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ऊर्जा ही भारत के मजबूत भविष्य का आधार है, देश को 2,000 गीगावाट नई क्षमता की जरूरत: सागर अडानी

| Updated: April 29, 2026 15:17

2047 तक विकसित भारत के लिए 2,000 गीगावाट नई ऊर्जा क्षमता है जरूरी, ऊर्जा क्षेत्र में 100 अरब डॉलर का निवेश करेगा अडानी समूह।

नई दिल्ली। नई दिल्ली में 29 अप्रैल 2026 को आयोजित ‘द इकोनॉमिस्ट: रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट’ को संबोधित करते हुए सागर अडानी ने कहा कि इस सदी में ऊर्जा तक पहुंच ही किसी भी देश के लचीलेपन (resilience) को तय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के वैश्विक संघर्षों और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रों को अब केवल तेजी से आगे नहीं बढ़ना है, बल्कि उन्हें किसी भी प्रकार के व्यवधान का मजबूती से सामना करने के लिए भी तैयार रहना है।

अडानी ने भारत के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि देश की आकांक्षाओं को एक मजबूत नींव की आवश्यकता है और वह नींव ऊर्जा है। जल सुरक्षा से लेकर खाद्य और लॉजिस्टिक्स, एआई और डेटा सेंटर जैसे डिजिटल नेतृत्व तथा आम नागरिक के लिए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने तक, हर बड़े क्षेत्र की जरूरत ऊर्जा पर आकर टिकती है।

भारत की ऊर्जा खपत के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति के आधार पर भारत की ऊर्जा खपत वैश्विक औसत का लगभग एक तिहाई है और चीन के मुकाबले यह केवल पांचवां हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यदि भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई ऊर्जा क्षमता जोड़नी होगी। इस ऊर्जा का किफायती, सुलभ और स्वच्छ होना भी बेहद जरूरी है।

आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने पर जोर देते हुए सागर अडानी ने कहा कि भारत का रास्ता हर चीज के विद्युतीकरण से होकर गुजरता है।

उन्होंने कहा कि मांग को पूरा करने के लिए भारत को एक पोर्टफोलियो दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल्स), हाइड्रो, कुशल थर्मल और परमाणु ऊर्जा सहित देश में उपलब्ध हर ऊर्जा स्रोत का पूरा लाभ उठाना अनिवार्य है।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उसने तेल और गैस की कमी के बावजूद कोयला, हाइड्रो, परमाणु और अक्षय ऊर्जा में योजनाबद्ध तरीके से निवेश करके अपना शानदार बुनियादी ढांचा तैयार किया।

इसके साथ ही, अडानी ने व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए भारत सरकार की नीतियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में लालफीताशाही को कम किया है और नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता लाकर एक शानदार कारोबारी माहौल तैयार किया है।

अडानी समूह की भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने ऊर्जा परिवर्तन के लिए 100 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह विश्व स्तर पर निजी क्षेत्र के सबसे बड़े निवेशों में से एक है।

अडानी समूह दुनिया का सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो, बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित कर रहा है।

संबोधन के अंत में सागर अडानी ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि भारत को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि हम इस बुनियादी ढांचे का कितनी तेजी से निर्माण कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भारत 1.4 बिलियन लोगों के लिए प्रचुर, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित कर लेता है, तो इससे न केवल देश का भविष्य सुरक्षित होगा बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

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