नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का नाम पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉर्ज सोरोस को खुले तौर पर ‘भारत का दुश्मन’ और ‘आर्थिक युद्ध अपराधी’ करार देती आई है। लेकिन, न्यूज़लॉन्ड्री की एक हालिया खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे राजनीतिक विमर्श में एक ऐसा विरोधाभास उजागर किया है, जो देश की राजनीति में भूचाल ला सकता है।
न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल के अनुसार, जिस सोरोस से कथित संबंधों को लेकर भाजपा अक्सर कांग्रेस पर हमलावर रहती है, उसी जॉर्ज सोरोस की फंड मैनेजमेंट फर्म ने केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हरदीप सिंह पुरी की बेटी को 200 मिलियन डॉलर (करीब 1600 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम फंड मैनेज करने के लिए सौंपा है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
दस्तावेज़ बताते हैं कि जॉर्ज सोरोस की फंड मैनेजमेंट फर्म ने अपने पोर्टफोलियो के लिए उस निवेश फंड को चुना, जिसकी सह-संस्थापक (Co-founder) केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हैं।
न्यूज़लॉन्ड्री ने यह सनसनीखेज खुलासा हवा-हवाई नहीं किया है। इस रिपोर्ट का आधार अमेरिकी कॉर्पोरेट फाइलिंग्स (US Corporate Filings) और केमैन आइलैंड्स रजिस्ट्री (Cayman Islands Registry) के पुख्ता रिकॉर्ड्स हैं, जो इस मामले की एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं।
राजनीतिक कथनी और करनी में बड़ा अंतर?
यह रिपोर्ट इसलिए भी बेहद अहम हो जाती है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी का सोरोस को लेकर रुख हमेशा बेहद आक्रामक रहा है:
बीते मार्च महीने में ही भाजपा ने संसद भवन में सोरोस से कथित संबंधों को लेकर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ पोस्टर लहराए थे और विरोध मार्च निकाला था।
पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उन तमाम सिविल सोसाइटी संगठनों (NGOs) पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं, जिन्हें सोरोस की ‘ओपन सोसायटी फाउंडेशन्स’ (OSF) से किसी भी प्रकार की फंडिंग मिली थी।
भाजपा का आधिकारिक संदेश हमेशा यही रहा है कि जॉर्ज सोरोस भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने वाले एक खतरनाक विदेशी एजेंट हैं।
निष्कर्ष
एक तरफ जहां राजनीतिक मंचों से सोरोस को भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा उजागर किए गए कॉर्पोरेट दस्तावेज़ सत्ता के शीर्ष स्तर पर एक अलग ही वित्तीय गठजोड़ की कहानी बयां कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या सोरोस का पैसा जब विपक्ष या गैर-सरकारी संगठनों के पास जाता है तो वह ‘खतरा’ बन जाता है, और सत्ताधारी नेताओं के करीबियों की कंपनियों में निवेश होता है तो वह महज़ ‘व्यापार’ है?
(नोट: यह समाचार आलेख आपके द्वारा प्रदान किए गए न्यूज़लॉन्ड्री के मूल इनपुट्स और जांच रिपोर्ट के तथ्यों पर आधारित है।)











