26 साल की उम्र में, जब ज्यादातर प्रतिस्पर्धी निशानेबाज सालों की कड़ी ट्रेनिंग ले चुके होते हैं, तब फातिन नईम तिरमिज़ी कुछ बेहद अलग कर रहे हैं। उन्होंने एक दशक की लंबी सीखने की प्रक्रिया को महज एक साल से कुछ अधिक समय में समेट दिया है।
ट्रैप शूटिंग जैसी अत्यधिक विशिष्ट दुनिया में सटीकता, शानदार रिफ्लेक्स और मानसिक अनुशासन ही सफलता तय करते हैं। इस खेल में साल 2025 के एक नौसिखिए से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतने तक का उनका सफर हैरान करने वाला है।
खेल की दुनिया में अप्रत्याशित कदम
निशानेबाजी की दुनिया में तिरमिज़ी की एंट्री पूरी तरह से अप्रत्याशित थी। पिता और भाई के साथ उन्होंने इस खेल को केवल एक शौक के तौर पर शुरू किया था।
लेकिन असली मोड़ तब आया जब उनके भाई ने उन्हें इसे गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया और पेशेवर ट्रेनिंग की ओर धकेला। देर से शुरुआत करने का मतलब था कि उन्हें एक ही समय में तकनीक, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी स्वभाव विकसित करना था। ये ऐसी चीजें हैं जिन्हें सीखने में एथलीट्स को कई साल लग जाते हैं, लेकिन फातिन ने खुद को बहुत तेजी से ढाला।
तकनीक और टाइमिंग पर फोकस
‘क्राउन शूटिंग रेंज’ में ट्रेनिंग के दौरान तिरमिज़ी ने खुद को ट्रैप शूटिंग की तकनीकी बारीकियों में पूरी तरह से झोंक दिया। इस खेल में अप्रत्याशित क्ले टारगेट्स पर नजर रखना, पलक झपकते ही प्रतिक्रिया देना और कई राउंड्स तक निरंतरता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
शुरुआती दौर में उन्हें टाइमिंग की गलतियों और निरंतरता की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, अपनी गलतियों को तुरंत सुधारने की क्षमता ने कुछ ही महीनों के भीतर उनके शूटिंग रिदम को स्थिर करने में काफी मदद की।
शुरुआती सफलता और राज्य स्तर पर दबदबा
उनके करियर की पहली बड़ी सफलता अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप 2025 में मिली, जहां उन्होंने कई पदक अपने नाम किए। अपने सफर की इतनी जल्दी यह मुकाम हासिल करना केवल एक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उनकी प्रतिस्पर्धी प्रवृत्ति का भी स्पष्ट संकेत था। यहीं से एक नए दौर की शुरुआत हुई, जहां वह प्रतियोगिताओं में केवल हिस्सा नहीं ले रहे थे, बल्कि एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे थे।
गुजरात स्टेट चैंपियनशिप 2025 में तिरमिज़ी ने खुद को एक गंभीर प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित किया। ट्रैप और डबल ट्रैप दोनों में भाग लेते हुए, उन्होंने कई पोडियम फिनिश हासिल किए। इस प्रदर्शन ने अलग-अलग फॉर्मेट्स में खुद को ढालने और लंबे राउंड तक बेहतरीन खेल बनाए रखने की उनकी क्षमता को साबित किया।
पेराज़ी इंडिया कप 2025 की ऐतिहासिक जीत
उनके लिए सबसे अहम पल पेराज़ी इंडिया कप में आया, जहां उन्होंने फाइनल में शानदार 25/25 का स्कोर कर चैंपियनशिप अपने नाम कर ली।
वह इस टूर्नामेंट के पहले विजेता बने और उन्हें प्रतिष्ठित ‘पेराज़ी हाईटेक शॉटगन’ से नवाजा गया। इस प्रदर्शन ने न केवल उनकी तकनीकी सटीकता को दिखाया, बल्कि दबाव में उनके धैर्य को भी साबित किया, जो एलीट शूटिंग में एक बेहद महत्वपूर्ण गुण है।
राष्ट्रीय स्तर की ओर बढ़ते कदम
इस शानदार जीत के बाद भी तिरमिज़ी का जलवा कायम रहा। उन्होंने भोपाल में वेस्ट ज़ोन चैंपियनशिप में 42/50 का मजबूत स्कोर बनाया। इसके बाद पटियाला में इंडिया ओपन चैंपियनशिप 2025 (एक प्रमुख प्री-नेशनल इवेंट) में उन्होंने कांस्य पदक जीता। इन शानदार प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उनका क्वालिफिकेशन पक्का कर दिया।
साल 2025 के अंत तक, तिरमिज़ी ने इंडियन नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप (1 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026) में भाग लिया। यहां उन्होंने इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (ISSF) के ढांचे के तहत एक आईएसएसएफ-कैटेगरी के शूटर के रूप में पहचान हासिल की। यह राज्य स्तरीय खिलाड़ी से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एथलीट बनने की दिशा में उनका सबसे बड़ा कदम था।
2026: सटीकता और निरंतरता का नया मुकाम
साल 2026 में भी तिरमिज़ी ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखा है। गांधीनगर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में उन्होंने डबल ट्रैप में स्वर्ण और ट्रैप में कांस्य पदक हासिल किया।
इसके बाद, गुजरात स्टेट चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने ट्रैप और डबल ट्रैप में दो रजत पदक अपनी झोली में डाले। खास बात यह रही कि वह इस प्रतियोगिता में परफेक्ट 25/25 का स्कोर दर्ज करने वाले एकमात्र निशानेबाज थे, जिसने सटीकता के लिए उनकी बढ़ती प्रतिष्ठा को और मजबूत किया।
ओलंपिक का लक्ष्य और भविष्य की राह
अब उनका तात्कालिक लक्ष्य भारतीय टीम के ट्रायल के लिए क्वालीफाई करना है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में एक अहम कदम है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है—ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना।
देर से शुरुआत करने के बावजूद तेजी से खुद को ढालना और निरंतरता बनाए रखना तिरमिज़ी की सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग फॉर्मेट में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता और दबाव में भी शांत रहने की खूबी उन्हें बाकी नए खिलाड़ियों से काफी अलग बनाती है।
भारतीय शूटिंग का इतिहास हमेशा से बेहतरीन एथलीट्स देने का रहा है, और ट्रैप शूटिंग को इसके सबसे चुनौतीपूर्ण विषयों में गिना जाता है। अगर फातिन नईम तिरमिज़ी इसी लय के साथ आगे बढ़ते रहे, तो वह जल्द ही एक उभरते हुए टैलेंट से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच के एक बड़े चेहरे के रूप में खुद को पूरी तरह स्थापित कर लेंगे।
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