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आम आदमी पार्टी में बड़ी बगावत: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने थामा भाजपा का दामन

| Updated: April 24, 2026 16:35

आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका: राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ छोड़ी पार्टी, थामा भाजपा का दामन।

आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 का दिन एक बड़े राजनीतिक भूचाल का गवाह बना। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने छह अन्य साथी सांसदों के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की घोषणा के साथ ही इन सभी सात नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों ने भारत के संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए खुद का भाजपा में विलय करने का फैसला लिया है। इसी दौरान संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी छोड़ने की घोषणा की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने अपनी पुरानी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपना खून-पसीना देकर सींचा और अपनी जवानी के बहुमूल्य 15 साल दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि यह पार्टी अब राष्ट्र हित के बजाय केवल अपने निजी फायदों के लिए काम कर रही है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें लगातार यह महसूस हो रहा था कि वह एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। इसी घुटन के कारण उन्होंने आम आदमी पार्टी से दूरी बनाने और आम जनता के और अधिक करीब जाने का यह कड़ा फैसला लिया है।

चड्ढा ने बहुमत के आंकड़े समझाते हुए बताया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद हैं। इनमें से दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके इस फैसले में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार सुबह ही इन सभी बागी सदस्यों के हस्ताक्षर वाला आधिकारिक पत्र और आवश्यक दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंप दिए गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद तीन सांसदों के अलावा बाकी चार नामों का भी खुलासा किया गया। इन नेताओं में हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर यह बड़ा कदम उठाया है।

इस भारी उलटफेर के बाद आम आदमी पार्टी के खेमे में जबरदस्त हलचल मच गई है। पार्टी सांसद संजय सिंह ने इस बगावत पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा लगातार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के अच्छे कामों में रोड़े अटकाने का प्रयास कर रही है।

संजय सिंह ने पंजाब की जनता से अपील की है कि वे भाजपा में शामिल होने वाले इन सातों नेताओं के नाम हमेशा याद रखें, क्योंकि जनता इन्हें कभी नहीं भूलेगी।

इस पूरे विवाद की जड़ें इसी महीने की शुरुआत में हुए एक अहम फेरबदल से जुड़ी हैं। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाकर डिमोट कर दिया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जो अब खुद उनके साथ भाजपा में आ गए हैं।

पार्टी नेतृत्व ने चड्ढा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाले नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके अलावा, वह विपक्ष द्वारा आयोजित विभिन्न विरोध प्रदर्शनों से भी नदारद रहे थे। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने पार्टी से पूछा था कि क्या जनता को प्रभावित करने वाले अहम मुद्दों को उठाना कोई अपराध है।

कानूनी दृष्टिकोण से देखा जाए तो इन सातों नेताओं की संसद सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है। दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद विलय के लिए सहमत होते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

इस दल-बदल का सीधा असर संसद में आम आदमी पार्टी की ताकत पर पड़ा है। पार्टी के पास लोकसभा में कुल तीन सांसद हैं, जबकि उच्च सदन यानी राज्यसभा में यह संख्या 10 थी। अब सात राज्यसभा सदस्यों के एकमुश्त भाजपा में चले जाने के बाद, दोनों सदनों में आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या सिमट कर तीन-तीन रह गई है।

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