जिनके घर नहीं हैं, उनके भी घर पहुँचा तिरंगा

| Updated: August 15, 2022 7:20 pm

देश आज़ादी के 75 साल के जश्न को अमृत महोत्सव( Amrit Mahotsav) के रूप में मना रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अपील पर हर घर तिरंगा अभियान को लेकर हर वर्ग में एक उमंग और उत्साह देखने को मिल रहा है, आज़ादी मिलने के 75 साल बाद ऐसा मौका पहली दफ़ा आया है की देश एक सुर और एक रंग में रंगा देखने को मिल रहा है।

22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी( Prime Minister Narendra Modi )द्वारा की गई ‘ हर घर तिरंगा’ (Har Ghar Tiranga )की एक अपील मुहिम में बदल जाती है और पूरा देश इस मुहिम के साथ जुड़ता है, आज़ादी के 75 साल (75 years of independence )का महोत्सव हर घर देखने को मिला, महोत्सव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग भी शामिल हुआ।

दिलीप भाई और तापी बहन

वाइब्स ऑफ इंडिया (Vibes of India )की टीम ने अहमदाबाद के नागरिकों के बीच जाकर एक प्रश्न करने की सोची और हमने उनसे प्रश्न पूछा की उनके लिए आज़ादी के मायने क्या हैं? इस मुहिम के अंतर्गत हर वर्ग तक हमारा प्रश्न पहुंचाने की कोशिश हमने की और कई अलग अलग जवाब हम तक पहुंचे, इसी बीच हमारी मुलाकात एक ऐसे परिवार से हुई जिसकी वजह से हमारे इस लेख का शीर्षक साकार हुआ है।

अहमदाबाद के मणिनगर इलाके की गरीब आबादी वाली बस्ती भाईपुरा में रहने वाले दिलीप भाई और तापी बहन शहर की सड़कों पर खिलौने बेंचने का काम करते हैं, तापी बहन और दिलीप भाई के पास पक्की ईंटों से बना कोई तथाकथित घर नहीं है, फुटपाथ पर जगह बनाकर एक छोटी सी व्यवस्था खड़ी कर उन्होंने अपना घर बनाया है।

आज़ादी( freedom) के मायने क्या हैं जब ये प्रश्न दिलीप भाई ( Dilip Bhai )से किया गया तब उन्होंने वाइब्स ऑफ इंडिया (Vibes of India )से बात करते कहा की ‘ खुश और संतुष्ट जीवन जीना ही सच्ची आज़ादी है ‘, दिलीप भाई की बात को बीच में रोकते हुए तापी बहन ने कहा ‘हमने हमारे घर के बाहर झंडा लगाया है’ उनकी ये बात सुनकर हमने उनसे पूछा की उन्हे हर घर तिरंगा की मुहिम की जानकारी कैसे मिली, उन्होंने हमें कहा की ‘हमारे इलाके के लोगों को किसी नेता ने झंडे देकर इस मुहिम से अवगत करवाया, हमारा खुद का पक्का मकान नहीं है, हम फुटपाथ पर झोंपड़ी बनाकर रहते है, हमारी झोंपड़ी हमारा घर है इसीलिए हमने भी हमारे घर को तिरंगे से सजाया है।

अज़ादी के इतने वर्ष बाद ऐसा मौका पहली बार आया है की देश में आज़ादी का पर्व इतने बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है, हर घर झंडा मुहिम के साथ हर वर्ग के लोग जुड़े और इस मुहिम को सफल बनाया।


अशोक गहलोत का तीन दिवसीय गुजरात दौरा 16 से

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