अहमदाबाद: भारत में जेंडर समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए ‘मस्त बोल’ नामक एक नई युवा-नेतृत्व वाली सार्वजनिक पहल की शुरुआत की जा रही है। देश में जहां लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं और केवल 21.8 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल का हिस्सा हैं, वहीं यह पहल समाज की चुप्पी तोड़ने का एक मजबूत प्रयास है।
आंकड़ों के अनुसार, 99 प्रतिशत से अधिक लोगों के मन में कम से कम एक जेंडर पूर्वाग्रह मौजूद है, जिसे बदलने की सख्त आवश्यकता है।
‘मस्त बोल’ का मुख्य उद्देश्य लोगों, विशेषकर पुरुषों और लड़कों को निष्क्रिय दर्शक की भूमिका से निकालकर जेंडर-न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोगी बनाना है। इस अभियान का संचालन ‘कॉमम्यूटिनी – द यूथ कलेक्टिव’ द्वारा किया जा रहा है।
इसके साथ ही, चेंजलूम्स लीडरशिप यात्रा से जुड़े युवा सामाजिक उद्यमी इसे जमीनी स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं। यह पहल युवाओं को अपने समुदायों में नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाती है, ताकि जेंडर जस्टिस केवल नीतियों की चर्चा तक सीमित न रहकर आम जनजीवन का हिस्सा बन सके।
यह एक बहु-शहर (multi-city) सार्वजनिक पहल है, जो जेंडर मानदंडों, मर्दानगी और रोजमर्रा की असमानताओं पर संवाद और कार्रवाई को बढ़ावा देती है। जमीनी स्तर की गतिविधियों, सार्वजनिक सहभागिता और डिजिटल कहानी कहने के माध्यम से यह अभियान रोजमर्रा के स्थानों को संवाद के मंच में बदल रहा है।
इसका लक्ष्य सीधे तौर पर एक लाख से अधिक लोगों तक पहुंचना है, जबकि साझेदारियों और मीडिया के जरिए इसका प्रभाव करीब 10 लाख लोगों तक विस्तारित होगा।
अहमदाबाद में इस अभियान का मुख्य लॉन्च इवेंट 19 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे से जुहापुरा स्थित अंबर टावर्स के पास सी हाईस्कूल में आयोजित किया जाएगा। इस ऊर्जावान और सहभागितापूर्ण कार्यक्रम में युवा नेता, समुदाय और विभिन्न हितधारक मिलकर जेंडर मुद्दों पर संवाद करेंगे।
इवेंट के दौरान युवाओं द्वारा संचालित जेंडर एक्शन प्रोजेक्ट्स की प्रस्तुतियां दी जाएंगी और सहमति, जेंडर भूमिकाओं व शक्ति संबंधों पर इंटरएक्टिव इंस्टॉलेशन प्रदर्शित किए जाएंगे।
लॉन्च इवेंट में खुली चर्चा और कहानियां साझा करने के लिए विशेष मंच प्रदान किया जाएगा, जहां प्रतिभागी सामूहिक संकल्प (action pledges) भी लेंगे। पांच शहरों में आयोजित हो रहे इस लॉन्च इवेंट में 1000 से अधिक प्रतिभागियों के जुड़ने की उम्मीद है, जो जेंडर समानता के लिए एक मजबूत जन-आंदोलन की नींव रखेंगे।
टीम चेंजलूम्स का मानना है कि वास्तविक बदलाव की शुरुआत तब होती है जब लोग अपने घरों, समुदायों और सार्वजनिक स्थानों पर खुलकर बोलते हैं। संवाद, आत्म-चिंतन और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से यह अभियान व्यक्तिगत बदलाव से लेकर सामाजिक व्यवस्था में एक व्यापक परिवर्तन की लहर उत्पन्न करने का प्रयास है।
इस मुहिम को एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और समान समाज के निर्माण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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