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दुबई के वित्तीय केंद्र में धमाके के बाद हिली इमारतें, क्षेत्र में छाया धुएं का गुबार

| Updated: March 13, 2026 14:01

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब यूएई तक; दुबई के वित्तीय केंद्र में धमाकों से दहशत, कई विदेशी कंपनियों ने खाली किए दफ्तर।

दुबई के वित्तीय केंद्र डीआईएफसी (DIFC) के ऊपर धुएं का एक बड़ा गुबार देखा गया है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन मध्य दुबई में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में धुआं उठता हुआ देखा गया, जिसके बाद आसपास की इमारतें तक हिल गईं।

अधिकारियों ने बाद में इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक हवाई हमले को सफलतापूर्वक बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया था। इसके मलबे से मध्य दुबई की एक इमारत के बाहरी हिस्से को मामूली नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिसे नष्ट किया गया वह मिसाइल थी या ड्रोन।

इससे पहले गुरुवार को, क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के लगातार हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 10 बैलिस्टिक मिसाइलों और 26 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया था। इस दौरान दुबई के अल बदा क्षेत्र में और शेख जायद रोड पर एक इमारत के हिस्से पर भी ड्रोन का मलबा गिरा था।

इस बीच, शुक्रवार तड़के बहरीन में भी हवाई हमले के सायरन बजने लगे। यह घटना बहरीन हवाई अड्डे के पास ईंधन टैंकों पर ईरान के ड्रोन हमलों के बाद लगी भीषण आग के कुछ ही घंटों बाद हुई।

पूरे बहरीन में सायरन बजने के बाद, वहां के गृह मंत्रालय ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने और शांत रहने की अपील की। यह सब इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को अब लगभग दो सप्ताह हो चुके हैं।

लेबनान की स्थिति को लेकर कतर ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में हुए इजरायली हवाई हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें पांच बच्चों सहित 15 लोगों की मौत हो गई। गुरुवार को दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर हुए इजरायली हमले में नौ लोग मारे गए थे, जबकि दो अन्य शहरों पर हुए अलग-अलग हमलों में छह अन्य लोगों की जान चली गई।

कतर के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वे दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करते हैं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का खुला उल्लंघन मानते हैं।

ईरान के हमलों के डर से, कई कंपनियों ने दुबई के वित्तीय जिले में स्थित अपने कार्यालयों को खाली करना शुरू कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट तौर पर अमेरिका और इजरायल से जुड़े आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकी दी है।

बुधवार को अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज सिटी (Citi), डेलॉयट (Deloitte) और पीडब्ल्यूसी (PwC) जैसी बड़ी कंपनियों ने दुबई के वित्तीय जिले में अपने कार्यालय बंद कर दिए या कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा।

इसके साथ ही, ब्लूमबर्ग ने दुबई और खाड़ी क्षेत्र में अपने कर्मचारियों को अस्थायी रूप से क्षेत्र से बाहर जाने और रिमोट से काम करने की अनुमति दे दी है। जे.पी. मॉर्गन ने गुरुवार को आगाह किया कि प्रमुख यूरोपीय बैंकों में से एचएसबीसी (HSBC) और स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) मध्य पूर्व के इस संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उनकी कमाई पर भारी दबाव पड़ सकता है।

इस युद्ध ने लौवर अबू धाबी (Louvre Abu Dhabi) में फ्रांस से ऋण पर ली गई उत्कृष्ट कलाकृतियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो इस प्रसिद्ध संग्रहालय की एकमात्र विदेशी शाखा है।

यूएनएचसीआर (UNHCR) के अनुसार, ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण अब तक लगभग 32 लाख (3.2 मिलियन) ईरानियों का अस्थायी विस्थापन हुआ है। संस्था का कहना है कि इनमें से ज्यादातर लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में तेहरान और अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों से देश के उत्तरी हिस्सों तथा ग्रामीण इलाकों की ओर भाग रहे हैं। संघर्ष तेज होने के साथ यह संख्या और बढ़ने की पूरी संभावना है।

दूसरी ओर, चीन ने शुक्रवार को बताया कि मध्य पूर्व के लिए उसके विशेष दूत झाऊ झुन बहरीन में हैं, जहां उन्होंने बहरीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस युद्ध की आर्थिक कीमत भी बहुत बड़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका ने 11 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर दिए हैं और वास्तविक लागत इससे कहीं अधिक हो सकती है।

युद्ध शुरू हुए अब 12 दिन हो चुके हैं, और ट्रम्प तथा ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की बयानबाजी को देखते हुए, यह युद्ध जल्द समाप्त होता नहीं दिख रहा है। व्हाइट हाउस जल्द ही युद्ध के लिए अतिरिक्त धन जुटाने के वास्ते कांग्रेस के सामने एक नया अनुरोध प्रस्तुत करने वाला है।

कुछ अधिकारियों का अनुमान है कि यह मांग 50 अरब डॉलर की हो सकती है, जबकि कुछ अन्य मानते हैं कि यह आंकड़ा भी बहुत कम है।

अब यह समझना जरूरी है कि ईरान दुबई पर हमले क्यों कर रहा है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद यूएई का दुबई और खाड़ी क्षेत्र के कई हिस्से ईरानी हमलों की चपेट में आ गए हैं।

इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के मारे जाने के बाद, ईरान ने इसका कड़ा जवाब देने की कसम खाई थी।

इसके बाद ईरान ने इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिनमें दुबई, अबू धाबी, ओमान, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत शामिल हैं।

कुछ दिन पहले ही ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी वित्तीय प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात कही थी, जिसके बाद स्टैनचार्ट (StanChart) जैसे कई संगठनों ने अपने दुबई कार्यालयों को खाली कर दिया और एचएसबीसी (HSBC) ने कतर में अपनी शाखाएं बंद कर दीं।

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