पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने इस दुर्घटनाग्रस्त विमान के इंजन की विस्तृत एनालिसिस रिपोर्ट भारत भेज दी है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को एआई-171 हादसे की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए इस बेहद अहम तकनीकी जानकारी का ही इंतजार था। गौरतलब है कि इस भयानक विमान दुर्घटना में 260 लोगों की जान चली गई थी।
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इंजनों को गहराई से जांचने के लिए अमेरिका भेजा गया था और अब उनकी रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। जांच से जुड़े सभी आवश्यक इनपुट अब ब्यूरो के पास उपलब्ध हैं। AAIB अब सभी पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण करेगा और करीब दो महीने के भीतर इस मामले की फाइनल रिपोर्ट जारी होने की उम्मीद है।
अब पूरी दुनिया की नजरें AAIB की जांच पर टिकी हैं कि क्या वह इस भीषण हादसे की असली वजह का सटीक पता लगा पाएगा। इस फाइनल रिपोर्ट की वैश्विक स्तर पर कड़ी समीक्षा की जाएगी और इसे कई देशों की अदालतों में चुनौती भी दी जा सकती है।
दशकों से विमान हादसों की जांच कर रहे एक विशेषज्ञ के मुताबिक, यह बात पहले से स्पष्ट है कि ईंधन की आपूर्ति कटने के कारण विमान के इंजन बीच हवा में बंद हो गए थे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा हुआ क्यों था।
विशेषज्ञ का मानना है कि हवाई दुर्घटना की जांच में हर संभावित कारण को खारिज करते हुए मुख्य वजह तक पहुंचना होता है। उनका कहना है कि यदि सटीक कारण का पता नहीं चलता है, तो अंतिम रिपोर्ट में बिना किसी ठोस आधार के घुमा-फिराकर किसी पर दोष मढ़ने से बचना चाहिए।
यह चिंता पिछले साल जुलाई में जारी AAIB की पहली प्रारंभिक रिपोर्ट की एक विवादित टिप्पणी से उपजी है। उस रिपोर्ट के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (CVR) हिस्से में एक पायलट दूसरे से पूछता हुआ सुनाई देता है कि उसने ‘कटऑफ’ क्यों किया। इसके जवाब में दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
इस खुलासे के बाद जांच को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया था और AAIB को अपने निष्कर्षों का बचाव करना पड़ा था।
वरिष्ठ जांचकर्ताओं का अनुमान है कि जीई एयरोस्पेस की रिपोर्ट में शायद वही बातें सामने आएंगी जिनकी पहले से उम्मीद की जा रही थी। यानी इंजनों में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी और वे केवल ईंधन न मिलने के कारण बंद हुए थे, जिसका असल कारण अभी भी एक रहस्य है।
एक अन्य अनुभवी जांचकर्ता ने कहा कि अपनी जान गंवा चुके पायलट पर दोष मढ़ देना सबसे आसान और बचकाना काम होगा। अंतिम रिपोर्ट में जो भी निष्कर्ष दिए जाएं, उसके पीछे बेहद ठोस और वैज्ञानिक कारण होने चाहिए। जल्द ही यह भी साफ हो जाएगा कि क्या हमारे जांच ब्यूरो के पास इतने बड़े स्तर के हादसे की जांच करने की पर्याप्त तकनीकी क्षमता है या नहीं।
पहली प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इंजन 1 और इंजन 2 के फ्यूल कटऑफ स्विच एक के बाद एक ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पोजीशन में चले गए थे। इन दोनों के बंद होने के बीच महज 01 सेकंड का अंतर था, जिसके कारण विमान ने बहुत तेजी से अपनी ऊंचाई खो दी और यह दर्दनाक हादसा घटित हुआ।
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