आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में फतह हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कमर कस ली है। गुरुवार को पार्टी ने अपने प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची जारी कर दी, जिससे कई दिनों से चल रही अटकलों पर अंततः विराम लग गया। इस अहम सूची में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह और समाजवादी पार्टी की ‘बागी’ विधायक पूजा पाल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। इन दोनों नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पार्टी की नई टीम में कुल 19 उपाध्यक्ष, आठ महासचिव और 19 सचिव बनाए गए हैं, जिनके कंधों पर अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनाव की जिम्मेदारी होगी। यह नई कार्यकारिणी पिछले साल दिसंबर में यूपी बीजेपी प्रमुख का पद संभालने वाले केंद्रीय मंत्री और सांसद पंकज चौधरी के नेतृत्व में काम करेगी। इस बार सदस्यों की कुल संख्या बढ़ाकर 48 कर दी गई है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष चौधरी और राज्य महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह भी शामिल हैं। वहीं, पिछली कमेटी में कुल 43 सदस्य थे, जिनमें 18 उपाध्यक्ष, सात महासचिव और 16 सचिव शामिल थे।
उपाध्यक्षों की बात करें तो पार्टी ने पुरानी टीम से केवल ब्रज बहादुर, मोहित बेनीवाल, धर्मेंद्र सिंह और देवेश कुमार कोरी पर ही अपना भरोसा कायम रखा है। नए चेहरों में नीरज सिंह और पूजा पाल के अलावा पूर्व मंत्री सुरेश राणा का नाम भी प्रमुख है। सुरेश राणा 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी थाना भवन सीट राष्ट्रीय लोक दल के अशरफ अली खान से हार गए थे।
संगठन में नीरज सिंह ने अपने बड़े भाई और नोएडा से विधायक पंकज सिंह की जगह ली है। नीरज पिछले 24 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं और विशेष रूप से अपने पिता के लोकसभा क्षेत्र लखनऊ में अपने सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। दूसरी तरफ, सपा विधायक पूजा पाल की नियुक्ति ने राजनीतिक गलियारों में काफी उत्सुकता पैदा कर दी है। विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार वह अभी भी समाजवादी पार्टी की ही सदस्य हैं।
महासचिव पद पर सिर्फ राम प्रताप सिंह चौहान और संजय राय को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा प्रियंका सिंह रावत को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि प्रदेश सचिव रहे अभिजात मिश्रा को प्रमोट कर राज्य महासचिव की कुर्सी सौंपी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले बुलंदशहर के अंकुर शर्मा को भी 16 सचिवों की सूची में जगह मिली है। पेशे से इंजीनियर अंकुर बीजेपी का दामन थामने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम कर चुके हैं।
बीजेपी ने अपनी इस नई टीम के जरिए यूपी में जातीय समीकरणों को भी बारीकी से साधने की कोशिश की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 62 से गिरकर 33 हो गई थीं, जिसकी एक बड़ी वजह सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव को माना गया।
इसका कड़ा जवाब देते हुए बीजेपी ने 46 नए पदाधिकारियों में से 20 पद चुनावी रूप से अहम ओबीसी समुदाय को दिए हैं। इनमें आठ उपाध्यक्ष, चार महासचिव और आठ सचिव शामिल हैं। इसी तरह छह पदाधिकारी एससी वर्ग से बनाए गए हैं, जिनमें दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव और तीन सचिव हैं। इस तरह राज्य इकाई के 58 फीसदी से ज्यादा पदों पर ओबीसी और एससी वर्ग का दबदबा है।
इसके बावजूद, पार्टी ने अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक को भी साधने का पूरा प्रयास किया है। कुल 46 नए पदाधिकारियों में से सात ब्राह्मण, छह ठाकुर और सात वैश्य, भूमिहार तथा कायस्थ समुदाय से आते हैं। इस तरह यूपी टीम में सवर्ण जातियों की हिस्सेदारी लगभग 42 फीसदी है।
यह संतुलन ऐसे समय में बनाया गया है जब उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए यूजीसी के नियमों को लेकर पार्टी को सवर्ण और दक्षिणपंथी समूहों की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा था।
पार्टी ने राज्य के सभी छह क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी पूरी तरह बदल दिए हैं और इनमें से चार अध्यक्ष ओबीसी समुदाय से बनाए गए हैं। पश्चिमी यूपी की कमान नवाब सिंह नागर, ब्रज क्षेत्र की पूरन लाल लोधी, कानपुर-बुंदेलखंड की राम किशोर साहू और काशी की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया को दी गई है। वहीं, अवध क्षेत्र का नेतृत्व ब्राह्मण समुदाय के अवधेश द्विवेदी और गोरखपुर क्षेत्र की कमान भूमिहार समुदाय के विनोद राय करेंगे।
मोर्चों के नेतृत्व में भी बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी प्रांशु दत्त द्विवेदी से लेकर रोहित मिश्रा को सौंप दी गई है। ओबीसी मोर्चा में नरेंद्र कश्यप की जगह प्रकाश पाल और एससी मोर्चा में राम चंद्र कन्नौजिया की जगह अशोक रावत लेंगे। वहीं, एसटी मोर्चा का अध्यक्ष संजय गोंड की जगह विद्या भूषण गोंड को बनाया गया है।
महिला मोर्चा की जिम्मेदारी गीता शाक्य की जगह अब सरोज कुशवाहा संभालेंगी, जबकि गीता को प्रमोट करके प्रदेश महासचिव बनाया गया है। किसान मोर्चा के प्रमुख पद पर भी फेरबदल हुआ है और अब कामेश्वर सिंह की जगह देवेंद्र सिंह इसके अध्यक्ष होंगे। कामेश्वर सिंह को अब पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
अल्पसंख्यक मोर्चा के मामले में कोई बदलाव नहीं हुआ है और बासित अली इसके प्रमुख बने रहेंगे। इसी तरह, पिछले लगभग एक दशक से पार्टी का मीडिया एवं प्रचार विभाग संभाल रहे मनीष दीक्षित को भी उनके पद पर बरकरार रखा गया है।
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