भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन एक बड़े झटके के साथ शुरू हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में एक प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,100 से अधिक अंक लुढ़ककर 76,226 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 भी 314 अंक गिरकर 23,862 पर पहुंच गया।
इस भयंकर बिकवाली के कारण निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए, जिससे बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 467 लाख करोड़ रुपये रह गया। टाइटन के शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि इंडिगो, एसबीआई और मारुति जैसे दिग्गज शेयर भी लाल निशान में रहे।
बाजार में इस भारी निराशा के पीछे कई अहम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण रहे। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है, जिससे युद्ध थमने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 94.88 पर खुलना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी बाजार के माहौल को और खराब कर दिया।
वैश्विक संकट और महंगे कच्चे तेल के कारण देश के चालू खाता घाटे पर पड़ रहे भारी दबाव को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से एक खास अपील की थी। तेलंगाना में 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए उन्होंने नागरिकों से ईंधन बचाने की गुजारिश की।
पीएम ने कहा कि मौजूदा हालात में हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर अत्यधिक जोर देना चाहिए और आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल केवल बहुत जरूरी होने पर ही करना चाहिए।
अपनी इस अपील में प्रधानमंत्री ने कई कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया। उन्होंने लोगों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ की संस्कृति को दोबारा अपनाने, कारपूलिंग करने और मेट्रो का इस्तेमाल करने को कहा।
उन्होंने यहां तक कहा कि देशहित में अगले एक साल तक लोग किसी भी कार्यक्रम के लिए सोना न खरीदें, शादियों या छुट्टियों के लिए विदेश यात्राएं टाल दें और खाने के तेल व रासायनिक खाद का उपयोग भी कम करें ताकि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सके।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस मितव्ययिता की अपील से एविएशन, होटल, ज्वैलरी और पेट्रोलियम से जुड़े सेक्टरों के शेयरों पर तत्काल नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
हालांकि, देश को ईंधन और पैसा बचाने की नसीहत देने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री की अपनी यात्रा चर्चा का विषय बन गई। रविवार को तेलंगाना में देशवासियों से यह संयम बरतने की अपील करने के तुरंत बाद, पीएम मोदी अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे के लिए एक प्राइवेट जेट से उड़ान भरकर सीधे जामनगर पहुंचे।
एक तरफ जहां आम जनता से कारपूलिंग और अनावश्यक यात्राएं टालने को कहा गया, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के इस हवाई सफर ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों का ध्यान खींचा।
गुजरात पहुंचने पर उनकी यात्रा का पैमाना भी बेहद भव्य रहा। जामनगर से लेकर सोमनाथ तक उनकी सुरक्षा और स्वागत के भारी इंतजाम किए गए थे। जब प्रधानमंत्री का काफिला सड़क मार्ग से गुजरा, तो उसमें 50 से अधिक गाड़ियां शामिल थीं।
इसके बाद सोमवार को उन्होंने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ से पहले करीब 1.5 किलोमीटर लंबा एक विशाल रोड शो भी किया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी।
इससे पहले तेलंगाना में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से मजाकिया लहजे में यह भी कहा था कि वह तेलंगाना को बहुत कुछ देना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें (रेड्डी को) सीधे उनसे जुड़ना होगा। आज देश इस समय महंगे कच्चे तेल, गिरते रुपये और शेयर बाजार के भारी नुकसान जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
ऐसे में एक तरफ प्रधानमंत्री की देशवासियों से सादगी और बचत की अपील और ठीक उसके बाद उनके गुजरात दौरे के भव्य इंतजाम और 50 गाड़ियों वाले विशाल काफिले ने देश में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
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