गांधीनगर: गुजरात को जल्द ही दुनिया के चार प्रमुख ‘बिग कैट्स’ (बड़ी बिल्लियों) के प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाएगा। राज्य के वन विभाग ने बाघ, चीता और तेंदुए के लिए अलग-अलग कॉरिडोर बनाने की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।
इस खास प्रोजेक्ट के तहत बाघ और तेंदुए का कॉरिडोर उत्तर गुजरात के अरावली से लेकर दक्षिण गुजरात के डांग तक बनाया जाएगा। वहीं, चीतों के लिए कच्छ जिले के बन्नी घास के मैदानों (बन्नी ग्रासलैंड) में एक विशेष कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
गिर अभयारण्य में एशियाई शेरों का दबदबा पहले से ही मजबूती के साथ कायम है। इसके अलावा राज्य के जंगलों में तेंदुओं की भी एक अच्छी-खासी आबादी निवास करती है।
अब बाघ और चीते के इस नई योजना में जुड़ने से गुजरात भारत का ऐसा इकलौता राज्य बन जाएगा जहां ये सभी प्रमुख बिग कैट्स एक साथ खुले में पाए जाएंगे।
वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने सरकार के इस नए विजन को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि शेरों के साथ-साथ बाघ, चीता और तेंदुए के लिए गुजरात को एक सुरक्षित घर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए वन विभाग ने उन क्षेत्रों की पहचान भी कर ली है जिन्हें इन जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास के तौर पर बेहतर तरीके से ढाला जा सकता है।
मंत्री ने आगे बताया कि विभाग इन जीवों के लिए शिकार का एक मजबूत आधार (प्रे बेस) तैयार करेगा ताकि उन्हें भोजन की कमी न हो। इसके साथ ही कई वैज्ञानिक संरक्षण मॉडल भी विकसित किए जाएंगे।
इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य गुजरात को एक ऐसे अनूठे राज्य के रूप में दुनिया के सामने पेश करना है, जहां दुनिया की चार प्रमुख बड़ी बिल्लियां एक ही राज्य में मौजूद हों।
वन विभाग द्वारा सरकार के सामने पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट में इस योजना के भौगोलिक विस्तार का जिक्र किया गया है।
विभाग की इस प्रस्तुति के अनुसार, बाघ और तेंदुए का यह प्रस्तावित कॉरिडोर राज्य के कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। इन जिलों में अरावली, महिसागर, पंचमहाल, दाहोद, छोटा उदयपुर, नर्मदा, तापी, डांग और वलसाड शामिल हैं।
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