सूरत जिले के कामरेज तालुका स्थित चोर्यासी गांव के लोगों ने हाल ही में एक ऐसा अनोखा कदम उठाया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। जब ग्रामीण मुख्य टोल प्लाजा की समस्या का कोई समाधान नहीं निकाल पाए, तो उन्होंने अपना खुद का एक ‘मिनी टोल बूथ’ ही खड़ा कर दिया।
यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (एनएच 48) के भरूच-सूरत मार्ग पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा के ठीक बगल का है। यहाँ से गुजरने वाले कई वाहन आधिकारिक टोल टैक्स से बचने के लिए चालाकी से गांव की अंदरूनी सड़कों का इस्तेमाल कर रहे थे। मुख्य टोल पर बसों और ट्रकों के लिए 420 रुपये तथा कारों के लिए 125 रुपये का शुल्क निर्धारित है।
शुरुआत में गांव वालों ने इस बात की शिकायत चोर्यासी टोल प्लाजा के अधिकारियों से की थी। उनका कहना था कि भारी वाहन भारी-भरकम टोल से बचने के लिए उनके गांव की सड़कों का उपयोग कर रहे हैं। जब राजमार्ग प्राधिकरण ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और कोई कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीणों ने खुद ही इसका एक नायाब समाधान खोज निकाला।
अपनी इस योजना के तहत गांव वालों ने शॉर्टकट लेने वाले वाहनों को रोककर उनसे 50 रुपये का एक समान शुल्क वसूलना शुरू कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया को आधिकारिक रूप देने के लिए बकायदा छपी हुई रसीदें भी दी जाने लगीं। इन रसीदों पर ‘ग्राम पंचायत चोर्यासी’ छपा हुआ था, जो इस पूरी व्यवस्था को एक सरकारी रूप दे रहा था।
यह कदम उठाने से पहले ग्राम पंचायत में बाकायदा एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें मुख्य टोल से बचने के लिए गांव की सड़कों का इस्तेमाल करने वाले वाहनों से पैसे वसूलने की बात कही गई थी।
चोर्यासी के सरपंच मुकेश पटेल ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कोई निजी नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से लिया गया फैसला था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर आगे की टिप्पणी बाद में की जाएगी।
हालांकि, गांव वालों की यह टोल वसूली ज्यादा दिन नहीं चल सकी। रविवार को कामरेज पुलिस ने इस वसूली अभियान पर ब्रेक लगा दिया और इसे पूरी तरह से अवैध करार दिया। पुलिस तब हरकत में आई जब इस देसी टोल प्लाजा के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।
पुलिस इंस्पेक्टर आर बी गोजिया ने इस मामले पर बताया कि उन्हें गांव के अंदर टोल वसूली की जानकारी मिली थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची और इस वसूली की अनुमति मांगी, तो ग्रामीणों ने पंचायत का प्रस्ताव दिखा दिया।
गोजिया के अनुसार, इस प्रस्ताव को जांच के लिए तालुका विकास अधिकारी के पास भेज दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस नियम के तहत यह टोल वसूला जा रहा था। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने किसी भी वाहन चालक से जबरन वसूली नहीं की है।
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