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रिलायंस फाउंडेशन और सी-डैक ने ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘ई-सेफहर’ (e-safeHer) किया लॉन्च

| Updated: April 14, 2026 13:11

10 लाख ग्रामीण महिलाओं को 'साइबर सखी' बनाने के लिए रिलायंस फाउंडेशन और सी-डैक की खास पहल, डिजिटल दुनिया में मिलेगी पूरी सुरक्षा

नई दिल्ली: रिलायंस फाउंडेशन और भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली संस्था सी-डैक, हैदराबाद ने ग्रामीण भारत में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘ई-सेफहर’ (e-safeHer) कार्यक्रम की शुरुआत की है।

कल घोषित किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत की 10 लाख महिलाओं को डिजिटल इकोसिस्टम में सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ भाग लेने में सक्षम बनाना है।

यह पहल MeitY के सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (ISEA) कार्यक्रम के तहत सी-डैक, हैदराबाद द्वारा संचालित है। सी-डैक इस प्रशिक्षण के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराएगा। वहीं, रिलायंस फाउंडेशन महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से देश भर के ग्रामीण समुदायों में इस प्रशिक्षण के प्रसार को गति देगा।

इसका लक्ष्य विशेष रूप से उन महिलाओं तक साइबर सुरक्षा जागरूकता पहुंचाना है, जो वित्तीय लेनदेन, आजीविका और आवश्यक सेवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का तेजी से उपयोग कर रही हैं।

इस साझेदारी के लॉन्च पर MeitY के सचिव एस. कृष्णन (IAS) ने कहा कि भारत सरकार एक ‘साइबर सुरक्षित भारत’ बनाने के लिए देश के हर कोने तक पहुंचने, सहयोग और लचीलेपन पर जोर दे रही है।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से ISEA के पाठ्यक्रम और ज्ञान को एक मंच पर लाया जाएगा। सी-डैक और रिलायंस फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से यह पहल दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सुरक्षित, सक्रिय और सशक्त बनाएगी।

रिलायंस फाउंडेशन की निदेशक ईशा अंबानी ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत में ग्रामीण महिलाएं पहले की तुलना में तेजी से ऑनलाइन आ रही हैं। फाउंडेशन न केवल महिलाओं के डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए अगले तीन वर्षों में ग्रामीण भारत में 10 लाख ‘साइबर सखियों’ को सशक्त बनाने का लक्ष्य है, जो उन्हें सुरक्षित ऑनलाइन तरीके अपनाने और आत्मविश्वास के साथ डिजिटल दुनिया से जुड़ने में मदद करेगा।

सी-डैक द्वारा ISEA प्रोजेक्ट के तहत साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण सामग्री के विकास और विभिन्न भाषाओं में इसके स्थानीयकरण का नेतृत्व किया जाएगा। इसके बाद रिलायंस फाउंडेशन अपनी जमीनी पहुंच और महिला सशक्तिकरण प्लेटफॉर्म का उपयोग करके स्थानीय नेतृत्व और समुदाय आधारित मॉडल के माध्यम से यह प्रशिक्षण ग्रामीण स्तर तक पहुंचाएगा।

इस पहल की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से मध्य प्रदेश और ओडिशा में साइबर सखियों के प्रशिक्षण के साथ की जाएगी। विभिन्न भागीदारों के सहयोग से इस कार्यक्रम को 2029 तक 10 लाख महिलाओं तक ले जाया जाएगा।

अलग से नया ढांचा बनाने के बजाय, इसे मौजूदा महिला सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के साथ ही जोड़ा गया है। इसमें स्थानीय भाषा की सामग्री, ऑडियो-विजुअल मॉड्यूल और मिश्रित शिक्षण विधियों का उपयोग किया जाएगा।

रिलायंस फाउंडेशन महिलाओं में नेतृत्व क्षमता निर्माण, उद्यमिता, डिजिटल साक्षरता, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी विभिन्न पहलों के जरिए उन्हें सशक्त बनाने के लिए काम कर रहा है। ‘ई-सेफहर’ इसी कड़ी में महिलाओं को एक डिजिटल सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

यह पहल MeitY के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचे, सी-डैक की तकनीकी विशेषज्ञता और रिलायंस फाउंडेशन के जमीनी मॉडल का एक मजबूत संयोजन है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि ग्रामीण महिलाएं केवल डिजिटल रूप से जुड़ें ही नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी रहें।

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