरह से मादक पदार्थों की कई खेप सफलतापूर्वक लाई जा चुकी थीं।
यह भी पढ़ें-










