अडानी ग्रुप हवाई यात्रियों को बड़ी राहत देने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अपने एयरपोर्ट्स पर लगने वाले रेगुलेटरी चार्ज (एरोनॉटिकल शुल्क) को घटाकर न्यूनतम स्तर या सिंगल डिजिट तक लाना है।
अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग लिमिटेड (AAHL) के सीईओ अरुण बंसल ने मुंबई में आयोजित 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 में इस महात्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कंपनी नॉन-एरोनॉटिकल और सिटी-साइड डेवलपमेंट बिजनेस को इतनी तेजी से बढ़ाना चाहती है कि रेगुलेटेड रेवेन्यू बेस प्रभावी रूप से शून्य हो जाए।
आमतौर पर एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल के लिए एयरलाइंस और यात्रियों से एरोनॉटिकल चार्ज वसूले जाते हैं। वहीं, नॉन-एरोनॉटिकल कमाई एयरपोर्ट पर रिटेल, लीजिंग और अन्य कमर्शियल सेवाओं से होती है। बंसल ने स्पष्ट किया कि रेगुलेटेड बिजनेस उनके कुल कारोबार का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा है, और उनका मुख्य फोकस यात्रियों के लिए इन शुल्कों को बेहद कम करने पर है।
लागत कम करने के साथ ही अडानी ग्रुप ने हाल ही में शुरू हुए नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए भी बड़े विजन की रूपरेखा तैयार की है। इस एयरपोर्ट की प्लानिंग और निर्माण इसी महत्वाकांक्षा के साथ किया गया है कि इसे भारत का एक प्रमुख इंटरनेशनल हब बनाया जा सके।
बंसल के मुताबिक, जिस दिन कोई भी भारतीय एयरलाइन भारत से अमेरिका या यूरोप के लिए सीधी उड़ान शुरू करेगी, नवी मुंबई एयरपोर्ट एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हब में तब्दील हो जाएगा। उन्होंने सिंगापुर, दुबई और कतर का उदाहरण देते हुए कहा कि मजबूत इंटरनेशनल एयरलाइंस के दम पर ही ये शहर ग्लोबल हब बने हैं।
इंडिगो और एयर इंडिया द्वारा दिए गए 1800 विमानों के ऑर्डर का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि 2032 तक इन विमानों की डिलीवरी होने के बाद भारत में ग्लोबल हब बनने की पूरी क्षमता है। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट ने भी भारतीय नियामकों की आंखें खोल दी हैं।
मध्य पूर्व के हब पर भारत की अत्यधिक निर्भरता के कारण संकट के समय यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है, जिसे देखते हुए भारत को अपना खुद का ग्लोबल हब बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में बंसल ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 (T1) को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि T1 को गिराने का काम अब टाला नहीं जा सकता है और इस पुनर्विकास प्रक्रिया के दौरान यहां की करीब 50 लाख यात्री क्षमता को दूसरी जगह शिफ्ट करना होगा।
अडानी ग्रुप ने इस साल अगस्त में ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सूचित कर दिया था कि टर्मिनल 1 के एक हिस्से को गिराने का काम 15 जनवरी 2027 से शुरू होगा। इसके मद्देनजर एयर ट्रैफिक को टर्मिनल 2 और नवी मुंबई एयरपोर्ट पर री-डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है।
हालांकि, बंसल ने यह भी साफ किया कि वे किसी भी एयरलाइन को नवी मुंबई या अहमदाबाद से संचालन के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन सभी एयरलाइंस को अपनी उड़ानों की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
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