नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द होने और 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (री-टेस्ट) के बीच के कुछ ही हफ्तों में, पूरे भारत में कम से कम 12 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। यह दर्दनाक आंकड़ा परीक्षा को लेकर छात्रों के बीच पैदा हुई भारी अनिश्चितता, मानसिक दबाव और उस गहरे दुख की तस्वीर पेश करता है, जिसका सामना आज कई परिवार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 12 मई को नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। राजस्थान के सीकर में 150 पन्नों के ‘गैस पेपर’ के लीक होने के संदेह के बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया था। जांचकर्ताओं को इस पेपर लीक के तार महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने के सबूत मिले थे। इस फैसले के बाद महज सवा महीने के भीतर 12 होनहार छात्रों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
ये सभी 12 परीक्षार्थी 21 जून को होने वाले री-टेस्ट में शामिल होने वाले थे। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इन 12 मौतों में से कम से कम पांच मामलों में कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक 22 वर्षीय दलित छात्र ने 3 मई को परीक्षा देने के बाद अपने पिता से बड़े गर्व से कहा था कि उसका पेपर इतना अच्छा हुआ है कि अब भगवान भी उसे पास होने से नहीं रोक सकते। लेकिन जब पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा की घोषणा हुई, तो वह बुरी तरह टूट गया।
इस घोषणा के ठीक तीन दिन बाद, 18 मई को उसने खौफनाक कदम उठा लिया। उस वक्त उसकी बहन नहाने गई थी। मकान मालिक उसे तुरंत पास के अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। सीकर में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर के इस बेटे का परिवार अब 2 करोड़ रुपये के मुआवजे और एक भाई-बहन को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहा है। उन्होंने अपनी मांगें पूरी होने तक उसकी अस्थियां गंगा में विसर्जित करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
सीकर के ही एक अन्य परिवार के लिए 15 जून की सुबह किसी भी आम दिन जैसी ही थी। मुंबई में रहने वाले एक व्यवसायी पिता अपनी पत्नी को उनके पैतृक गांव झुंझुनू छोड़कर घर लौटे, तो पाया कि उनका 22 वर्षीय बेटा और बेटी कोचिंग क्लास के लिए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार, जब भाई-बहन शाम को घर लौटे तो घर में सन्नाटा पसरा था और उन्हें एक सुसाइड नोट मिला जिसमें लिखा था, “मैं इस दुनिया से दूर जा रहा हूं, मुझे माफ कर दो।” उस 22 वर्षीय युवक ने सीलिंग फैन से फांसी लगा ली थी।
गोवा में एक 17 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर के एथलीट और हॉकी खिलाड़ी ने 12 मई को अपने घर पर एक सुसाइड नोट छोड़ा। उसने लिखा कि अब वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठना चाहता। पुलिस के मुताबिक, उस रात 10 से 11 बजे के बीच इस किशोर ने आत्महत्या कर ली। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस घटना का सीधा संबंध परीक्षा रद्द होने से था या नहीं, लेकिन पुलिस पंचनामे में परिवार ने इसे “परीक्षा के प्रदर्शन के दबाव” का परिणाम बताया है।
उत्तराखंड में 16 जून की सुबह जब 24 वर्षीय छात्रा नाश्ते के लिए बाहर नहीं आई, तो उसकी मां बुरी तरह घबरा गई। उसका कमरा अंदर से बंद था। उन्होंने तुरंत अपने पति को सूचना दी, जो सेना के एक रिटायर्ड कर्मचारी हैं। परिवार यह अच्छी तरह जानता था कि उनकी बेटी 21 जून के री-टेस्ट को लेकर भारी तनाव में थी।
जब दरवाजा तोड़ा गया, तो वह अपने दुपट्टे के सहारे सीलिंग फैन से लटकी मिली। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने सुसाइड नोट में माफी मांगते हुए लिखा था, “आई लव यू पापा, मुझे माफ कर दीजिए। इसमें किसी की गलती नहीं है, यह मेरी अक्षमता के कारण है।”
गुजरात के अहमदाबाद में 18 जून की आधी रात के बाद एक 17 वर्षीय छात्र इमारत के नीचे खून से लथपथ पाया गया। पुलिस के अनुसार, इस किशोर ने छलांग लगाने से पहले अपनी छठी मंजिल की बालकनी में लगे कबूतरों के जाल को काटा था।
अहमदाबाद के एल डिवीजन के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) डी.वी. राणा ने बताया कि जब तक पैरामेडिक्स वहां पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। छात्र के चाचा ने बताया कि वह न केवल नीट री-टेस्ट देने वाला था, बल्कि उसने फार्मेसी कोर्स के लिए भी आवेदन किया था।
तमिलनाडु के कोयंबटूर की एक 19 वर्षीय छात्रा ने दोबारा परीक्षा से कुछ दिन पहले ही व्हाट्सएप पर अपना दुख साझा किया था। वह पहले ही दो बार यह परीक्षा दे चुकी थी और इस बार उसे अपने चयन को लेकर गहरा संदेह था।
पुलिस के मुताबिक, उसने अपने रिश्तेदारों को एक भावुक संदेश भेजकर कहा था कि उसे “फिर से परीक्षा देने में डर लग रहा है।” 17 जून को उसने आत्महत्या कर ली और मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। इस राज्य में नीट को लंबे समय से एक संरचनात्मक रूप से भेदभावपूर्ण परीक्षा माना जाता रहा है, और इस दुखद मौत ने इसे खत्म करने की मांग को एक बार फिर से तेज कर दिया है।
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की एक 18 वर्षीय छात्रा ने अपने माता-पिता के नाम लिखे एक पत्र में अपने टूटते विश्वास का जिक्र किया। नागपुर में रसोइये का काम करने वाले उसके पिता ने उसकी पढ़ाई के लिए 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था।
नागपुर के एक कोचिंग संस्थान में कई सालों की तैयारी के बाद इस मई में उसने पहली बार नीट की परीक्षा दी थी। जब उसे लगा कि उसका पेपर अच्छा हुआ है, तो कुछ ही दिनों बाद आई री-टेस्ट की खबर ने उसकी सारी हिम्मत तोड़ दी। 20 मई को उसने आत्महत्या कर ली। उसने अपने खत में लिखा, “मम्मी-पापा, आपको विश्वास था कि आपकी बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब मुझमें दोबारा नीट परीक्षा देने का साहस नहीं बचा है।”
ऐसी ही दहशत का शिकार इंदौर की एक 19 वर्षीय छात्रा भी हुई। एक सरकारी डॉक्टर की यह बेटी पिछले कुछ समय से बेहद शांत रहने लगी थी और बहुत कम बोलती थी। 18 जून की रात वह एक रिहायशी इमारत की ऊपरी मंजिल से गिर गई और अगले दिन उसकी मौत हो गई। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
जांचकर्ताओं ने बताया कि छत की तरफ जाने से कुछ देर पहले वह फोन पर बात कर रही थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह हादसा था या इसका संबंध किन्हीं अन्य परिस्थितियों से था।
उत्तर प्रदेश में री-टेस्ट की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही थी, एक 17 वर्षीय छात्रा अपने माता-पिता से लगातार कह रही थी कि वह पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही है। बाज़ार खाला के स्टेशन हाउस ऑफिसर ब्रजेश सिंह ने बताया कि लड़की के पिता रेलवे अधिकारी हैं।
उनका कहना था कि उनकी बेटी ने उन्हें बताया था कि उसकी पिछली नीट परीक्षा बहुत अच्छी गई थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद से वह गहरे अवसाद में थी। बुधवार तड़के उसका शव मिला और पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ।
लखीमपुर खीरी का एक 21 वर्षीय युवक 3 मई की परीक्षा को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त था। यह उसका तीसरा प्रयास था और उसने लखनऊ में चार साल तक कड़ी तैयारी की थी। उस पर सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की बड़ी उम्मीदें टिकी थीं। 14 मई को वह अपने कमरे में फांसी पर लटका मिला।
हालांकि परिवार ने इस मौत को नीट परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता से जोड़ा है, लेकिन पुलिस को शक है कि इस घटना में व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़े कुछ मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
नई दिल्ली के आजादपुर स्थित लाल बाग की रहने वाली 20 वर्षीय छात्रा ने तीसरी बार परीक्षा देने के बाद अपने परिवार से कहा था कि “बस अब हो गया।” वह इस बार अपने चयन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी कि उसका एडमिशन हो जाएगा।
लेकिन 12 मई को परीक्षा रद्द हो गई। इसके दो दिन बाद, 14 मई को वह अपने कमरे में फंदे से लटकी मिली। उसकी चाची ने बताया कि पिछले साल वह सिर्फ चार नंबरों से चूक गई थी और उसके पिता ने अपनी सारी उम्मीदें उसी पर टिका रखी थीं।
महाराष्ट्र के लातूर की रहने वाली एक 18 वर्षीय लड़की जब से समझदार हुई थी, तब से डॉक्टर बनना चाहती थी। 25 मई को गोंदेगांव गांव में वह मृत पाई गई। उसके पिता का सीधा आरोप है कि 3 मई की परीक्षा रद्द होने के बाद से ही वह भारी तनाव से गुजर रही थी। पिता ने बताया कि उसने परीक्षा में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था और पेपर रद्द होने की उस एक खबर ने उसे अंदर तक झकझोर कर रख दिया था।
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