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गुजरात पुलिस की वांटेड लिस्ट या मजाक? जेल में बंद डॉन की तलाश, दाऊद इब्राहिम के 3 अलग-अलग नाम

| Updated: April 17, 2026 16:17

गुजरात पुलिस की वांटेड लिस्ट में भारी चूक: जेल में उम्रकैद काट रहा छोटा राजन 'फरार', दाऊद इब्राहिम का नाम और पता भी गलत दर्ज

गुजरात पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में कुछ ऐसी भारी खामियां सामने आई हैं, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य की पुलिस वर्षों से कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

जबकि हकीकत यह है कि राजन 2015 से ही भारतीय जेल में बंद है। उसे हत्या के दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और वह वर्तमान में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहा है।

वहीं, देश के सबसे बड़े भगोड़े और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम भी राज्य के पुलिस रिकॉर्ड में तीन अलग-अलग तरीकों से दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक भी नाम सही नहीं है।

इंटरपोल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और पूरी दुनिया उसे दाऊद इब्राहिम कास्कर के नाम से जानती है। लेकिन गुजरात के अलग-अलग जिलों ने अपने रिकॉर्ड में उसे अलग ही पहचान दे रखी है।

अहमदाबाद पुलिस के रिकॉर्ड में दाऊद को ‘दाऊद इब्राहिम मेमन’ लिखा गया है। जामनगर और सूरत में उसका नाम ‘दाऊद इब्राहिम शेख’ दर्ज है। मेहसाणा पुलिस ने एक कदम आगे बढ़ते हुए रचनात्मकता दिखाई है और उसका नाम ‘दाऊद इब्राहीम मेमन’ लिख दिया है, जिसमें अंग्रेजी की स्पेलिंग में एक अतिरिक्त ‘i’ भी जोड़ दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने साल 2003 में ही अल-कायदा जैसे आतंकी नेटवर्कों से उसके संबंधों का खुलासा करते हुए उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया था। इसके बावजूद, 23 साल बीत जाने के बाद भी गुजरात पुलिस अपने रिकॉर्ड में उसका सही नाम तक नहीं लिख पा रही है।

इस वांटेड सूची में सबसे चौंकाने वाली प्रविष्टि छोटा राजन की है। छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है, जिसे 2015 में भारत लाया गया था। इसके बाद 2018 में एक पत्रकार की हत्या और 2024 में एक होटल व्यवसायी की हत्या के मामले में उसे दोषी करार दिया गया। उम्रकैद की सजा काटने के बावजूद, वह आज भी अहमदाबाद शहर और सूरत सहित कई जिलों की मोस्ट वांटेड सूची में एक फरार अपराधी के रूप में दर्ज है।

पुलिस विभाग के सूत्रों ने माना है कि ये खामियां पुराने डेटा के रखरखाव में लापरवाही के कारण हुई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिला इकाइयां सीआईडी (क्राइम) को फरार आरोपियों के नाम भेजती हैं और वही इस सूची को संकलित करती है। अधिकारी के मुताबिक, कई मामलों में ऐसा लगता है कि इकाइयों ने बिना यह जांचे ही पुराने रिकॉर्ड कॉपी कर लिए कि आरोपी गिरफ्तार हुआ है, उसे सजा मिली है, वह जमानत पर है या उसकी मौत हो चुकी है।

जिलों के आधार पर इस वांटेड सूची के आंकड़े काफी अलग हैं। अमरेली में सबसे अधिक 45 वांछित आरोपी दर्ज हैं। इसके बाद अहमदाबाद शहर और सूरत दोनों जगह 20-20 वांटेड अपराधी हैं। आणंद, दाहोद, गांधीनगर और जूनागढ़ जैसे जिलों की सूची में लगभग 10-10 नाम शामिल हैं।

इस रिकॉर्ड में कुछ अन्य अजीब प्रविष्टियां भी देखने को मिली हैं। मेहसाणा में हत्या के एक मामले में वांटेड एक महिला का नाम लिखने के बजाय आधिकारिक रिकॉर्ड में उसे केवल “एक अन्य आरोपी की रखैल” के रूप में वर्णित किया गया है। रिकॉर्ड देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने उसका नाम जानना जरूरी ही नहीं समझा।

इन सबके बीच, आधिकारिक रिकॉर्ड में दाऊद इब्राहिम का पता आज भी मुंबई का ही दर्ज है। यह तब है जब अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां पिछले कई वर्षों से लगातार यह बता रही हैं कि वह देश से बाहर छिपा हुआ है।

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