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ऑटो रिक्शा चालक से कैसे सत्ता को चुनौती देने लगे एकनाथ शिंदे

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कभी ऑटो रिक्शा चलाने वाले एकनाथ शिंदे आज सत्ता को चुनौती दे रहे हैं , ऑटो चालक के तौर पर शिवसेना से जुड़े शिंदे को सियासत जमकर रास आयी , वह पार्षद , स्थायी समिति के सदस्य से विधायक बने और 2004 से यह सिलसिला चलता रहा। संपत्ति और ताकत दोनों शिंदे ने अपने तरीके से बढ़ाई , उध्दव ठाकरे अगर मुख्यमंत्री नहीं बनते तो एकनाथ खुद को दावेदार मानकर चल रहे थे , लेकिन शिंदे के मन में यह टीस बाकी रह गयी। जो अभी बगावत के तौर पर निकली है।

कभी ऑटो रिक्शा चालक थे एकनाथ शिंदे


एकनाथ शिंदे ठाणे के कोपरी-पंचपखाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से एक बार फिर विधायक चुने गए हैं. एकनाथ शिंदे इससे पहले इसी विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार 2014, 2009 और 2004 में शिवसेना के टिकट पर विधायक चुने गए हैं. विधायक चुने जाने से पहले एकनाथ शिंदे ठाणे महानगर पालिका में नगर सेवक रह चुके हैं और एक समय था जब वे ऑटो रिक्‍शा भी चलाते थे.

बता दें कि एकनाथ शिंदे का जन्‍म 9 फरवरी 1964 में महाराष्‍ट्र के सतारा जिले में हुआ था. सतारा के पहाड़ी जवाली तालुका के पास उनका परिवार रहता था. उन्‍होंने ठाणे में मंगला हाई स्‍कूल और जूनियर कॉलेज से पढ़ाई की. इसके बाद आजीविका चलाने के लिए वह ऑटो रिक्‍शा चलाने लगे. काफी समय ठाणे में रहने के बाद एकनाथ शिंदे यहां के वागले एस्‍टेट इलाके के निवासी हो गए.

ठाणे में एकछत्र राज


मंबई से सटे ठाणे के लिए एकनाथ शिंदे बड़ा नाम है. ऐसा कहा जाता है कि ठाणे में उनकी तुती बोलती है. वे लोकसभा या निकाय चुनाव में जिसे मैदान में उतारते हैं, उसकी जीत पक्‍की हो जाती है. इनका उम्‍मीदवार ही चुनाव जीतता है.
एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे भी शिवसेना के टिकट पर सांसद हैं. कल्‍याण लोकसभा सीट से उन्‍होंने चुनाव जीता था.

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