comScore कमजोर रुपये ने बिगाड़ा खेल: 5वें से छठे पायदान पर खिसका भारत, जानिए कब करेगा 'टॉप-3' में वापसी - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

कमजोर रुपये ने बिगाड़ा खेल: 5वें से छठे पायदान पर खिसका भारत, जानिए कब करेगा ‘टॉप-3’ में वापसी

| Updated: April 16, 2026 20:50

रुपये की कमजोरी के कारण भारत दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, लेकिन IMF के अनुसार 2028 तक जापान को पछाड़कर करेगा टॉप-3 में वापसी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर हासिल करने के बावजूद, भारत की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले एक पायदान की गिरावट आई है।

साल 2025 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 3.92 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। इसके साथ ही भारत अब ब्रिटेन (4 ट्रिलियन डॉलर) और जापान (4.44 ट्रिलियन डॉलर) से पीछे हो गया है। इस वैश्विक सूची में अमेरिका 30.8 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ शीर्ष पर है, जिसके बाद 19.6 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन दूसरे और 4.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ जर्मनी तीसरे स्थान पर है।

इससे पहले साल 2024 में भारत का प्रदर्शन बेहतर था और वह वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान पर काबिज था। उस समय भारत की जीडीपी 3.5 ट्रिलियन डॉलर थी, जो ब्रिटेन के 3.4 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले अधिक थी।

रैंकिंग में यह गिरावट तब देखने को मिली है जब भारत ने इस साल रुपये के संदर्भ में लगभग 9 प्रतिशत की नॉमिनल ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि, डॉलर की मजबूती और नई सीरीज के तहत जीडीपी के आंकड़ों में हुए नीचे की तरफ संशोधनों के कारण डॉलर में मापी जाने वाली भारत की जीडीपी वृद्धि की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई।

चूंकि वैश्विक आर्थिक रैंकिंग हमेशा डॉलर में मापी जाती है, इसलिए रुपये के मूल्यह्रास का भारत की स्थिति पर भारी असर पड़ा है। आईएमएफ के अनुमानों से पता चलता है कि रुपया 2024 के 84.6 प्रति डॉलर के स्तर से कमजोर होकर 2025 में 88.5 प्रति डॉलर तक आ सकता है। आने वाले समय में भी रुपये में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2026 में भी भारत छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, लेकिन इसके बाद देश की विकास गति में फिर से शानदार तेजी आएगी। साल 2027 तक भारत के एक बार फिर से ब्रिटेन को पछाड़ने और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है।

आंकड़ों के मुताबिक 2027 तक भारत की जीडीपी 4.58 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि इस दौरान ब्रिटेन की जीडीपी 4.47 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है।

इसके बाद 2028 में भारत के जापान से भी आगे निकलने की पूरी संभावना है। अनुमान के मुताबिक तब भारतीय अर्थव्यवस्था 5.06 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी और जापान 4.74 ट्रिलियन डॉलर पर होगा। इससे नॉमिनल आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

आईएमएफ के संशोधित प्रक्षेपवक्र के अनुसार, भारत 2031 तक निर्णायक रूप से तीसरे स्थान पर काबिज हो जाएगा। उस वक्त भारत की जीडीपी जापान के 5.13 ट्रिलियन डॉलर से कहीं आगे निकलकर 6.79 ट्रिलियन डॉलर हो जाने का अनुमान है।

भारत ने वास्तव में मजबूत विकास दर बनाए रखी है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरावट ने इस बढ़त के एक बड़े हिस्से को कम कर दिया है। आईएमएफ के आंकड़े दर्शाते हैं कि रुपये के संदर्भ में भारत की जीडीपी 2024 के 318 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 2025 में 346.5 ट्रिलियन रुपये हो गई है। मुद्रा की इस कमजोरी के कारण ही डॉलर में यह वृद्धि कम दिखाई देती है।

रैंकिंग में इस मामूली बदलाव के बावजूद भारत का दबदबा कायम है और यह अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है। मध्यम अवधि में लगातार 6 प्रतिशत से ऊपर के विस्तार की उम्मीद वाले कुछ गिने-चुने बड़े देशों में भारत शामिल है।

साल 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे जर्मनी के साथ इसकी दूरी काफी कम हो जाएगी और उसके बाद यह मजबूती से वैश्विक टॉप तीन में प्रवेश कर जाएगा। वहीं 2030 में 39 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपना पहला स्थान बरकरार रखेगी और 27.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीनी अर्थव्यवस्था दूसरे स्थान पर बनी रहेगी।

यह भी पढ़ें-

क्या अब आयुर्वेदिक डॉक्टर भी लिखेंगे एलोपैथिक दवा? गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा सालों पुराना विवाद

परिसीमन विधेयक: क्या बदल जाएगा देश का चुनावी नक्शा?

Your email address will not be published. Required fields are marked *