गुजरात के वडोदरा में एक दर्दनाक हादसे के पूरे 12 साल बाद एक छात्रा को बड़ी कानूनी जीत मिली है। कंज्यूमर कमीशन ने अजवा स्थित एक अम्यूजमेंट कंपनी को आदेश दिया है कि वह जॉयराइड से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने वाली छात्रा को इलाज और अन्य नुकसान के एवज में 20 लाख रुपये का मुआवजा दे।
यह खौफनाक घटना सितंबर 2014 की है। शहर की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की पढ़ाई करने वाली जाह्नवी पारिख अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ अजवा फन वर्ल्ड घूमने गई थीं।
वहां उन्होंने टिकट खरीदा और ब्रेक-डांस राइड पर बैठ गईं। लेकिन बीच हवा में झूला चलते वक्त अचानक उसका सेफ्टी लॉक खुल गया और जाह्नवी अपनी सीट से छिटककर जोरदार तरीके से नीचे आ गिरीं।
इस भयानक हादसे में जाह्नवी की रीढ़ की हड्डी, सिर और पैरों में गंभीर चोटें आईं, जबकि उनके दोनों हाथों की हड्डियां टूट गईं। उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह एक महीने से ज्यादा समय तक रहीं और उनके परिवार को इलाज पर करीब 12 लाख रुपये खर्च करने पड़े।
दुर्घटना का उनके जीवन पर बहुत गहरा और स्थायी असर पड़ा। वह अपनी इंटरनल परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं और उनके शरीर में हमेशा के लिए शारीरिक विकलांगता आ गई। हादसे के बाद फन वर्ल्ड कंपनी ने मेडिकल इंश्योरेंस के तौर पर महज 2 लाख रुपये का भुगतान कर पल्ला झाड़ लिया था।
इंसाफ के लिए हलोल-गोधरा रोड की रहने वाली जाह्नवी ने जून 2015 में वडोदरा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (अतिरिक्त) का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने फन वर्ल्ड मैनेजमेंट और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कराते हुए 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। इससे पहले उन्होंने वाघोडिया पुलिस स्टेशन में भी घटना की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
सुनवाई के दौरान फन वर्ल्ड मैनेजमेंट ने अपनी सफाई में कहा कि सभी जॉयराइड्स का नियमित रूप से मेंटेनेंस किया जाता है और उनमें लॉक सिस्टम मौजूद है। उन्होंने उल्टे छात्रा पर आरोप लगाया कि उसने निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसकी वजह से वह ब्रेक-डांस राइड से गिरी। कंपनी ने यहां तक दावा किया कि चोटें मामूली थीं और उनके स्टाफ ने तुरंत मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई थी।
दूसरी ओर, ओरिएंटल इंश्योरेंस ने दलील दी कि उनका शिकायतकर्ता के साथ कोई सीधा अनुबंध नहीं है, इसलिए वह उनकी ग्राहक की श्रेणी में नहीं आती हैं। इसके जवाब में जाह्नवी ने कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह पहले भी कई बार जॉयराइड्स का हिस्सा रही हैं और पैराग्लाइडिंग जैसे एडवेंचर भी कर चुकी हैं, इसलिए उनकी तरफ से ऐसी लापरवाही का कोई सवाल ही नहीं उठता।
सभी पक्षों को गहराई से सुनने के बाद कंज्यूमर कमीशन ने माना कि एक पढ़ी-लिखी और समझदार छात्रा कभी भी चलते झूले के बीच में सेफ्टी लॉक खोलने की जानलेवा गलती नहीं करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फन वर्ल्ड मैनेजमेंट की ओर से जॉयराइड के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई और सेफ्टी लॉक ठीक से बंद न होने के कारण ही यह भीषण हादसा हुआ।
इसी निष्कर्ष के आधार पर आयोग ने फन वर्ल्ड मैनेजमेंट और इंश्योरेंस कंपनी, दोनों को संयुक्त रूप से 20 लाख रुपये का भुगतान करने का ऐतिहासिक आदेश दिया।
यह राशि उनके इलाज, स्थायी विकलांगता, शादी में आने वाली अड़चनों, पढ़ाई के नुकसान, भविष्य की आय में कमी, विशेष खान-पान और यातायात खर्च के एवज में दी जाएगी।
इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के लिए दोनों विरोधियों को 50-50 हजार रुपये अलग से देने का भी सख्त निर्देश दिया गया है।
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