भारतीय उपभोक्ताओं को इस हफ्ते महंगाई का दोहरा झटका लगा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले करीब चार साल से लगभग स्थिर चल रही दरों के बाद महज पांच दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा इजाफा है।
इससे पहले बीते शुक्रवार यानी 15 मई को ईंधन की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसने लंबे समय से जारी मूल्य स्थिरता को खत्म कर दिया था। उस संशोधन के बाद दिल्ली में पेट्रोल के दाम 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए थे।
मंगलवार को हुए ताजा बदलाव के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे की और बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अब यह 98.64 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं।
गुजरात के शहरों की बात करें तो राजधानी गांधीनगर में अब पेट्रोल की कीमत 98.56 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94.40 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके साथ ही अहमदाबाद में पेट्रोल 98.33 रुपये और डीजल 94.10 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
| City | Petrol Price (per litre) | Increase | Diesel Price (per litre) | Increase |
| Delhi | ₹98.64 | 87 paise | ₹91.58 | 91 paise |
| Mumbai | ₹107.59 | 91 paise | ₹94.08 | 94 paise |
| Kolkata | ₹109.70 | 96 paise | ₹96.07 | 94 paise |
| Chennai | ₹104.49 | 82 paise | ₹96.11 | 86 paise |
स्थानीय करों (लोकल टैक्स) में अंतर के कारण देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में कीमतों में थोड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इस कर ढांचे की वजह से देश के प्रमुख महानगरों में से कोलकाता में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में आ रहे इस बड़े उछाल की मुख्य वजह अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ लगातार बढ़ता संघर्ष है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। खाड़ी क्षेत्र में हुए सैन्य हमलों के कारण तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद किए जाने से दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग पर संकट खड़ा हो गया है।
सरकार की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, कीमतों में इस बढ़ोतरी के बावजूद तेल कंपनियां हर दिन लगभग 750 करोड़ रुपये का भारी घाटा झेल रही हैं। शुक्रवार को हुई मूल्य वृद्धि से पहले यह दैनिक नुकसान करीब 1,000 करोड़ रुपये के चौंकाने वाले आंकड़े पर बना हुआ था।
एक तरफ जहां ईंधन के दाम बढ़े, वहीं दूसरी तरफ देश के वित्तीय बाजारों ने मंगलवार को सतर्कता के साथ मजबूती दिखाई। बीएसई (BSE) सेंसेक्स 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,671.07 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 0.12 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की।
इसके बावजूद, इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ने के कारण ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र पर दबाव साफ दिख रहा है। बाजार में जहां ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स (+13.95%) और सीमेक (+13.28%) जैसी विशिष्ट कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल आया, वहीं टीडी पावर सिस्टम्स (-5.94%) और एस्ट्रल (-6.4%) जैसी बुनियादी औद्योगिक कंपनियों को निवेशकों की भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम पर पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें दोगुनी होने के कारण तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए यह लगातार बढ़ोतरी एक आवश्यक कदम है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार खाड़ी क्षेत्र के हालातों पर लगातार और बेहद करीब से नजर रख रही है।
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