गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन 722 उम्मीदवार बिना एक भी वोट पड़े अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं। इन सभी को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया है। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों का आरोप है कि उन्हें चुनावी मैदान से बाहर धकेला गया है। उनका दावा है कि उन पर दबाव डाला गया, उनके ही रिश्तेदारों द्वारा नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें नकदी व भविष्य में भाजपा के टिकट का लालच भी दिया गया।
राज्य चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों की 9,952 सीटों के लिए होने वाले इन चुनावों में अब तक 1,663 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस लिया है। गुरुवार रात आठ बजे तक चुनाव अधिकारी डेटा अपडेट कर रहे थे, इसलिए ये आंकड़े और भी बढ़ने की संभावना है। निर्विरोध घोषित की गई इन 722 सीटों में तीन ऐसी सीटें भी शामिल हैं जहां उपचुनाव होने हैं।
नगर पालिकाओं की स्थिति
सबसे अधिक निर्विरोध जीत नगर पालिकाओं से दर्ज की गई है। आगामी 26 अप्रैल को 84 नगर पालिकाओं की 2,624 सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों के लिए कुल 7,819 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें से 1,525 फॉर्म चुनाव आयोग द्वारा रद्द कर दिए गए। बचे हुए 6,294 वैध फॉर्म में से 468 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया। इसके परिणामस्वरूप 383 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं।
तालुका पंचायतों के आंकड़े
तालुका पंचायतों के मामले में नाम वापस लेने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही। राज्य की 260 तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों के लिए कुल 20,638 नामांकन प्राप्त हुए थे। इनमें से 5,700 फॉर्म राज्य चुनाव आयोग द्वारा रद्द कर दिए गए। शेष बचे 14,938 वैध नामांकनों में से 806 वापस ले लिए गए और 250 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इस छंटनी के बाद अब 13,882 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।
नगर निगमों का हाल
प्रदेश के 15 नगर निगमों में कुल 1,004 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन क्षेत्रों में 43 सीटें निर्विरोध गई हैं। निगमों के लिए भरे गए 3,321 वैध नामांकनों में से कुल 133 फॉर्म उम्मीदवारों द्वारा वापस ले लिए गए।
कांग्रेस का प्रलोभन और धमकी का आरोप
विपक्षी दल कांग्रेस और उसके कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेताओं, पुलिस, समुदाय के प्रभावशाली लोगों और यहां तक कि उम्मीदवारों के परिवार वालों ने भी उन पर नाम वापस लेने का अत्यधिक दबाव बनाया।
अहमदाबाद के नवा वाडज वार्ड की एक महिला कांग्रेस उम्मीदवार ने बताया कि नामांकन वापस लेने के लिए उन्हें मुंहमांगी रकम मांगने को कहा गया। उनके घर पर प्लास्टर कराने और अन्य सुविधाओं की पेशकश भी की गई।
उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह पार्टी से गद्दारी नहीं करेंगी क्योंकि उनके ससुर भी कांग्रेस में हैं और वह उम्मीद करती हैं कि उनका बेटा भी इसी पार्टी का हिस्सा बनेगा।
विराटनगर वार्ड की एक अन्य कांग्रेस उम्मीदवार ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने बताया कि उनके बिजनेस पार्टनर और अन्य रसूखदार संपर्कों ने फोन करके उन्हें चुनाव से हटने को कहा। बदले में उन्हें अगले कार्यकाल में भाजपा का टिकट देने का प्रलोभन दिया गया।
निकोल वार्ड के एक कांग्रेस पदाधिकारी ने दावा किया कि दबाव इतना ज्यादा था कि सुरक्षा के लिहाज से पार्टी को अपने चार उम्मीदवारों को अलग-अलग कार्यालयों में स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का हाथ होने का आरोप लगाया।
डरे हुए उम्मीदवार और कांग्रेस का आंदोलन
उम्मीदवारों में इतना खौफ था कि उन्होंने नामांकन दाखिल करने से पहले पार्टी से अपने नाम सार्वजनिक न करने का अनुरोध किया था। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि भाजपा ने नाम वापसी के लिए पुलिस, धन बल, सामाजिक दबाव और ब्लैकमेलिंग का भरपूर इस्तेमाल किया है।
अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पहले ही अपने छह उम्मीदवार खो चुकी है। नामांकन के दिन पांच उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया और एक लापता हो गया। इस पूरे घटनाक्रम के खिलाफ अब कांग्रेस पूरे राज्य में ‘लोकशाही बचाओ आंदोलन’ नाम से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रही है।
भाजपा के चुनावी वादे
दूसरी तरफ, भाजपा ने अहमदाबाद के लिए कई बड़े चुनावी वादों की घोषणा की है। इनमें साबरमती रिवरफ्रंट का 11.5 किलोमीटर विस्तार करके इसे गांधीनगर के गिफ्ट सिटी तक ले जाना और अहमदाबाद को स्लम-मुक्त बनाना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, नगर निगम की भर्तियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और पारदर्शिता व रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सभी निगम परियोजनाओं की जियो-टैगिंग करने की बात कही गई है। पार्टी ने 17 नए पुलों के निर्माण, एआई-आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली, ग्रीन बसें और हरियाली बढ़ाने का भी वादा किया है।
घोषणापत्र में 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सालाना 3,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच व घर पर डायग्नोस्टिक सुविधा के साथ-साथ शहर के हर जोन में एक मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का भी संकल्प लिया गया है।
हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि भाजपा द्वारा घोषित इन प्रमुख परियोजनाओं में से अधिकांश को अहमदाबाद नगर निगम के 2026-27 के बजट में पहले ही शामिल किया जा चुका है।
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